Sawan Somvar Vrat Katha: यह तो आप सब जानते हैं, की हमारे सनातन धर्म में सावन (श्रावण) का महीना सबसे ज्यादा धूमधाम से बनाया जाता हैं, पूरी महीनें भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पूरा महिना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है। इस कारणों से जो भक्त सावन के सोमवार का व्रत को पूर्ण श्रद्धा से करता हैं एवं शिवलिंग का जलाभिषेक करने के बाद सावन सोमवार व्रत कथा पढ़ता या सुनता है, भोलेनाथ उसकी हर संकट से रक्षा करते हैं।
Sawan Somvar Vrat Katha: सावन सोमवार पर अवश्य पढ़ें यह सिद्ध कथा, भोलेनाथ पूरी करेंगे हर मनोकामना, मिटेगी दरिद्रता
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कहा जाता है कि इस व्रत को करने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है, वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और घर में सुख-समृद्धि का स्थायी वास होता है। बिना व्रत कथा पढ़े या सुने सावन सोमवार का व्रत अधूरा माना जाता है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें सावन सोमवार की सबसे प्रामाणिक व्रत कथा, पूजा की सरल विधि और इसके अचूक लाभ।
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🕰️ सावन सोमवार 2026 तारीख (Sawan Somvar 2026 Date)
सावन सोमवार व्रत रखने वालों के लिए कब कब व्रत करना होगा, इसके लिए यहाँ सभी तारीखों की जानकारी दी गई हैं:
| विवरण (Event) | तारीख और समय (Date & Time) |
| पहला सावन का सोमवार | 3 अगस्त, 2026 |
| दूसरा सावन का सोमवार | 10 अगस्त, 2026 |
| तीसरा सावन का सोमवार | 17 अगस्त, 2026 |
| चौथा सावन का सोमवार | 24 अगस्त, 2026 |
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🌺 क्विक लिस्ट: सावन सोमवार व्रत के 8 अचूक लाभ (Benefits of the Sawan Monday Fast)
सावन सोमवार व्रत कथा (Sawan Somvar Vrat Katha) जानकारी पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए सावन सोमवार का व्रत करने से आपके जीवन में क्या चमत्कारिक बदलाव आते हैं:
| जीवन की समस्या (Problem) | सावन सोमवार व्रत के अचूक लाभ (Benefits) |
| विवाह में अड़चन या देरी | मनचाहा और सुयोग्य जीवनसाथी प्राप्त होता है तथा वैवाहिक बाधाएं दूर होती हैं। |
| संतान सुख का अभाव | सावन सोमवार की कथा पढ़ने से योग्य और स्वस्थ संतान की प्राप्ति होती है। |
| भयंकर रोग और शारीरिक कष्ट | महामृत्युंजय स्वरूप भगवान शिव असाध्य रोगों को दूर कर अकाल मृत्यु के भय को खत्म करते हैं। |
| आर्थिक तंगी और कर्ज | माता पार्वती और शिव जी की कृपा से घर में अपार धन-धान्य की वृद्धि होती है। |
| कालसर्प दोष और अकाल मृत्यु का भय | कुंडली के क्रूर दोष शांत होते हैं, लंबी आयु मिलती है और अकाल मृत्यु का भय खत्म होता है। |
| मानसिक तनाव और अशांति | सोमवार के स्वामी चंद्र देव हैं; शिव पूजा से मानसिक शांति और एकाग्रता प्राप्त होती है। |
| पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय | सावन सोमवार के दिन प्रातःकाल सूर्योदय के समय या प्रदोष काल (शाम के समय) पूजा सर्वश्रेष्ठ है। |
