Mauni Amavasya 2026 Ka Mahatva: सिर्फ स्नान नहीं, ‘मौन’ साधना का पर्व है मौनी अमावस्या, जानें इसका अद्भुत रहस्य
Mauni Amavasya Ka Mahatva: हमारे हिंदू धर्म में पुरे साल भर में 12 अलग अलग अमावस्या आती जाती रहती हैं, लेकिन माघ महीने की आने वाली अमावस्या को सभी अमावस्या में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसे मौनी अमावस्या के नाम से जनता जाता हैं और इस साल 2026 में यह 18 जनवरी, रविवार को पड़ रही है।
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ज्योतिष शास्त्रों में इसे ‘अमृत योग’ की तिथि कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन गंगा जल अमृत क्यों बन जाता है? और हमें इस दिन चुप (Silent) क्यों रहना चाहिए? Freeupay.in के इस लेख में जानें मौनी अमावस्या का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व।
🌟 मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व (Religious Significance)
मौनी अमावस्या को “मिनी कुंभ” के नाम से भी जाना जाता है। और इसका महत्व नीचे बताये गये इन कारणों से सबसे खास बनाता है:
1. ऋषि मनु का जन्म दिवस
यहां ‘मौनी’ शब्द की उत्पत्ति ‘मुनि’ या ‘मनु’ से हुई है। हिन्दू मान्यता के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि इस सृष्टि के रचयिता “ऋषि मनु” का जन्म इसी दिन को हुआ था। इसलिए इस दिन याद रखने और मनु ऋषि के सम्मान में ‘मौनी अमावस्या‘ के रूप में मनाया जाता है।
2. गंगा जल में अमृत
हिन्दू धर्म की पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच में समुद्र मंथन हुआ था, तो उस समय अमृत की कुछ बूंदें प्रयागराज (संगम) में जा गिरी थी। और यह अमृत माघ अमावस्या के दिन को गंगा जल में मिल गया है। इसलिए इस दिन गंगा स्नान करने का ज्यादा महत्व बताया गया हैं और कहते हैं की गंगा स्नान से व्यक्ति को अमरता (मोक्ष) के समान फल की प्राप्ति होती है।
3. देवताओं का निवास
सनातन धर्म के पद्म पुराण अनुसार, माघ महीने में भगवान श्री विष्णु जी सभी 33 कोटि देवी-देवता सहित पृथ्वी लोक में आते हैं और गंगा नदी में वास करते हैं। इसलिए इस दिन किया गया गंगा स्नान सीधे देवताओं को स्पर्श करने जैसा माना गया है।
🔬 मौनी अमावस्या का वैज्ञानिक महत्व (Scientific Reason)
हमारे पूर्वजों द्वारा इस ‘मौन व्रत’ रहने की परंपरा को विज्ञान से जोड़कर बताया था:
- मानसिक शांति (Mental Detox): यह तो आप सब जानते है की माघ महीने में कड़कड़ाती ठंड और ऋतु परिवर्तन का समय होता है। इसलिए इस समय हमारे शरीर की ऊर्जा (Energy) का स्तर बदलने लगता है। और इस दिन चंद्रमा और सूर्य दोनों एक साथ मकर राशि में गोचर कर रहे होते हैं। इन सब खगोलीय घटना का असर व्यक्ति के मन पर पड़ता है। इसलिए इस दिन मौन रहने से हमारा मन शांत और एकाग्र (Focused) होता है।
- वाक् शक्ति का संचय: विज्ञान का मानना है कि व्यक्ति के बोलने में बहुत सारी ऊर्जा खर्च (व्यय) होती है। इसलिए एक दिन चुप रहने से हमारे शरीर की ‘Vital Energy’ सुरक्षित रहती है, और जिससे हमारा इम्यून सिस्टम साल भर के लिए मजबूत हो जाता है।
- सकारात्मक ऊर्जा: यह तो आप सब जानते हो की और दिनों की तुलना में अमावस्या के दिन नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कुछ ज्यादा ही रहता है। मौन रहकर और ईश्वर का ध्यान करने मात्र से हम खुद को नेगेटिविटी ऊर्जा से पूरी साल बच सकते हैं।
📅 2026 में क्यों खास है यह अमावस्या? (Why Special in 2026?)
साल 2026 में मौनी अमावस्या का पर्व 18 जनवरी तारीख को है और दिन रविवार (Sunday) को है।
- रविवार भगवान सूर्य का दिन होता है।
- अमावस्या तिथि पितरों का दिन होता है।
- जब भी सूर्य और पितृ का मिलन होता है, तो यह ‘रविवारी अमावस्या’ के नाम से कहलाती है। इसलिए इस दिन व्यक्ति द्वारा सूर्य को जल देने से सरकारी नौकरी में आ रही समस्या और पिता के साथ चल रहा मतभेद खत्म हो जाते हैं।
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🙏 मौनी अमावस्या पर क्या करें? (Rituals)
इस दिन (मौनी अमावस्या) का पूरा लाभ उठाने लेने के लिए नीचे बताये ये 3 काम जरूर करें:
- मौन स्नान: कम से कम सुबह जगन से लेकर पूजा पाठ करने तक एक शब्द भी न बोलें।
- तिल दान: माघ महीने में किया गया तिल का दान स्वर्ण (सोने) के दान के बराबर माना गया है। इसलिए तिल का दान करें।
- पीपल पूजा: इस दिन रविवार है, इसलिए आपको पीपल पेड़ को बिना छुए उन्की परिक्रमा करें और दीपक जलाएं।
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Mauni Amavasya 2026 Ka Mahatva ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: मौनी अमावस्या 2026 में किस तारीख को है?
Ans: यह 18 जनवरी 2026, रविवार को है।
Q2: क्या मौनी अमावस्या पर पूरा दिन चुप रहना जरूरी है?
Ans: अगर संभव हो तो पूरा दिन रहें, नहीं तो कम से कम स्नान और पूजा खत्म होने तक (लगभग 1-2 घंटे) मौन व्रत जरूर रखें।
Q3: इस दिन किस रंग के कपड़े पहनने चाहिए?
Ans: पवित्र नदियों में स्नान के बाद सूखे और साफ कपड़े पहनें। पूजा में पीले या सफेद वस्त्र पहनना शुभ होता है। काले कपड़े पहनने से बचें।
निष्कर्ष: मौनी अमावस्या हमें सिखाती है कि कभी-कभी शब्दों से ज्यादा ताकत ‘खामोशी’ में होती है। 18 जनवरी 2026 को इस पर्व का महत्व समझें और पुण्य कमाएं।
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