WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Ganga Ashtakam Lyrics in Sanskrit & Hindi 2026: गंगा अष्टकम (PDF) का अचूक पाठ, इन श्लोकों में छिपा है दरिद्रता और पाप नाशक रहस्य

Ganga Ashtakam in Hindi: नीचे बताये जा रहे भिन्न भिन्न श्री गंगा अष्टकम के रचियता भी अलग अलग हैं। हमारे हिन्दू धर्म में गंगा नदी को माँ का दर्जा दिया गया हैं। ऋग्वेद वेद में गंगा नदी का वर्णित किया हुआ हैं। गंगा नदी में स्नान करने से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं। श्री गंगा अष्टकम में गंगा नदी के बारे में बताया गया है। जो भी व्यक्ति गंगाष्टकम् का नियमित रूप से पाठ करता है उसके सारे पाप नष्ट हो जाते है और गंगा माँ की विशेष कृपा बनी रहती हैं। उसकी बुद्दि भी निर्मल हो जाती हैं और जीवन समाप्त होने के बाद मोक्ष को प्राप्त होता हैं। श्री गंगा अष्टकम आदि के बारे में बताने जा रहे हैं।

Ganga Ashtakam: श्री गंगा अष्टकम का अचूक पाठ, इन श्लोकों में छिपा है दरिद्रता और पाप नाशक रहस्य

हमारी वेबसाइट FreeUpay.in (फ्री उपाय.इन) में रोजाना आने वाले व्रत त्यौहार की जानकारी के अलावा मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, साधना, व्रत कथा, ज्योतिष उपाय, लाल किताब उपाय, स्तोत्र आदि महत्वपूर्ण जानकारी उबलब्ध करवाई जाएगी सभी जानकारी का अपडेट पाने के लिए दिए गये हमारे WhatsApp Group Link (व्हात्सप्प ग्रुप लिंक) क्लिक करके Join (ज्वाइन) कर सकते हैं।

हर समस्या का फ्री उपाय (Free Upay) जानने के लिए हमारे WhatsApp Channel (व्हात्सप्प चैनल) से जुड़ें: यहां क्लिक करें (Click Here)

Ganga Ashtakam
Ganga Ashtakam

सनातन धर्म में गंगा नदी को माता के समान पूजनीय बताया गया हैं, इसे साक्षात मोक्ष प्रदायिनी और जगत जननी माना जाता है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति रोज़ाना नियम रूप से या फिर विशेष पर्वों (जैसे गंगा दशहरा, गंगा सप्तमी या पूर्णिमा) पर गंगा स्नान नहीं कर पाते हैं, उन सबको गंगा स्नान समान फल पाने के लिए अपने घर पर ही पूर्ण श्रद्धा के साथ में ‘श्री गंगा अष्टकम’ (Ganga Ashtakam)का पाठ कर केना चाहिए, इससे उन्हें उसे साक्षात गंगा में डुबकी लगाने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।

ऑनलाइन सलाह (Online): कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन (Call Button) पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।

महत्वपूर्ण जानकारी: एक सिद्ध किया हुआ असली रूद्राक्ष आपकी दशा और दिशा दोनों बदल सकता हैं? अभी यहां से खरीदें

ऑफलाइन सलाह (Offline): कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए हमसे मिलने के लिए यहाँ तुरंत सम्पर्क करें: क्लिक हियर (Click Here)

यह अष्टकम (Ganga Ashtakam) इतना शक्तिशाली है कि इसके नियमित पाठ से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप तुरंत भस्म हो जाते हैं। यह घर से भयंकर दरिद्रता, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक अवसाद को जड़ से उखाड़ फेंकता है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें संपूर्ण गंगा अष्टकम (Ganga Ashtakam), इसे जपने के नियम और इसके अचूक लाभ।

🌺 क्विक लिस्ट: गंगा अष्टकम पाठ के चमत्कारिक लाभ (Ganga Ashtakam Benefits)

श्री गंगा अष्टकम (Ganga Ashtakam) की जानकारी पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए रोज़ाना इन श्लोकों को पढ़ने से आपके जीवन में क्या बड़े बदलाव आते हैं:

पाठ का प्रभाव (Effects)श्री गंगा अष्टकम पढ़ने के अचूक लाभ (Benefits)
पापों और दोषों का नाशइसके पाठ से जाने-अनजाने में हुए भयंकर पाप, पितृ दोष और नवग्रह दोष तुरंत कट जाते हैं।
मानसिक शांति की प्राप्तिभयंकर तनाव (Depression), अज्ञात भय और डिप्रेशन को दूर कर मन को अपार शांति देता है।
अपार धन और सुख-समृद्धिघर का वास्तु दोष दूर होता है, जल तत्व संतुलित होता है और व्यापार में अटका पैसा वापस आता है।
पाठ का सर्वोत्तम समयरोज़ सुबह स्नान के बाद या शाम के समय (गोधूलि बेला में) इसका पाठ करना सर्वश्रेष्ठ है।