| व्रत में भगवान का पूजन | शिवलिंग पर बेलपत्र, भांग, धतूरा और कच्चा दूध अर्पित करने से अनंत गुना फल मिलता है। |
📿 सावन सोमवार की प्रामाणिक व्रत कथा (Sawan Somvar Vrat Katha in Hindi)
जो भक्त उपवास रखते हैं, उन्हें शाम के समय भगवान शिव की पूजा करने के बाद एक आसन पर बैठकर इस चमत्कारी कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए:
श्रावण सोमवार की कथा के अनुसार अमरपुर नगर में एक धनी व्यापारी रहता था। दूर-दूर तक उसका व्यापार फैला हुआ था। नगर में उस व्यापारी का सभी लोग मान-सम्मान करते थे। इतना सबकुछ होने पर भी वह व्यापारी अंतर्मन से बहुत दुखी था क्योंकि उस व्यापारी का कोई पुत्र नहीं था।
दिन-रात उसे एक ही चिंता सताती रहती थी। उसकी मृत्यु के बाद उसके इतने बड़े व्यापार और धन-संपत्ति को कौन संभालेगा। पुत्र पाने की इच्छा से वह व्यापारी प्रति सोमवार भगवान शिव की व्रत-पूजा किया करता था। सायंकाल को व्यापारी शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव के सामने घी का दीपक जलाया करता था। Sawan Somvar Vrat Katha
उस व्यापारी की भक्ति देखकर एक दिन पार्वती ने भगवान शिव से कहा- ‘हे प्राणनाथ, यह व्यापारी आपका सच्चा भक्त है। कितने दिनों से यह सोमवार का व्रत और पूजा नियमित कर रहा है। भगवान, आप इस व्यापारी की मनोकामना अवश्य पूर्ण करें।’
भगवान शिव ने मुस्कराते हुए कहा- ‘हे पार्वती! इस संसार में सबको उसके कर्म के अनुसार फल की प्राप्ति होती है। प्राणी जैसा कर्म करते हैं, उन्हें वैसा ही फल प्राप्त होता है।’ Sawan Somvar Vrat Katha
इसके बावजूद पार्वतीजी नहीं मानीं। उन्होंने आग्रह करते हुए कहा- ‘नहीं प्राणनाथ! आपको इस व्यापारी की इच्छा पूरी करनी ही पड़ेगी। यह आपका अनन्य भक्त है। प्रति सोमवार आपका विधिवत व्रत रखता है और पूजा-अर्चना के बाद आपको भोग लगाकर एक समय भोजन ग्रहण करता है। आपको इसे पुत्र-प्राप्ति का वरदान देना ही होगा।’
पार्वती का इतना आग्रह देखकर भगवान शिव ने कहा- ‘तुम्हारे आग्रह पर मैं इस व्यापारी को पुत्र-प्राप्ति का वरदान देता हूं। लेकिन इसका पुत्र 16 वर्ष से अधिक जीवित नहीं रहेगा।’
उसी रात भगवान शिव ने स्वप्न में उस व्यापारी को दर्शन देकर उसे पुत्र-प्राप्ति का वरदान दिया और उसके पुत्र के 16 वर्ष तक जीवित रहने की बात भी बताई। Sawan Somvar Vrat Katha
भगवान के वरदान से व्यापारी को खुशी तो हुई, लेकिन पुत्र की अल्पायु की चिंता ने उस खुशी को नष्ट कर दिया। व्यापारी पहले की तरह सोमवार का विधिवत व्रत करता रहा। कुछ महीने पश्चात उसके घर अति सुंदर पुत्र उत्पन्न हुआ। पुत्र जन्म से व्यापारी के घर में खुशियां भर गईं। बहुत धूमधाम से पुत्र-जन्म का समारोह मनाया गया।
व्यापारी को पुत्र-जन्म की अधिक खुशी नहीं हुई क्योंकि उसे पुत्र की अल्प आयु के रहस्य का पता था। यह रहस्य घर में किसी को नहीं मालूम था। विद्वान ब्राह्मणों ने उस पुत्र का नाम अमर रखा।
