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Anandatirtha Kritam Ganga Ashtakam Lyrics in Sanskrit & Hindi 2026: आनंदतीर्थ कृत गंगा अष्टकम (PDF) का अचूक पाठ, रातों-रात दूर होगी भयंकर दरिद्रता

Anandatirtha Kritam Ganga Ashtakam: आनंदतीर्थ कृतं गंगा अष्टकम इस गंगाष्टकम् के रचियता महाकवि कालिदास जी ने की हैं। हमारे हिन्दू धर्म में गंगा नदी को माँ का दर्जा दिया गया हैं। ऋग्वेद वेद में गंगा नदी का वर्णित किया हुआ हैं। गंगा नदी में स्नान करने से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं। आनंदतीर्थ कृतं गंगा अष्टकम में गंगा नदी के बारे में बताया गया है।

Anandatirtha Kritam Ganga Ashtakam: आनंदतीर्थ कृत गंगा अष्टकम का अचूक पाठ, जो जड़ से मिटा देता है भयंकर दरिद्रता और पाप

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Anandatirtha Kritam Ganga Ashtakam
Anandatirtha Kritam Ganga Ashtakam

जो भी व्यक्ति आनंदतीर्थ कृत गंगा अष्टकम का नियमित रूप से पाठ करता है उसके सारे पाप नष्ट हो जाते है और गंगा माँ की विशेष कृपा बनी रहती हैं। उसकी बुद्दि भी निर्मल हो जाती हैं और जीवन समाप्त होने के बाद मोक्ष को प्राप्त होता हैं। आनंदतीर्थ कृतं गंगा अष्टकम आदि के बारे में बताने जा रहे हैं।

ऑनलाइन सलाह (Online): कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन (Call Button) पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।

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सनातन धर्म में माता गंगा को पापनाशिनी, मोक्षदायिनी और जगत जननी माना गया है। श्री माधवाचार्य जी (जिन्हें ‘आनंदतीर्थ’ के नाम से भी जाना जाता है) द्वारा रचित ‘आनंदतीर्थ कृतम गंगा अष्टकम’ (Anandatirtha Kritam Ganga Ashtakam) माता गंगा को प्रसन्न करने का एक अत्यंत शक्तिशाली और सिद्ध स्तोत्र है।

शास्त्रों में वर्णित है कि जो व्यक्ति कलियुग में अज्ञानता या भूलवश भयंकर पाप कर बैठता है, और जिसके जीवन में केवल दरिद्रता, रोग व संकट ही बचे हों, उसके लिए यह अष्टकम किसी ‘ब्रह्मास्त्र’ से कम नहीं है। इस स्तोत्र के श्रवण और पठन मात्र से यमराज का भय खत्म हो जाता है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें माधवाचार्य जी द्वारा रचित संपूर्ण गंगा अष्टकम, इसे जपने के नियम और इसके अचूक लाभ।

🌺 क्विक लिस्ट: आनंदतीर्थ कृतम गंगा अष्टकम पाठ के चमत्कारिक लाभ (Anandatirtha Kritam Ganga Ashtakam Benefits)

आनंदतीर्थ कृतम गंगा अष्टकम (Anandatirtha Kritam Ganga Ashtakam) की जानकारी पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए रोज़ाना इस सिद्ध स्तोत्र को पढ़ने से आपके जीवन में क्या बड़े बदलाव आते हैं:

पाठ का प्रभाव (Effects)आनंदतीर्थ कृत गंगा अष्टकम पढ़ने के अचूक लाभ (Benefits)
पापों का समूल नाशइसके पाठ से जाने-अनजाने में हुए भयंकर पाप और पितृ दोष तुरंत कट जाते हैं।
अकाल मृत्यु से रक्षायमराज का भय और भयंकर असाध्य बीमारियां इस पाठ के प्रभाव से दूर हो जाती हैं।
अपार धन और सुख-समृद्धिघर का वास्तु दोष दूर होता है, व्यापार में अटका पैसा वापस आता है और कर्ज से मुक्ति मिलती है।
पाठ का सर्वोत्तम समयरोज़ सुबह स्नान के बाद या गंगा दशहरा, पूर्णिमा और एकादशी के दिन इसका पाठ करना सर्वश्रेष्ठ है।

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📿 श्री आनंदतीर्थ कृतम गंगा अष्टकम पाठ (Anandatirtha Kritam Ganga Ashtakam Lyrics)

पूर्ण पवित्रता और श्रद्धा के साथ माता गंगा का ध्यान करें और श्री माधवाचार्य (आनंदतीर्थ) जी द्वारा रचित इस कल्याणकारी स्तोत्र (Anandatirtha Kritam Ganga Ashtakam) का पाठ करें:

यदवधि तवतीरं पातकी नैति गंगे तदवधि मलजालैर्नैवमुक्तः कलौ स्यात्।

तव जलकणिकाऽलं पापिनां पापशुद्ध्यै पतितपरमदीनांस्त्वंहि पासि प्रपन्नान् ॥१॥

तव शिवजललेशं वायुनीतं समेत्य सपदि निरयजालं शून्यतामेतिगङ्गे।

शमलगिरिसमूहाः प्रस्फुटन्ति प्रचण्डा-स्त्वयि सखि विशतां नः पापशंका कुतः स्यात् ॥२॥