📿 श्री गंगा अष्टकम पाठ (Shri Ganga Ashtakam Lyrics)

पूर्ण पवित्रता और श्रद्धा के साथ माता गंगा का ध्यान करें और आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा रचित इन श्री गंगा अष्टकम (Ganga Ashtakam) का पाठ करें:

भगवति तव तीरे नीरमात्राशनॊऽहं विगतविषयतृष्णः कृष्णमाराधयामि।

सकलकलुषभङ्गे स्वर्गसोपानसङ्गे तरलतरतरङ्गे देवि गङ्गे प्रसीद॥१॥

भगवति भवलीलामौलिमाले तवांभः कणमणुपरिमाणं प्राणिनो ये स्पृशन्ति ।

अमरनगरनारीचामरग्राहिणीनां विगतकलिकलंकातंकमंके लुठन्ति  ॥२॥

ब्रह्माण्डं खण्डयन्ती हरशिरसि जटावल्लिमुल्लासयन्ती स्वर्लोकादापतन्ती कनकगिरिगुहागण्डशैलात्स्खलन्ती।

क्षोणीपृष्ठे लुठन्ती दुरितचयचमू निर्भरं भर्त्सयन्ती पाथोधिं पूरयन्ती सुरनगरसरित्पावनी नः पुनातु ॥३॥

मज्जन्मातंगकुंभच्युतमदमदिरामोदमत्तालिजालं स्नानैः सिद्धांगनानां कुचयुगविगलत्कुङ्कुमासंगपिङ्गम् ।

सायं प्रातर्मुनीनां कुशकुसुमचयैश्छन्नतीरस्थनीरं पायान्नो गांगमंभः करिकरमकराक्रान्तरंहस्तरंगम् ॥४॥

आदावादिपितामह्स्य नियमव्यापारपात्रे जलं पश्चात् पन्नगशायिनो भगवतः पादोदकं पावनम्।

भूयः शंभुजटाविभूषणमणिर्जह्नोर्महर्षेरियं कन्या कल्मषनाशिनी भगवती भागीरथी पातु माम् ॥५॥

शैलेन्द्रादवतारिणी निजजले मज्जज्जनोत्तारिणी पारावारविहारिणी भवभयश्रेणीसमुत्सारिणी  ।

शेषांगैरनुकारिणी हरशिरोवल्लीदलाकारिणी काशीप्रान्तविहारिणी विजयते गंगा मनोहारिणी ॥६॥

कुतो वीची वीचीस्तव यदि गता लोचनपथं त्वमापीता पीतांबरपुरनिवासं वितरसि।

त्वदुत्संगे पतति यदि कायस्तनुभृतां तदा मातः शान्तक्रतवपदलाभोऽप्यति लघुः ॥७॥

भगवति तव तीरे नीरमात्राशनोऽहं विगतविषयतृष्णः कृष्णमाराधयामि ।

सकलकलुषभंगे स्वर्गसोपानसंगे तरलतरतरंगे देवि गंगे प्रसीद ॥८॥

मातर्जाह्नवि शंभुसंगमिलिते मौलौ निधायाञ्जलिं त्वत्तीरे वपुषोऽवसानसमये नारायणांघ्रिद्वयम् ।

सानन्दं स्मरतो भविष्यति मम प्राणप्रयाणोत्सवे भूयाद्भक्तिरविच्युता हरिहराद्वैतात्मिका शाश्वती ॥९॥

गंगाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् प्रयतो नरः सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोकं स गच्छति ॥१०॥

सलाह: कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।

महत्वपूर्ण जानकारी: आपकी समस्या के अनुसार सिद्ध किये गये असली रूद्राक्ष यहां से खरीदें

📿 श्री गंगा अष्टकम पाठ (Shri Ganga Ashtakam Lyrics)

पूर्ण पवित्रता और श्रद्धा के साथ माता गंगा का ध्यान करें और रचियता महाकवि कालिदास द्वारा रचित इन श्री गंगा अष्टकम (Ganga Ashtakam) का पाठ करें:

कत्यक्षीणि करोटयः कति कति द्वीपिद्विपानां त्वचः,

काकोलः कति पन्नगाः कति सुधाधाम्नश्च खण्डाः कति  ।

किञ्च त्वं च कति त्रिलोकजननि त्वद्वारिपूरोदरे,

मज्जज्जन्तुकदंबकं समुदयत्येकैकमादाय यत् ॥१॥

देवि त्वत्पुलिनाङ्गणेस्थितिजुषां निर्मानिनां ज्ञानिनां,

स्वल्पाहारनिबद्धशुद्धवपुषां  तार्णं गृहं श्रेयसे ।

नान्यत्र क्षितिमण्डलेश्वरशतैः संरक्षितो  भूपतेः,

प्रासादो ललनागणैरधिगतो भोगीन्द्रभोगोन्नतः ॥२॥

तत्तत्तीर्थगतैः कदर्थनशतैः किंतैरनर्थाश्रितैः,

ज्योतिष्टोममुखैः किमीशविमुखैः यज्ञैरवज्ञादृतैः।

सूते केशववासवादिविबुधागाराभिरामां श्रियं,

गङ्गे देवि! भवत्तटॆ यदि कुटीवास प्रयासं विना ॥३॥

गङ्गातीरमुपेत्य शीतलशिलामालंब्य हेमाचलीं,

यैराकर्णि कुतूहलाकुलतया कल्लोलकोलाहलः।

ते शृण्वन्ति सुपर्वपर्वतशिलासिंहासनाध्यासनाः,

संगीतागमशुद्धसिद्धरमणीमञ्जीरधीरध्वनिम् ॥४॥

दूरंगच्छ सकच्छगं च भवतो नालोकयामो मुखं,

रे पाराक वराक साकमितरैर्नाकप्रदैर्गम्यताम् ।

सद्यःप्रोद्यदमन्दमारुतरजः प्राप्तं कपोलस्थले,

गंगांभः कणिकाविमुक्तिगणिकासंगाय संभाव्यते ॥५॥

विष्णोः संगतिकारीणी हरजटाजूटाटवीचारिणी,

प्रायश्चित्तनिवारणी जलकणैः पुण्यौघविस्तारिणी।

भूभृत्कन्दरदारिणी निजजले मज्जज्जनोत्तारिणी,

श्रेयः स्वर्गविहारिणी विजयते गङ्गा मनोहारिणी ॥६॥

वाचालं विकलं खलं श्रितमलं कामाकुलं व्याकुलं,

चण्डालं तरलं निपीतगरलं दोषाविलञ्चाविलं ।

कुंभीपाकगतं तमन्तककरादाकृष्य कस्तारये-

न्मातर्ज्जह्नुनरेन्द्रनन्दिनि तव स्वल्पोदबिन्दुं विना ॥७॥

श्लेष्मश्लेष्मचयानिले मृतबिले शंकाकुले व्याकुले,

कण्ठे घर्घरघोषनादमलिने काये च संमीलति।

यां ध्यायन्नपि भारभंगुरतरां प्राप्नोति मुक्तिं नरः,

सा नश्चेतसि जान्हवी निवसतां संसारसन्तापहृत् ॥८॥

संपर्क करें- पंडित ललित त्रिवेदी (+91-9667189678)

किसी भी प्रकार के ज्योतिष एवं वास्तु संबंधी परामर्श के लिए वास्तु ज्योतिष पंडित ललित त्रिवेदी से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, जैसे कि धन, स्वास्थ्य, व्यापार, करियर, नौकरी आदि जैसी समस्याएं। वास्तु विजिट भी करवा सकते हैं, तथा वास्तु परामर्श भी प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी प्रकार के कुंडली मिलान, विवाह मुहूर्त, गृह प्रवेश या अन्य सभी प्रकार के मुहूर्त एवं शुभ समय निकलवाने के लिए तुरंत संपर्क करें।

📿 श्री गंगा अष्टकम पाठ (Shri Ganga Ashtakam Lyrics)

पूर्ण पवित्रता और श्रद्धा के साथ माता गंगा का ध्यान करें और महर्षि वाल्मीकी द्वारा रचित इन श्री गंगा अष्टकम (Ganga Ashtakam) का पाठ करें:

मातः शैलसुतासपत्नि वसुधाशृङ्गारहारावलि स्वर्गारोहणवैजयन्ति भवतीं भागीरथि प्रार्थये ।

त्वत्तीरे वसतः त्वदंबु पिबतस्त्वद्वीचिषु प्रेङ्खत-स्त्वन्नाम स्मरतस्त्वदर्पितदृशः स्यान्मे शरीरव्ययः॥१॥

त्वत्तीरे तरुकॊटरान्तरगतो गङ्गे विहङ्गो वरं त्वन्नीरे नरकान्तकारिणि वरं मत्स्योऽथवा कच्छपः।