जब अमर 12 वर्ष का हुआ तो शिक्षा के लिए उसे वाराणसी भेजने का निश्चय हुआ। व्यापारी ने अमर के मामा दीपचंद को बुलाया और कहा कि अमर को शिक्षा प्राप्त करने के लिए वाराणसी छोड़ आओ। अमर अपने मामा के साथ शिक्षा प्राप्त करने के लिए चल दिया। रास्ते में जहां भी अमर और दीपचंद रात्रि विश्राम के लिए ठहरते, वहीं यज्ञ करते और ब्राह्मणों को भोजन कराते थे। Sawan Somvar Vrat Katha
लंबी यात्रा के बाद अमर और दीपचंद एक नगर में पहुंचे। उस नगर के राजा की कन्या के विवाह की खुशी में पूरे नगर को सजाया गया था। निश्चित समय पर बारात आ गई लेकिन वर का पिता अपने बेटे के एक आंख से काने होने के कारण बहुत चिंतित था। उसे इस बात का भय सता रहा था कि राजा को इस बात का पता चलने पर कहीं वह विवाह से इनकार न कर दें। इससे उसकी बदनामी होगी।
वर के पिता ने अमर को देखा तो उसके मस्तिष्क में एक विचार आया। उसने सोचा क्यों न इस लड़के को दूल्हा बनाकर राजकुमारी से विवाह करा दूं। विवाह के बाद इसको धन देकर विदा कर दूंगा और राजकुमारी को अपने नगर में ले जाऊंगा। Sawan Somvar Vrat Katha
वर के पिता ने इसी संबंध में अमर और दीपचंद से बात की। दीपचंद ने धन मिलने के लालच में वर के पिता की बात स्वीकार कर ली। अमर को दूल्हे के वस्त्र पहनाकर राजकुमारी चंद्रिका से विवाह करा दिया गया। राजा ने बहुत-सा धन देकर राजकुमारी को विदा किया।
अमर जब लौट रहा था तो सच नहीं छिपा सका और उसने राजकुमारी की ओढ़नी पर लिख दिया- ‘राजकुमारी चंद्रिका, तुम्हारा विवाह तो मेरे साथ हुआ था, मैं तो वाराणसी में शिक्षा प्राप्त करने जा रहा हूं। अब तुम्हें जिस नवयुवक की पत्नी बनना पड़ेगा, वह काना है।’
जब राजकुमारी ने अपनी ओढ़नी पर लिखा हुआ पढ़ा तो उसने काने लड़के के साथ जाने से इनकार कर दिया। राजा ने सब बातें जानकर राजकुमारी को महल में रख लिया। उधर अमर अपने मामा दीपचंद के साथ वाराणसी पहुंच गया। अमर ने गुरुकुल में पढ़ना शुरू कर दिया। Sawan Somvar Vrat Katha
जब अमर की आयु 16 वर्ष पूरी हुई तो उसने एक यज्ञ किया। यज्ञ की समाप्ति पर ब्राह्मणों को भोजन कराया और खूब अन्न, वस्त्र दान किए। रात को अमर अपने शयनकक्ष में सो गया। शिव के वरदान के अनुसार शयनावस्था में ही अमर के प्राण-पखेरू उड़ गए। सूर्योदय पर मामा अमर को मृत देखकर रोने-पीटने लगा। आसपास के लोग भी एकत्र होकर दुःख प्रकट करने लगे।
मामा के रोने, विलाप करने के स्वर समीप से गुजरते हुए भगवान शिव और माता पार्वती ने भी सुने। पार्वतीजी ने भगवान से कहा- ‘प्राणनाथ! मुझसे इसके रोने के स्वर सहन नहीं हो रहे। आप इस व्यक्ति के कष्ट अवश्य दूर करें।’ Sawan Somvar Vrat Katha
भगवान शिव ने पार्वतीजी के साथ अदृश्य रूप में समीप जाकर अमर को देखा तो पार्वतीजी से बोले- ‘पार्वती! यह तो उसी व्यापारी का पुत्र है। मैंने इसे 16 वर्ष की आयु का वरदान दिया था। इसकी आयु तो पूरी हो गई।’
