Ravi Pradosh Puja Vidhi 2026: 1 मार्च को है ‘रवि प्रदोष’, इस विधि से करें महादेव की पूजा, दूर होगी हर बीमारी
Ravi Pradosh Puja Vidhi 2026: क्या आप बार-बार बीमार पड़ते हैं? या फिर नौकरी और व्यापार में तरक्की रुकी हुई है? भगवान शिव और सूर्य देव की एक साथ कृपा पाने का सबसे बड़ा दिन आ गया है। 1 मार्च 2026 (रविवार) को फाल्गुन मास का ‘रवि प्रदोष व्रत’ रखा जाएगा।
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रविवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को ‘रवि प्रदोष’ कहते हैं। यह व्रत अच्छी सेहत, लंबी आयु और मान-सम्मान (सरकारी नौकरी) पाने के लिए सबसे अचूक माना जाता है। लेकिन ध्यान रहे, कल शाम को पूजा का शुभ मुहूर्त केवल 48 मिनट का है! Freeupay.in के इस लेख में जानें पूजा की सही विधि और सामग्री लिस्ट, ताकि ऐन वक्त पर कोई गलती न हो।
🕰️ रवि प्रदोष 2026: शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त (ध्यान दें!)
प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा हमेशा ‘प्रदोष काल’ (सूर्यास्त के समय) में की जाती है। त्रयोदशी तिथि शाम को ही समाप्त हो रही है, इसलिए समय का खास ध्यान रखें:
| व्रत की तारीख: | 1 मार्च 2026 (रविवार) |
| प्रदोष काल मुहूर्त (पूजा का समय): | शाम 06:21 बजे से रात 07:09 बजे तक। (शाम 07:09 बजे के बाद त्रयोदशी तिथि समाप्त हो जाएगी। इसलिए इसी 48 मिनट के अंदर आपको शिवजी का अभिषेक और आरती पूरी करनी है।) |
| विशेष: | इसी समय (शाम को) पूजा करने पर ही व्रत का फल मिलता है। |
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📋 पूजा सामग्री लिस्ट (Ravi Pradosh Puja Samagri)
रवि प्रदोष पूजा शुरू करने से पहले अपनी थाली में ये चीजें जरूर रख लें:
| सामग्री (Items) | विवरण (Details) |
| शिवजी के लिए | अभिषेक के लिए: जल से भरा हुआ कलश या लोटा, कच्चा दूध (गाय का संभव हो), दही, घी, शहद, गंगाजल (पंचामृत)। चढ़ाने के लिए: बेलपत्र (21 या 108), धतूरा, भांग, मदार के फूल, सफेद वस्त्र, लाल फूल (रविवार के कारण), पुष्पों की माला, चंदन, अक्षत (चावल)। भोग: सफेद मिठाई (बर्फी या खीर) और मौसमी फल। |
| सूर्य देव के लिए | तांबे का लोटा, लाल फूल, रोली, और थोड़ा सा गुड़। |
| अन्य सामग्री | घी का दीपक, धूपबत्ती, कपूर, कलावा, लाल फूल, मिठाई (बिना नमक वाली) और हवन सामग्री (आम की लकड़ी)। |
🙏 रवि प्रदोष पूजा की संपूर्ण विधि (Step-by-Step Vidhi)
रवि प्रदोष के दिन व्यक्ति को दो समय पूजा करनी होती है— सुबह तो सूर्य देव की और शाम को भगवान शिव की। 1 मार्च (रविवार) को नीचे बताई गई इस विधि का पालन करें:
स्टेप 1: सुबह की पूजा (सूर्य अर्घ्य)
- जातक को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करके साफ कपड़े (लाल या पीले रंग के) पहनें चाहिए।
- इसके बाद तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें लाल फूल, रोली और थोड़ा सा गुड़ डालें।
- पूर्व दिशा की तरफ मुख करके “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करते हुए सूर्य देव को जल अर्पित करें।
- इसके बाद अपने हाथ में जल लेकर दिनभर निराहार (या फलाहार) व्रत रखने का संकल्प कर लें।
1. सुबह का संकल्प (Morning Sankalp)
आप Ravi Pradosh Puja Vidhi को रवि प्रदोष व्रत के दिन जातक को प्रात:काल उठकर नित्य कर्म से निवृत हो स्नान कर शुद्ध कपडे पहनकर भगवान श्री शिव जी का पूजन करना चाहिये। घर के मंदिर में दीप जलाकर हाथ में जल लें और संकल्प लें: “हे महादेव! मैं आज रवि प्रदोष का व्रत रख रहा/रही हूँ। मेरी मनोकामना पूर्ण करें।” पूरे दिन मन ही मन “ऊँ नम: शिवाय ” का जप करें।
2. स्नान (Bath)
प्रदोष काल (शाम 6 बजे) से पहले दोबारा स्नान करें और साफ कपड़े पहनें (सफेद, लाल या पीला रंग शुभ है, काला नहीं)।
3. प्रदोष काल की तैयारी (Evening Preparation)