नैवान्यत्र मदान्धसिन्धुरघटासङ्घट्टघण्टारण-त्कारत्रस्तसमस्तवैरिवनितालब्धस्तुतिर्भूपतिः ॥२॥

उक्षा पक्षी तुरग उरगः कोऽपि वा वारणो वा वारीणः स्यां जननमरणक्लेशदुःखासहिष्णु: ।

न त्वन्यत्र प्रविरलरणत्कङ्कणक्वाणमिश्रं वारस्त्रीभिश्चमरमरुता वीजितो भूमिपालः ॥३॥

काकैर्निष्कुषितं श्वभिः कवलितं गोमायुभिर्लुण्ठितं स्रोतोभिश्चलितं तटांबुलुलितं  वीचीभिरान्दोलितम्।

दिव्यस्त्रीकरचारुचामरमरुत्संवीज्यमानः कदा द्रक्ष्येऽहं परमेश्वरि त्रिपथगे भागीरथि स्वं वपुः ॥४॥

अभिनवबिसवल्ली पादपद्मस्य विष्णो-र्मदनमथन्मौलेर्मालतीपुष्पमाला ।

जयति जयपताका काप्यसौ मोक्षलक्ष्म्याः क्षपितकलिकलङ्का जाह्नवी नः पुनातु ॥५॥

एतत्तालतमालसालसरलव्यालोलवल्लीलता-च्छन्नं सूर्यकरप्रतापरहितं शंखेन्दुकुन्दोज्ज्वलम्।

गन्धर्वामरसिद्धकिन्नरवधूत्तुङ्गस्तनास्फालितं स्नानाय प्रतिवासरं भवतु मे गाङ्गं जलं निर्मलम्॥६॥

गाङ्गं वारि मनोहारि मुरारिचरणच्युतम्। 

त्रिपुरारिशिरश्चारी पापहारि पुनातु माम् ॥७॥

पापहारि दुरितारि तरङ्गधारी शैलप्रचारि गिरिराजगुहाविदारि।

झङ्कारकारि हरिपादरजोऽपहारि गाङ्गं पुनातु सततं शुभकारि वारि ॥८॥

गङ्गाष्टकम् पठति यः प्रयतः प्रभाते वाल्मीकिना विरचितं शुभदं मनुष्यः।

प्रक्षाल्य गात्रकलिकल्मषपङ्कमाशु मोक्षं लभेत्पतति नैव नरो भवाब्धौ ॥९॥

📿 श्री गंगा अष्टकम पाठ (Shri Ganga Ashtakam Lyrics)

पूर्ण पवित्रता और श्रद्धा के साथ माता गंगा का ध्यान करें और रचियता महाकवि कालिदास द्वारा रचित इन श्री गंगा अष्टकम (Ganga Ashtakam) का पाठ करें:

नमस्तेऽस्तु गङ्गे त्वदंगप्रसंगा-द्भुजंगास्तुरंगाः कुरंगाः प्लवंगाः ।

अनंगारिरंगाः ससंगाः शिवांगा भुजंगाधिपांगीकृतांगा भवन्ति ॥१॥

नमो जह्नुकन्ये न मन्ये त्वदन्यै-र्निसर्गेन्दुचिह्नादिभिर्लोकभर्तुः।

अतोऽहं नतोऽहं सदा गौरतोये वसिष्ठादिभिर्गीयमानाभिधेये ॥२॥

त्वदामज्जनात् सज्जनो दुर्ज्जनो वा विमानैस्समानः समानैर्हिमानैः ।

समायाति तस्मिन् पुरारातिलोके पुरद्वारसंरुद्धदिक्पाललोके ।३॥

स्वरावासदंभोलिदंभोपि रंभा-परीरंभसंभावनाधीरचेताः।

समाकाङ्क्षते त्वत्तटे वृक्षवाटी-कुटीरे वसन्नेतुमायुर्द्दिनानि ॥४॥

त्रिलोकस्य भर्तुर्ज्जटाजूटबन्धात् स्वसीमन्तभागे मनाक् प्रस्खलन्तः।

भवान्या रुषा प्रौढसापत्निभावात् करेणाहतास्त्वत्तरङ्गा जयन्ति ॥५॥

जलोन्मज्जदैरावतोद्दामकुंभ-स्फुरत्प्रस्खलत्सान्द्रसिन्दूररागे।

क्वचित् पद्मिनीरेणुभंगप्रसंगे मनः खेलतां जह्नुकन्यातरङ्गे ॥६॥

भवत्तीरवानीरवातोत्थधूली-लवस्पर्शतस्तत्क्षणात्क्षीणपापः।

जनोऽयं जगत्पावने त्वत्प्रसादात् पदे पौरुहूतेऽपि धत्तेऽवहेलाम् ॥७॥

त्रिसन्ध्यानमल्लेखकोटीरनाना-विधानेकरत्नांशुबिंबप्रभाभिः।

स्फुरत्पादपीठे हठेनाष्टमूर्ते- र्जटाजूटवासे नताः स्मो पदं ते ॥८॥

इदं यः पठेदष्टकं जह्नुपुत्र्या-स्त्रिकालं कृतं कालिदासेन रम्यम्।

समायास्यतीन्द्रादिभिर्गीयमानं पदं शैशवं शैशवं नो लभेत् सः ॥९॥

(पाठ पूर्ण होने के बाद माता गंगा की आरती करें और तांबे के पात्र में रखे जल को पूरे घर में छिड़क दें।)

जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?

सलाह: कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।

🌟 आर्थिक तंगी और मानसिक अवसाद दूर करने का ज्योतिषीय रहस्य

राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ स्थित प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि जल तत्व का सीधा संबंध व्यक्ति की जन्म कुंडली के ‘चंद्रमा’ (Moon) ग्रह से होता है। जब चंद्रमा राहु या शनि से पीड़ित होता है, तो व्यक्ति को भयंकर मानसिक तनाव, डर और धन की भारी कमी का सामना करना पड़ता है।

चंद्रमा के मारक दोषों को 100% शून्य करने, मानसिक शांति पाने और दसों दिशाओं से धन आकर्षित करने के लिए साक्षात भगवान विष्णु का स्वरूप ’10 मुखी रुद्राक्ष’ (10 Mukhi Rudraksha) धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। इसे गले में धारण करके रोज़ाना ‘गंगा अष्टकम’ का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन की हर बाधा और 10 प्रकार के पाप तुरंत शून्य हो जाते हैं।

⚠️ गंगा अष्टकम पाठ के 3 कड़े नियम (Rules for reciting Ganga Ashtakam)

  1. स्वच्छता और आसन: इस अष्टकम का पाठ हमेशा कुशा या ऊनी आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके ही करें। बिना स्नान किए इसका पाठ कभी न करें।
  2. जल का पात्र: पाठ करते समय अपने सामने एक तांबे के लोटे में थोड़ा सा गंगाजल और सादा जल मिलाकर अवश्य रखें। पाठ के बाद इस जल को प्रसाद के रूप में परिवार के सभी सदस्यों को दें।
  3. तामसिक भोजन का त्याग: जिस घर में गंगा अष्टकम का नियमित पाठ होता है, वहां पूर्ण सात्विकता होनी चाहिए। घर में मांस-मदिरा या तामसिक भोजन से बचना चाहिए।

Ganga Ashtakam Lyrics in Sanskrit & Hindi 2026❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: क्या गंगा अष्टकम का पाठ शाम के समय किया जा सकता है?

Ans: जी हाँ, आप गोधूलि बेला (सूर्यास्त के समय) भी माता गंगा के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाकर इस अष्टकम का पाठ कर सकते हैं।

Q2: इस अष्टकम का पाठ दिन में कितनी बार करना चाहिए?

Ans: अपनी मनोकामना की शीघ्र पूर्ति और मानसिक शांति के लिए गंगा अष्टकम का पाठ रोज़ाना कम से कम 1 बार या 3 बार करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

Q3: बिना गंगाजल के गंगा स्नान का पुण्य कैसे पाएं?

Ans: नहाने के पानी में अपनी तर्जनी उंगली से जल में एक त्रिभुज बनाएं और “गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति” मंत्र का जाप करते हुए इस अष्टकम के 8 श्लोकों का स्मरण करें। इससे घर पर ही पूर्ण फल प्राप्त होता है।

निष्कर्ष: श्री गंगा अष्टकम (Ganga Ashtakam) वह अचूक और दिव्य मार्ग है जो आपके जीवन की हर बाधा को नष्ट कर सकता है। Freeupay.in पर दिए गए नियमों के साथ आज ही से अपनी दैनिक पूजा में इसका पाठ शुरू करें। माता गंगा की कृपा से आपके घर में कभी भी धन, सुख और शांति की कमी नहीं रहेगी।

वैदिक उपाय और 30 साल फलादेश के साथ जन्म कुंडली बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े

10 वर्ष के उपाय के साथ अपनी लाल किताब की जन्मपत्री बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Leave a Comment

Call Us Now
WhatsApp
We use cookies in order to give you the best possible experience on our website. By continuing to use this site, you agree to our use of cookies.
Accept