WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Devshayani Ekadashi Vrat Katha in Hindi PDF | देवशयनी एकादशी 2026: संपूर्ण व्रत कथा और महत्व

Devshayani Ekadashi Vrat Katha in Hindi PDF | देवशयनी एकादशी 2026: संपूर्ण व्रत कथा और महत्व: देवशयनी एकादशी आषाढ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन ‘देवशयनी एकादशी’ (Devshayani Ekadashi) मनाई जाती हैं। यानी आती हैं। देवशयनी एकादशी का व्रत भोग और परलोक में मुक्ति को देने वाला हैं। उसके समस्त पाप दूर हो जाते हैं और अंत में स्वर्ग प्राप्त होता है। देवशयनी एकादशी को शयनी एकादशी, प्रथमा एकादशी और महाएकादशी आदि के नाम से भी जाना जाता हैं।

Devshayani Ekadashi Vrat Katha 2026: देवशयनी एकादशी पर अवश्य पढ़ें ये चमत्कारी कथा, 4 महीने तक श्रीहरि करेंगे हर संकट से रक्षा

हमारी वेबसाइट FreeUpay.in (फ्री उपाय.इन) में रोजाना आने वाले व्रत त्यौहार की जानकारी के अलावा मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, साधना, व्रत कथा, ज्योतिष उपाय, लाल किताब उपाय, स्तोत्र आदि महत्वपूर्ण जानकारी उबलब्ध करवाई जाएगी सभी जानकारी का अपडेट पाने के लिए दिए गये हमारे WhatsApp Group Link (व्हात्सप्प ग्रुप लिंक) क्लिक करके Join (ज्वाइन) कर सकते हैं।

हर समस्या का फ्री उपाय (Free Upay) जानने के लिए हमारे WhatsApp Channel (व्हात्सप्प चैनल) से जुड़ें: यहां क्लिक करें (Click Here)

Devshayani Ekadashi Vrat Katha
Devshayani Ekadashi Vrat Katha

Devshayani Ekadashi Vrat Katha 2026: इस एकादशी तिथि को ‘देवशयनी एकादशी’ (Devshayani Ekadashi) के अलावा हरिशयनी या पद्मनाभा एकादशी के नाम से भी जाना चाहता हैं। हमारे धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन से सृष्टि के पालनकर्त्ता भगवान श्रीहरि विष्णु पूरे चार महीने के लिए पाताल लोक में राजा बलि के यहाँ पर जाकर या क्षीरसागर में जाकर ‘योग निद्रा’ (Yoga Nidra) में चले जाते हैं।

ऑनलाइन सलाह (Online): कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन (Call Button) पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।

महत्वपूर्ण जानकारी: एक सिद्ध किया हुआ असली रूद्राक्ष आपकी दशा और दिशा दोनों बदल सकता हैं? अभी यहां से खरीदें

ऑफलाइन सलाह (Offline): कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए हमसे मिलने के लिए यहाँ तुरंत सम्पर्क करें: क्लिक हियर (Click Here)

भगवान के शयन काल के इन चार महीनों को ‘चातुर्मास’ (Chaturmas) कहा जाता है, जिसमें विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे सभी मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। मान्यता है कि जो भी भक्त देवशयनी एकादशी का व्रत रखता है और पूर्ण श्रद्धा से इसकी कथा पढ़ता या सुनता है, उसके जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें देवशयनी एकादशी की संपूर्ण व्रत कथा, पूजा विधि और चातुर्मास के अचूक उपाय।

🕰️ देवशयनी एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और पारण का समय (Devshayani Ekadashi Shubh Muhurat)

देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi Vrat Katha) व्रत रखने वालों के लिए एकादशी तिथि और व्रत खोलने (पारण) का सही समय जानना सबसे जरूरी है:

विवरण (Event)तारीख और समय (Date & Time)
देवशयनी एकादशी व्रत की तारीख25 जुलाई, 2026 (शनिवार)
एकादशी तिथि आरंभ24 जुलाई, 2026, सुबह 09:13 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त25 जुलाई, 2026, सुबह 11:34 बजे तक
व्रत पारण का समय (Dwadashi Parana)26 जुलाई 2026 (रविवार) को सुबह 05:48 बजे से 08:30 बजे तक

सलाह: कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।

महत्वपूर्ण जानकारी: आपकी समस्या के अनुसार सिद्ध किये गये असली रूद्राक्ष यहां से खरीदें

🌺 क्विक लिस्ट: देवशयनी एकादशी व्रत और कथा पाठ के 5 महालाभ (Devshayani Ekadashi Vrat Katha Benefits)

देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi Vrat Katha) जानकारी पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए देवशयनी एकादशी का व्रत करने से आपके जीवन में क्या चमत्कारिक बदलाव आते हैं:

जीवन का भयंकर कष्ट (Problem)देवशयनी एकादशी व्रत के अचूक लाभ (Benefits)
भयंकर कर्ज और दरिद्रतामाता लक्ष्मी की स्थायी कृपा प्राप्त होती है और घर से हमेशा के लिए कंगाली मिट जाती है।
पापों और दोषों से मुक्तिजाने-अनजाने में हुए जन्मों-जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
चातुर्मास में नकारात्मक ऊर्जायोग निद्रा के दौरान भी भगवान विष्णु साधक की हर तांत्रिक और नकारात्मक बाधा से रक्षा करते हैं।
व्रत में भगवान का पूजनइस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा और तुलसी अर्चना का अनंत गुना फल मिलता है।
व्रत का पारण (Fast Breaking)व्रत के अगले दिन (द्वादशी तिथि को) सूर्योदय के बाद ब्राह्मणों को दान देकर ही व्रत खोला जाता है।

📿 देवशयनी एकादशी की प्रामाणिक व्रत कथा (Devshayani Ekadashi Vrat Katha in Hindi)

जो भक्त उपवास नहीं भी रख पाते, वे यदि एकादशी के दिन पूर्ण सात्विकता के साथ इस देवशयनी एकादशी व्रत कथा (Devshayani Ekadashi Vrat Katha) का पाठ करें, तो उन्हें संपूर्ण व्रत का पुण्य प्राप्त होता है।

पौराणिक कथा: धर्मराज युधिष्ठिर ने कहा- हे केशव! आषाढ़ शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? इस व्रत के करने की विधि क्या है और किस देवता का पूजन किया जाता है? श्रीकृष्ण कहने लगे कि हे युधिष्ठिर! जिस कथा को ब्रह्माजी ने नारदजी से कहा था वही मैं तुमसे कहता हूँ। एक समय नारजी ने ब्रह्माजी से यही प्रश्न किया था। 

तब ब्रह्माजी ने उत्तर दिया कि हे नारद तुमने कलियुगी जीवों के उद्धार के लिए बहुत उत्तम प्रश्न किया है। क्योंकि एकादशी का व्रत सब व्रतों में उत्तम है। इस व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और जो मनुष्य इस व्रत को नहीं करते वे नरकगामी होते हैं। Devshayani Ekadashi Vrat Katha

इस व्रत के करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। इस एकादशी का नाम पद्मा है। अब मैं तुमसे एक पौराणिक कथा कहता हूँ। तुम मन लगाकर सुनो। सूर्यवंश में मांधाता नाम का एक चक्रवर्ती राजा हुआ है, जो सत्यवादी और महान प्रतापी था। वह अपनी प्रजा का पुत्र की भाँति पालन किया करता था। उसकी सारी प्रजा धनधान्य से भरपूर और सुखी थी। उसके राज्य में कभी अकाल नहीं पड़ता था। 

एक समय उस राजा के राज्य में तीन वर्ष तक वर्षा नहीं हुई और अकाल पड़ गया। प्रजा अन्न की कमी के कारण अत्यंत दु:खी हो गई। अन्न के न होने से राज्य में यज्ञादि भी बंद हो गए। एक दिन प्रजा राजा के पास जाकर कहने लगी कि हे राजा! सारी प्रजा त्राहि-त्राहि पुकार रही है। क्योंकि समस्त विश्व की सृष्टि का कारण वर्षा है। Devshayani Ekadashi Vrat Katha

वर्षा के अभाव से अकाल पड़ गया है और अकाल से प्रजा मर रही है। इसलिए हे राजन! कोई ऐसा उपाय बताअओ जिससे प्रजा का कष्ट दूर हो। राजा मांधाता कहने लगे कि आप लोग ठीक कह रहे हैं, वर्षा से ही अन्न उत्पन्न होता है और आप लोग वर्षा न होने से अत्यंत दु:खी हो गए हैं। मैं आप लोगों के दु:खों को समझता हूँ। ऐसा कहकर राजा कुछ सेना साथ लेकर वन की तरफ चल दिया। वह अनेक ऋषियों के आश्रम में भ्रमण करता हुआ अंत में ब्रह्माजी के पुत्र अंगिरा ऋषि के आश्रम में पहुँचा। वहाँ राजा ने घोड़े से उतरकर अंगिरा ऋषि को प्रणाम किया। 