पार्वतीजी ने फिर भगवान शिव से निवेदन किया- ‘हे प्राणनाथ! आप इस लड़के को जीवित करें। नहीं तो इसके माता-पिता पुत्र की मृत्यु के कारण रो-रोकर अपने प्राणों का त्याग कर देंगे। इस लड़के का पिता तो आपका परम भक्त है। वर्षों से सोमवार का व्रत करते हुए आपको भोग लगा रहा है।’ पार्वती के आग्रह करने पर भगवान शिव ने उस लड़के को जीवित होने का वरदान दिया और कुछ ही पल में वह जीवित होकर उठ बैठा।
शिक्षा समाप्त करके अमर मामा के साथ अपने नगर की ओर चल दिया। दोनों चलते हुए उसी नगर में पहुंचे, जहां अमर का विवाह हुआ था। उस नगर में भी अमर ने यज्ञ का आयोजन किया। समीप से गुजरते हुए नगर के राजा ने यज्ञ का आयोजन देखा। Sawan Somvar Vrat Katha
राजा ने अमर को तुरंत पहचान लिया। यज्ञ समाप्त होने पर राजा अमर और उसके मामा को महल में ले गया और कुछ दिन उन्हें महल में रखकर बहुत-सा धन, वस्त्र देकर राजकुमारी के साथ विदा किया।
रास्ते में सुरक्षा के लिए राजा ने बहुत से सैनिकों को भी साथ भेजा। दीपचंद ने नगर में पहुंचते ही एक दूत को घर भेजकर अपने आगमन की सूचना भेजी। अपने बेटे अमर के जीवित वापस लौटने की सूचना से व्यापारी बहुत प्रसन्न हुआ। Sawan Somvar Vrat Katha
व्यापारी ने अपनी पत्नी के साथ स्वयं को एक कमरे में बंद कर रखा था। भूखे-प्यासे रहकर व्यापारी और उसकी पत्नी बेटे की प्रतीक्षा कर रहे थे। उन्होंने प्रतिज्ञा कर रखी थी कि यदि उन्हें अपने बेटे की मृत्यु का समाचार मिला तो दोनों अपने प्राण त्याग देंगे।
व्यापारी अपनी पत्नी और मित्रों के साथ नगर के द्वार पर पहुंचा। अपने बेटे के विवाह का समाचार सुनकर, पुत्रवधू राजकुमारी चंद्रिका को देखकर उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। उसी रात भगवान शिव ने व्यापारी के स्वप्न में आकर कहा- ‘हे श्रेष्ठी! मैंने तेरे सोमवार के व्रत करने और व्रतकथा सुनने से प्रसन्न होकर तेरे पुत्र को लंबी आयु प्रदान की है।’ व्यापारी बहुत प्रसन्न हुआ।
सोमवार का व्रत करने से व्यापारी के घर में खुशियां लौट आईं। शास्त्रों में लिखा है कि जो स्त्री-पुरुष सोमवार का विधिवत व्रत करते और व्रत कथा सुनते हैं उनकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। Sawan Somvar Vrat Katha
कथा का फल: जो भी मनुष्य सावन के सोमवार का व्रत रखता है और इस साहूकार की कथा को पढ़ता या सुनता है, भगवान शिव उसकी हर मनोकामना पूरी करते हैं और उसके परिवार को अकाल मृत्यु से बचाते हैं।
(कथा समाप्त होने के बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें और भगवान शिव की आरती उतारें।)
संपर्क करें- पंडित ललित त्रिवेदी (+91-9667189678)
किसी भी प्रकार के ज्योतिष एवं वास्तु संबंधी परामर्श के लिए वास्तु ज्योतिष पंडित ललित त्रिवेदी से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, जैसे कि धन, स्वास्थ्य, व्यापार, करियर, नौकरी आदि जैसी समस्याएं। वास्तु विजिट भी करवा सकते हैं, तथा वास्तु परामर्श भी प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी प्रकार के कुंडली मिलान, विवाह मुहूर्त, गृह प्रवेश या अन्य सभी प्रकार के मुहूर्त एवं शुभ समय निकलवाने के लिए तुरंत संपर्क करें।
जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?
