Dhanvantari Ki Aarti: भगवान श्री धन्वंतरि जी की पूजा अर्चना में श्री धन्वंतरि जी की आरती का पाठ किया जाता हैं। धनवंतरी आरती नियमित करने से जातक हमेशा निरोगी रहता है। यह तो आपको पता होगा, की हमारे सनातन धर्म में भगवान धनवंतरी (Lord Dhanvantari) को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता हैं, धनवंतरी भगवन को सभी देवताओं का वैद्य यानिकी ‘आयुर्वेद का जनक’ माना जाता है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, कहा जाता हैं की समुद्र मंथन करते समय कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी (धनतेरस) तिथि के दिन को भगवान धनवंतरी अपने हाथों में अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे।
Dhanvantari Ki Aarti: भगवान धनवंतरी की आरती, रोज़ाना गाने से दूर होंगे भयंकर रोग और बीमारियाँ
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ऐसी मान्यता है कि जिन व्यक्ति के घर में नियमित रूप और विशेषकर धनतेरस के दिन ‘भगवान धनवंतरी की आरती’ (Dhanvantari Ji Ki Aarti) गाई जाती है, उस परिवार में कभी अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता हैं। यह आरती घर के आभामंडल (Aura) को शुद्ध करती है और भयंकर से भयंकर बीमारियों को जड़ से खत्म करने की शक्ति रखती है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें भगवान धनवंतरी की संपूर्ण आरती (Dhanvantari Ki Aarti), पूजा के नियम और आरोग्य प्राप्ति के गुप्त रहस्य।
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🌺 क्विक लिस्ट: धनवंतरी जी की आरती करने के चमत्कारिक लाभ (Dhanvantari Ki Aarti Benefits)
धनवंतरी जी की आरती (Dhanvantari Ki Aarti) की जानकारी पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए रोज़ाना आरोग्य देव की आरती गाने से आपके जीवन में क्या बड़े बदलाव आते हैं:
| आरती का प्रभाव (Effects) | धनवंतरी आरती के अचूक लाभ (Benefits & Timing) |
| बीमारियों और कष्टों से मुक्ति | पुरानी और असाध्य बीमारियां धीरे-धीरे ठीक होने लगती हैं और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। |
| दवाइयों का असर होना | यदि किसी बीमार व्यक्ति पर दवाइयां असर नहीं कर रही हैं, तो इस आरती के प्रभाव से चिकित्सा सफल होने लगती है। |
| अकाल मृत्यु से रक्षा | घर से नकारात्मक शक्तियां और अकाल मृत्यु का भय हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। |
| आरती का सर्वोत्तम समय | रोज़ाना सुबह स्नान के बाद या शाम को संध्या वंदन के समय शुद्ध घी का दीपक जलाकर आरती करें। |
📿 भगवान धनवंतरी की प्रामाणिक आरती (Dhanvantari Aarti Lyrics in Hindi)
पूर्ण पवित्रता के साथ भगवान धनवंतरी के चतुर्भुज रूप का ध्यान करें, हाथ में पीतल या तांबे के दीपक में शुद्ध घी की बत्ती जलाएं और इस पावन आरती (Dhanvantari Ki Aarti) का गान करें:
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जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि जी देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।।
ॐ जय धन्वन्तरि देवा…।।
तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
देवासुर के संकट आकर दूर किए।।
ॐ जय धन्वन्तरि देवा…।।
आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।।
ॐ जय धन्वन्तरि देवा…।।
भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।।
ॐ जय धन्वन्तरि देवा…।।
तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।।
ॐ जय धन्वन्तरि देवा…।।
हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा।।
ॐ जय धन्वन्तरि देवा…।।
धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे।
रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे।।
ॐ जय धन्वन्तरि देवा…।।
(आरती पूर्ण होने के बाद भगवान धनवंतरी को साष्टांग प्रणाम करें और अपने परिवार के अच्छे स्वास्थ्य व लंबी आयु की प्रार्थना करें।)
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🌟 भयंकर रोग मुक्ति और नवग्रह शांति का ज्योतिषीय रहस्य
कोटपूतली-बहरोड़ (राजस्थान) के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी स्पष्ट करते हैं कि जन्म कुंडली में जब ‘सूर्य’ (आरोग्य का कारक) और ‘बृहस्पति’ (जीव कारक) ग्रह राहु या शनि के क्रूर प्रभाव में होते हैं, तो व्यक्ति का शरीर गंभीर बीमारियों का घर बन जाता है। चूंकि भगवान धनवंतरी साक्षात श्रीहरि विष्णु के ही स्वरूप हैं, इसलिए इनकी आराधना से कुंडली के सभी मारक दोष शांत होते हैं।
शारीरिक कमज़ोरी को दूर करने, असाध्य रोगों से रक्षा पाने और भगवान धनवंतरी व विष्णु की साक्षात कृपा प्राप्त करने के लिए साक्षात नारायण का स्वरूप ’10 मुखी रुद्राक्ष’ (10 Mukhi Rudraksha) गले में धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। इसे धारण करके भगवान धनवंतरी की आरती व मंत्रों का जाप करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ती है और मानसिक डिप्रेशन तुरंत समाप्त होता है।
जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?
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⚠️ भगवान धनवंतरी की आरती करते समय रखें इन 3 नियमों का ध्यान (Rules for reciting Dhanvantari Ki Aarti)
- पीले रंग का महत्व: भगवान धनवंतरी भगवान विष्णु के अंशावतार हैं, इसलिए इन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है। आरती के समय पीले वस्त्र धारण करें और इन्हें पीले फूल व पीली मिठाइयों का भोग लगाएं।
- औषधि को अभिमंत्रित करना: यदि घर में कोई गंभीर बीमार है, तो आरती करते समय उसकी दवाइयां भगवान धनवंतरी के चरणों के पास रख दें। आरती के बाद वे दवाइयां ‘अमृत तुल्य’ होकर बीमार व्यक्ति पर बहुत तेजी से असर करती हैं।
- दिशा का चुनाव: भगवान धनवंतरी की पूजा और आरती करते समय अपना मुख हमेशा पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर रखें। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह शरीर में तीव्र होता है।
Dhanvantari Ki Aarti❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: भगवान धनवंतरी का सबसे शक्तिशाली रोग नाशक मंत्र कौन सा है?
Ans: आरोग्य प्राप्ति के लिए भगवान धनवंतरी का महामंत्र “ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये: अमृतकलश हस्ताय सर्वभयविनाशाय सर्वरोगनिवारणाय त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप श्री धन्वंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥” का जाप करना अत्यंत चमत्कारी माना जाता है।
Q2: धनवंतरी जयंती कब मनाई जाती है?
Ans: हर साल दीपावली से दो दिन पहले कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस के दिन धनवंतरी जयंती मनाई जाती है। इसी दिन राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस भी मनाया जाता है।
Q3: क्या रोज़ाना धनवंतरी आरती की जा सकती है?
Ans: जी हाँ! यदि घर में कोई व्यक्ति लंबे समय से बीमार है या आप सदा निरोगी रहना चाहते हैं, तो नित्य सुबह की पूजा में इस आरती को अवश्य शामिल करें।
निष्कर्ष: पहला सुख निरोगी काया माना गया है। यदि स्वास्थ्य अच्छा है, तो जीवन का हर सुख आनंददायक लगता है। Freeupay.in पर दिए गए इन नियमों के साथ आज ही से भगवान धनवंतरी की आरती (Dhanvantari Ki Aarti) का गान शुरू करें। भगवान नारायण की कृपा से आपके घर से बीमारियां हमेशा के लिए दूर रहेंगी।
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