मुनि ने राजा को आशीर्वाद देकर कुशलक्षेम के पश्चात उनसे आश्रम में आने का कारण पूछा। राजना ने हाथ जोड़कर विनीत भाव से कहा कि हे भगवन! सब प्रकार से धर्म पालन करने पर भी मेरे राज्य में अकाल पड़ गया है। इससे प्रजा अत्यंत दु:खी है। राजा के पापों के प्रभाव से ही प्रजा को कष्ट होता है, ऐसा शास्त्रों में कहा है। जब मैं धर्मानुसार राज्य करता हूँ तो मेरे राज्य में अकाल कैसे पड़ गया? इसके कारण का पता मुझको अभी तक नहीं चल सका। Devshayani Ekadashi Vrat Katha

अब मैं आपके पास इसी संदेह को निवृत्त कराने के लिए आया हूँ। कृपा करके मेरे इस संदेह को दूर कीजिए। साथ ही प्रजा के कष्ट को दूर करने का कोई उपाय बताइए। इतनी बात सुनकर ऋषि कहने लगे कि हे राजन! यह सतयुग सब युगों में उत्तम है। इसमें धर्म को चारों चरण सम्मिलित हैं अर्थात इस युग में धर्म की सबसे अधिक उन्नति है। लोग ब्रह्म की उपासना करते हैं और केवल ब्राह्मणों को ही वेद पढ़ने का अधिकार है। ब्राह्मण ही तपस्या करने का अधिकार रख सकते हैं, परंतु आपके राज्य में एक शूद्र तपस्या कर रहा है। इसी दोष के कारण आपके राज्य में वर्षा नहीं हो रही है। 

इसलिए यदि आप प्रजा का भला चाहते हो तो उस शूद्र का वध कर दो। इस पर राजा कहने लगा कि महाराज मैं उस निरपराध तपस्या करने वाले शूद्र को किस तरह मार सकता हूँ। आप इस दोष से छूटने का कोई दूसरा उपाय बताइए। तब ऋषि कहने लगे कि हे राजन! यदि तुम अन्य उपाय जानना चाहते हो तो सुनो। Devshayani Ekadashi Vrat Katha

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पद्मा नाम की एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करो। व्रत के प्रभाव से तुम्हारे राज्य में वर्षा होगी और प्रजा सुख प्राप्त करेगी क्योंकि इस एकादशी का व्रत सब सिद्धियों को देने वाला है और समस्त उपद्रवों को नाश करने वाला है। इस एकादशी का व्रत तुम प्रजा, सेवक तथा मंत्रियों सहित करो। 

मुनि के इस वचन को सुनकर राजा अपने नगर को वापस आया और उसने विधिपूर्वक पद्मा एकादशी का व्रत किया। उस व्रत के प्रभाव से वर्षा हुई और प्रजा को सुख पहुँचा। अत: इस मास की एकादशी का व्रत सब मनुष्यों को करना चाहिए। यह व्रत इस लोक में भोग और परलोक में मुक्ति को देने वाला है। इस कथा को पढ़ने और सुनने से मनुष्य के समस्त पाप नाश को प्राप्त हो जाते हैं। Devshayani Ekadashi Vrat Katha

संपर्क करें- पंडित ललित त्रिवेदी (+91-9667189678)

किसी भी प्रकार के ज्योतिष एवं वास्तु संबंधी परामर्श के लिए वास्तु ज्योतिष पंडित ललित त्रिवेदी से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, जैसे कि धन, स्वास्थ्य, व्यापार, करियर, नौकरी आदि जैसी समस्याएं। वास्तु विजिट भी करवा सकते हैं, तथा वास्तु परामर्श भी प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी प्रकार के कुंडली मिलान, विवाह मुहूर्त, गृह प्रवेश या अन्य सभी प्रकार के मुहूर्त एवं शुभ समय निकलवाने के लिए तुरंत संपर्क करें।

कथा का फल: इस व्रत के प्रभाव और भगवान विष्णु की कृपा से, राज्य में घनघोर वर्षा हुई। चारों ओर हरियाली छा गई, अन्न के भंडार फिर से भर गए और प्रजा पहले की तरह सुखी व समृद्ध हो गई। इसलिए जो भी मनुष्य इस देवशयनी एकादशी का व्रत करता है, उसके जीवन से दरिद्रता और दुखों का हमेशा के लिए अंत हो जाता है।

(कथा समाप्त होने के बाद ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें और भगवान विष्णु की आरती उतारें।)

🌟 चातुर्मास में धन वृद्धि और दोष निवारण का अचूक ज्योतिषीय रहस्य

शक्ति विहार, कोटपूतली (राजस्थान) के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी स्पष्ट करते हैं कि जब भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में जाते हैं, तो ब्रह्मांड का संचालन भगवान शिव के हाथों में आ जाता है। इस अवधि (चातुर्मास) में नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय हो जाती हैं। यदि जन्म कुंडली में बृहस्पति (गुरु) कमज़ोर हो, तो व्यक्ति को इन चार महीनों में व्यापार में भारी घाटा और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां घेर लेती हैं।