पूरे दिन निराहार रहें। व्रती को चाहिये की शाम को दुबारा स्नान कर स्वच्छ श्वेत वस्त्र धारण कर लें। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में मंडप सजाएं और शिवलिंग स्थापित करें या फिर अपने नजदीक किसी शिवालय (शिव मंदिर) चले जाये। कुश के आसन पर बैठ कर शिव जी की पूजा विधि-विधान से करें।
4. महा-अभिषेक (Maha Abhishek)
यह पूजा का मुख्य भाग है।
- कलश अथवा लोटे में शुद्ध जल भर लें। “ऊँ नम: शिवाय” कहते हुए शिव जी को जल अर्पित करें।
- इसके बाद कच्चा दूध, दही, घी, शहद और शक्कर को एक एक करके बारी-बारी से अभिषेक करें।
- अभिषेक करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का लगातार जाप करते रहे।
यदि संभव हो तो पांच रंगों से रंगोली बनाकर मंडप तैयार करें। अभिषेक करने के बाद इसके बाद दोनों हाथ जोड़कर शिव जी का ध्यान करें। ध्यान का स्वरूप- करोड़ों चंद्रमा के समान कांतिवान, त्रिनेत्रधारी, मस्तक पर चंद्रमा का आभूषण धारण करने वाले पिंगलवर्ण के जटाजूटधारी, नीले कण्ठ तथा अनेक रुद्राक्ष मालाओं से सुशोभित, वरदहस्त, त्रिशूलधारी, नागों के कुण्डल पहने, व्याघ्र चर्म धारण किये हुए, रत्नजड़ित सिंहासन पर विराजमान शिव जी हमारे सारे कष्टों को दूर कर सुख समृद्धि प्रदान करें।
5. श्रृंगार और अर्पण
- शिवलिंग पर त्रिपुंड (चंदन) लगाएं।
- बेलपत्र (चिकना हिस्सा नीचे करके), धतूरा और सफेद फूल आदि को चढ़ाएं।
- माता पार्वती को सुहाग की सामग्री और लाल चुनरी अर्पित करें।
6. कथा और आरती
एक दीपक घी का जलाएं (शिवजी के लिए) जलाकर रवि प्रदोष व्रत कथा (गरीब ब्राह्मण और उसकी भक्ति वाली कहानी) को पढ़ें (जिसका लिंक नीचे दिया गया है)। अंत में कपूर जलाकर हवन सामग्री मिलाकर 11 या 21 या 108 बार “ऊँ ह्रीं क्लीं नम: शिवाय स्वाहा ” मंत्र से आहुति दें। उसके बाद शिव जी की आरती करें। उपस्थित जनों को आरती दें। सभी को प्रसाद वितरित करें। उसके बाद भोजन करें। भोजन में केवल मीठी सामग्रियों का उपयोग करें।
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रवि प्रदोष व्रत उद्यापन की संपूर्ण विधि, सामग्री और नियम | Ravi Pradosh Udyapan Vidhi: A Complete Step-by-Step Guide (with Samagri List)
स्कंद पुराण के अनुसार व्रती को कम-से-कम 11 अथवा 26 त्रयोदशी व्रत के बाद उद्यापन करना चाहिये। उद्यापन के एक दिन पहले (यानी द्वादशी तिथि को) श्री गणेश भगवान का विधिवत षोडशोपचार विधि से पूजन करें तथा पूरी रात शिव-पार्वती और श्री गणेश जी के भजनों के साथ जागरण करें। उद्यापन के दिन प्रात:काल उठकर नित्य क्रमों से निवृत हो जायें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा गृह को शुद्ध कर लें।
Ravi Pradosh Puja Vidhi में पूजा स्थल पर रंगीन वस्त्रों और रंगोली से मंडप बनायें। मण्डप में एक चौकी अथवा पटरे पर शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। अब शिव-पार्वती की विधि-विधान से Ravi Pradosh Puja Vidhi पूरी करें। भोग लगायें। रवि त्रयोदशी प्रदोष व्रत कथा सुने अथवा सुनायें।
अब हवन के लिये सवा किलो (1.25 किलोग्राम) आम की लकड़ी को हवन कुंड में सजायें। हवन के लिये गाय के दूध में खीर बनायें। हवन कुंड का पूजन करें। दोनों हाथ जोड़कर हवन कुण्ड को प्रणाम करें। अब अग्नि प्रज्वलित करें। तदंतर शिव-पार्वती के उद्देश्य से खीर से ‘ऊँ उमा सहित शिवाय नम:’ मंत्र का उच्चारण करते हुए 108 बार आहुति दें। हवन पूर्ण होने के पश्चात् शिव जी की आरती करें।
ब्राह्मणों को सामर्थ्यानुसार दान दें एवं भोजन करायें। आप अपने इच्छानुसार एक या दो या पाँच ब्राह्मणों को भोजन एवं दान करा सकते हैं। यदि भोजन कराना सम्भव ना हो तो किसी मंदिर में यथाशक्ति दान करें। इसके बाद बंधु बांधवों सहित प्रसाद ग्रहण करें एवं भोजन करें।
इस प्रकार उद्यापन करने से व्रती पुत्र-पौत्रादि से युक्त होता है तथा आरोग्य लाभ होता है। इसके अतिरिक्त वह अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है एवं सम्पूर्ण पापों से मुक्त होकर शिवधाम को पाता है। खोये हुए धन की प्राप्ति करता है और जीवन में सफलता प्राप्त करता है।