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🌟 कालसर्प दोष, दरिद्रता और संकट निवारण का अचूक ज्योतिषीय रहस्य
शक्ति विहार, कोटपूतली (राजस्थान) के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी स्पष्ट करते हैं कि सावन का महीना भगवान शिव की असीम ऊर्जा का समय होता है। जब जन्म कुंडली में ‘कालसर्प दोष’, ‘पितृ दोष’ या ‘चंद्रमा’ पीड़ित (विष योग/ग्रहण दोष) होता है, तो व्यक्ति को मानसिक अवसाद, विवाह में भारी विलंब और व्यापार में अचानक कंगाली का सामना करना पड़ता है।
सावन सोमवार के पावन अवसर पर कुंडली के इन भयंकर मारक दोषों को 100% शून्य करने, अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति पाने और साक्षात महादेव की कृपा प्राप्त करने के लिए साक्षात शिव स्वरूप ‘5 मुखी रुद्राक्ष’ (5 Mukhi Rudraksha) गले में धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। सावन सोमवार के दिन इसे गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध करके धारण करने से व्यक्ति के चारों ओर एक ऐसा अभेद्य शिव घेरा बन जाता है, जिससे कोई भी नकारात्मक शक्ति, रोग या दुर्भाग्य उसे छू भी नहीं सकता।
⚠️ सावन सोमवार व्रत के 4 कड़े नियम
- काले वस्त्रों का निषेध: भगवान शिव की पूजा और सावन के सोमवार के दिन काले रंग के कपड़े पहनना पूरी तरह से वर्जित माना गया है।
- तामसिक भोजन से दूरी: व्रत वाले दिन घर में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का भूलकर भी सेवन न करें। घर का माहौल सात्विक और भक्तिमय रखें।
- क्रोध और विवाद न करें: शिव जी शांत स्वरूप हैं। व्रत के दिन किसी पर क्रोध न करें, अपशब्द न बोलें और घर के बुजुर्गों का सम्मान करें।
- शिवलिंग पर वर्जित वस्तुएं: भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी केतकी के फूल, तुलसी दल (Tulsi leaves), कुमकुम (सिंदूर) और हल्दी न चढ़ाएं। भोलेनाथ को बेलपत्र, भांग, धतूरा, श्वेत चंदन और गंगाजल सबसे अधिक प्रिय है।
Sawan Somvar Vrat Katha in Hindi PDF❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: सावन सोमवार का व्रत कितनी बार करना चाहिए?
Ans: सावन के महीने में पड़ने वाले सभी सोमवार (सामान्यतः 4 या 5 सोमवार) का व्रत रखना सबसे उत्तम माना जाता है।
Q2: क्या महिलाएं शिवलिंग को स्पर्श कर सकती हैं?
Ans: जी हाँ, महिलाएं पूर्ण पवित्रता के साथ शिवलिंग का जलाभिषेक कर सकती हैं और पूजा कर सकती हैं।
Q3: सावन सोमवार व्रत में क्या खाना चाहिए?
Ans: व्रत के दौरान आप फल, दूध, दही, साबूदाने की खिचड़ी, सिंघाड़े या कुट्टू के आटे का सेवन (फलाहार के रूप में) कर सकते हैं।
Q4: क्या सावन सोमवार का व्रत बीच में छोड़ सकते हैं?
Ans: यदि आपने पूरे सावन के सोमवार या 16 सोमवार का संकल्प लिया है, तो इसे बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। यदि किसी स्वास्थ्य समस्या या सूतक के कारण व्रत छूट जाए, तो भगवान शिव से क्षमा मांगकर अगले सोमवार को व्रत जारी रखें।
Q5: शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही समय क्या है?
Ans: सावन सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए प्रातःकाल सूर्योदय से लेकर पूर्वाह्न का समय और शाम को ‘प्रदोष काल’ (सूर्यास्त के 45 मिनट पहले और बाद का समय) सबसे उत्तम माना गया है।
निष्कर्ष: सावन सोमवार का व्रत केवल एक शारीरिक उपवास नहीं, बल्कि भगवान शिव की असीम ऊर्जा और शांति को अपने भीतर समाहित करने का माध्यम है। Freeupay.in पर बताई गई इस प्रामाणिक कथा को पूर्ण श्रद्धा से पढ़ें या सुनें। महादेव की कृपा से आपके जीवन की हर बाधा तुरंत नष्ट होगी और घर में अपार सुख-शांति आएगी।
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