चातुर्मास के दौरान कुंडली के दरिद्र योग को शून्य करने, दसों दिशाओं से अपनी रक्षा करने और साक्षात भगवान विष्णु (दशावतार) की कृपा प्राप्त करने के लिए ’10 मुखी रुद्राक्ष’ (10 Mukhi Rudraksha) गले में धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। देवशयनी एकादशी के पावन दिन इसे धारण करने से व्यक्ति के चारों ओर एक ऐसा अभेद्य आध्यात्मिक घेरा बन जाता है, जिससे चार महीने तक कोई भी बाधा या दुर्भाग्य उसे छू भी नहीं सकता।

जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?

सलाह: कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।

⚠️ देवशयनी एकादशी और चातुर्मास के 3 कड़े नियम

  1. चावल और तामसिक भोजन का त्याग: एकादशी के दिन घर में भूलकर भी चावल (Rice) नहीं पकाना चाहिए। इसके अलावा, पूरे चातुर्मास (चार महीने) के दौरान प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है।
  2. मांगलिक कार्यों पर रोक: देवशयनी एकादशी से लेकर देवउठनी एकादशी तक विवाह, सगाई, मुंडन, और गृह प्रवेश (नया मकान में शिफ्ट होना) जैसे कार्य नहीं किए जाते हैं।
  3. तुलसी पूजा का महत्व: इन चार महीनों में भगवान विष्णु शयन में होते हैं, इसलिए उनकी प्रिय ‘तुलसी’ की पूजा का महत्व बढ़ जाता है। रोज़ाना शाम को तुलसी के पौधे के नीचे शुद्ध घी का दीपक अवश्य जलाएं, इससे घर में माता लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।

इसे भी पढ़ें एकादशी व्रत पूजा विधि 2026: संपूर्ण पूजन विधि और सामग्री सूची

एकादशी व्रत उद्यापन की संपूर्ण विधि, सामग्री और नियम

श्री एकादशी माता की आरती: पढ़ें संपूर्ण आरती और लाभ

एकादशी के 5 अचूक उपाय, चमकाएंगे आपका भाग्य

राशि अनुसार एकादशी के अचूक उपाय: जानें मेष से मीन तक सभी राशियों के लिए

Devshayani Ekadashi Vrat Katha in Hindi PDF❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को क्या भोग लगाना चाहिए?

Ans: इस दिन भगवान विष्णु को पीले रंग की मिठाइयां, केले, पंचामृत और पंजीरी का भोग लगाना चाहिए। ध्यान रहे, श्रीहरि के किसी भी भोग में ‘तुलसी दल’ (Tulsi leaves) अवश्य शामिल करें, अन्यथा वे भोग स्वीकार नहीं करते।

Q2: क्या चातुर्मास में नया वाहन या प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं?

Ans: चातुर्मास में नया वाहन, प्रॉपर्टी खरीदना या कोई नया व्यापार (Business) शुरू करना वर्जित नहीं है। केवल वे कार्य वर्जित हैं जिनमें बड़े वैदिक अनुष्ठान (जैसे विवाह, मुंडन) होते हैं।

Q3: देवशयनी एकादशी का व्रत कैसे खोला जाता है?

Ans: एकादशी के व्रत का पारण अगले दिन (द्वादशी तिथि को) सूर्योदय के बाद किया जाता है। पारण में सबसे पहले भगवान को चढ़ाया हुआ जल ग्रहण करें और किसी योग्य ब्राह्मण को अन्न-जल का दान दें।

निष्कर्ष: देवशयनी एकादशी केवल एक उपवास नहीं, बल्कि जीवन की सभी नकारात्मकताओं को समाप्त कर भगवान श्रीहरि के चरणों में पूर्ण समर्पण का दिन है। Freeupay.in पर बताई गई राजा मांधाता की इस प्रामाणिक कथा को एकादशी के दिन पूर्ण श्रद्धा से पढ़ें या सुनें। भगवान विष्णु की कृपा से आपके घर में कभी अन्न, धन और सुख-शांति की कमी नहीं होगी।

वैदिक उपाय और 30 साल फलादेश के साथ जन्म कुंडली बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े

10 वर्ष के उपाय के साथ अपनी लाल किताब की जन्मपत्री बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Leave a Comment

Call Us Now
WhatsApp
We use cookies in order to give you the best possible experience on our website. By continuing to use this site, you agree to our use of cookies.
Accept