रवि प्रदोष व्रत पूजा 2026: Benefits of Ravi Pradosh Vrat Puja
जो प्रदोष रविवार के दिन पड़ता है उसे भानुप्रदोष या रवि प्रदोष कहते हैं। इस दिन नियम पूर्वक व्रत रखने से जीवन में सुख, शांति और लंबी आयु प्राप्त होती है। रवि प्रदोष का संबंध सीधा सूर्य से होता है। अत: चंद्रमा के साथ सूर्य भी आपके जीवन में सक्रिय रहता है। यह सूर्य से संबंधित होने के कारण नाम, यश और सम्मान भी दिलाता है। अगर आपकी कुंडली में अपयश के योग हो तो यह प्रदोष करें। रवि प्रदोष रखने से सूर्य संबंधी सभी परेशानियां दूर हो जाती है।
रवि प्रदोष, सोम प्रदोष व शनि प्रदोष के व्रत को पूर्ण करने से अतिशीघ्र कार्यसिद्धि होकर अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है। सर्वकार्य सिद्धि हेतु शास्त्रों में कहा गया है कि यदि कोई भी 11 अथवा एक वर्ष के समस्त त्रयोदशी के व्रत करता है तो उसकी समस्त मनोकामनाएं अवश्य और शीघ्रता से पूर्ण होती है। प्रदोष रखने से आपका चंद्र ठीक होता है। अर्थात शरीर में चंद्र तत्व में सुधार होता है। माना जाता है कि चंद्र के सुधार होने से शुक्र भी सुधरता है और शुक्र से सुधरने से बुध भी सुधर जाता है। मानसिक बैचेनी खत्म होती है।
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🌟 रवि प्रदोष के मान-सम्मान और स्वास्थ्य के लिए 2 अचूक उपाय (Special Remedies)
अगर आप हमेशा किसी ना किसी बीमार से ग्रसित रहते हैं या फिर कैरियर / सरकारी नौकरी में रुकावट आती रहती है, तो ये उपाय जरूर करें:
- उपाय 1: शाम को रवि प्रदोष व्रत की पूजा करते समय शिवलिंग पर काले तिल और गुड़ मिश्रित जल को चढ़ाना चाहिए। इससे व्यक्ति की पुरानी से पुरानी बीमारी से राहत मिलने लगती है।
- उपाय 2: रवि प्रदोष व्रत पूजा करने के बाद शिवजी के सामने ही बैठकर ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ और ‘शिव चालीसा’ का पाठ करना चाहिए। इससे व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान और नौकरी में तरक्की मिलती है।
⚠️ रवि प्रदोष व्रत के 3 सख्त नियम (Do’s and Don’ts)
अगर आप यह रवि प्रदोष व्रत रख रहे हैं, तो नीचे बताये गये इन नियमों का पालन जरूर करें:
- नमक का त्याग: रविवार के दिन नमक खाना वर्जित होता है। इसलिए इस व्रत में सेंधा नमक भी न खाएं। फलाहार या मीठा भोजन ही करें।
- काले कपड़े न पहनें: पूजा के समय काले रंग के कपड़े पहनने से बचें। सफेद, लाल या पीला रंग अत्यंत शुभ है।
- तांबे के लोटे का प्रयोग: शिवजी को दूध तांबे के लोटे से कभी न चढ़ाएं (यह विष बन जाता है)। तांबे के लोटे का प्रयोग केवल सूर्य देव को जल देने के लिए करें।
इसे भी पढ़ें ➤ रवि प्रदोष व्रत कथा: जानें पौराणिक कथा और महत्व
Ravi Pradosh Puja Vidhi 2026 ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: क्या 1 मार्च को महिलाएं रवि प्रदोष व्रत कर सकती हैं?
Ans: जी हाँ, सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और स्वास्थ्य के लिए, और कुंवारी कन्याएं योग्य वर के लिए यह व्रत कर सकती हैं।
Q2: अगर शाम 07:09 बजे तक पूजा न कर पाएं तो क्या करें?
Ans: कोशिश करें कि अभिषेक और मुख्य पूजा इस समय के अंदर हो जाए। अगर देर हो जाए, तो भगवान शिव से क्षमा मांगकर अपनी पूजा संपन्न करें, भोलेनाथ भाव के भूखे हैं।
Q3: व्रत का पारण (व्रत खोलना) कब करें?
Ans: रवि प्रदोष व्रत का पारण अगले दिन यानी 2 मार्च (सोमवार) को सुबह 06:12 से 07:38 बजे के बीच शिवजी को जल चढ़ाने के बाद किया जाएगा।
निष्कर्ष: रवि प्रदोष का व्रत जीवन से रोगों और अंधकार को मिटाकर सूर्य के समान तेज लाता है। 1 मार्च 2026 को Freeupay.in पर बताई गई इस विधि और मुहूर्त के अनुसार अपनी पूजा संपन्न करें।
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