तव शिवजलजालं निःसृतं यर्हि गङ्गे सकलभुवनजालं पूतपूतं तदाभूत्।

यमभटकलिवार्ता देवि लुप्ता यमोपि व्यतिकृत वरदेहाः पूर्णकामाः सकामाः॥३॥

मधुमधुवनपूगै रत्नपूगैर्निपूगै-र्मधुमधुवनपूगैर्देवपूगैः सपूगैः

पुरहरपरमांगे भासि मायेव गंगे शमयसि विषतापं देवदेवस्य वन्द्ये ॥४॥

चलितशशिकलाभैरुत्तरंगैस्तरंगै-रमितनदनदीनामंगसंगैरसंगैः।

विहरसि जगदण्डे खण्डयन्ती गिरीन्द्रान् रमयसि निजकान्तं सागरं कान्तकान्ते ॥५॥

तव वरमहिमानं चित्तवाचाममानं हरिहरविधिशक्रा नापि गंगे विदन्ति।

श्रुतिकुलमभिधत्ते शङ्कितं ते गुणान्तं गुणगणसुविलापैर्नेति नेतीति सत्यम् ॥६॥

तवनुतिनतिनामान्यप्यघं पावयन्ति ददति परमशान्तिं दिव्यभोगान् जनानां।

इति पतितशरण्ये त्वां प्रपन्नोऽस्मि मातः ललिततरतरंगे चांग गंगे प्रसीद ॥७॥

शुभतरकृतयोगाद्विश्वनाथप्रसादात् भवहरवरविद्यां प्राप्य काश्यां हि गंगे।

भगवति तव तीरे नीरसारं निपीय मुदितहृदयकञ्जे नन्दसूनुं भजेऽहम् ॥८॥

(नोट: यह अत्यंत गूढ़ स्तोत्र है, इसके आरंभिक और मुख्य श्लोकों का नित्य जाप करने से ही संपूर्ण अष्टकम का फल प्राप्त हो जाता है। पाठ पूर्ण होने के बाद माता गंगा से अपने कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करें।)

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🌟 आर्थिक तंगी और मानसिक अवसाद दूर करने का ज्योतिषीय रहस्य

राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ स्थित प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि जल तत्व का सीधा संबंध व्यक्ति की जन्म कुंडली के ‘चंद्रमा’ (Moon) ग्रह से होता है। जब चंद्रमा राहु, केतु या शनि से पीड़ित होता है, तो व्यक्ति को भयंकर मानसिक तनाव, डर और धन की भारी कमी का सामना करना पड़ता है।

चंद्रमा के मारक दोषों को 100% शून्य करने, मानसिक शांति पाने और दसों दिशाओं से अपार धन आकर्षित करने के लिए साक्षात भगवान विष्णु का स्वरूप ’10 मुखी रुद्राक्ष’ (10 Mukhi Rudraksha) धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। इसे गले में धारण करके रोज़ाना ‘आनंदतीर्थ कृतम गंगा अष्टकम’ का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन की हर बाधा और पाप तुरंत भस्म हो जाते हैं।

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⚠️ आनंदतीर्थ कृत गंगा अष्टकम पाठ के 3 कड़े नियम (Rules for reciting Anandatirtha Kritam Ganga Ashtakam)

  1. स्वच्छता और आसन: इस अष्टकम का पाठ हमेशा कुशा या ऊनी आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके ही करें। बिना स्नान किए और अशुद्ध वस्त्रों में इसका पाठ पूर्णतः वर्जित है।
  2. जल का पात्र: पाठ करते समय अपने सामने एक तांबे के लोटे में थोड़ा सा गंगाजल और सादा जल मिलाकर अवश्य रखें। पाठ के बाद इस जल को प्रसाद के रूप में परिवार के सभी सदस्यों को दें और घर में छिड़कें।
  3. तामसिक भोजन का त्याग: जिस घर में इस स्तोत्र का नियमित पाठ होता है, वहां पूर्ण सात्विकता होनी चाहिए। घर में मांस-मदिरा, अंडा या तामसिक भोजन से सर्वथा बचना चाहिए।

Anandatirtha Kritam Ganga Ashtakam Lyrics in Sanskrit & Hindi 2026❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: आनंदतीर्थ कौन थे?

Ans: आनंदतीर्थ, श्री माधवाचार्य जी का ही दूसरा नाम है। वे द्वैत वेदांत के मुख्य प्रवर्तक और महान दार्शनिक थे, जिन्होंने माता गंगा की स्तुति में इस अष्टकम की रचना की।

Q2: इस अष्टकम का पाठ दिन में कितनी बार करना चाहिए?

Ans: अपनी मनोकामना की शीघ्र पूर्ति और मानसिक शांति के लिए इस अष्टकम का पाठ रोज़ाना कम से कम 1 बार या 3 बार करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

Q3: बिना गंगाजल के गंगा स्नान का पुण्य कैसे पाएं?

Ans: नहाने के पानी में अपनी तर्जनी उंगली से जल में एक त्रिभुज बनाएं और “गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति” मंत्र का जाप करते हुए इस अष्टकम का स्मरण करें। इससे घर पर ही गंगा स्नान का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

निष्कर्ष: आनंदतीर्थ कृतम गंगा अष्टकम वह अचूक और दिव्य मार्ग है जो आपके जीवन की हर भयंकर बाधा को नष्ट कर सकता है। Freeupay.in पर दिए गए नियमों के साथ आज ही से अपनी दैनिक पूजा में इसका पाठ शुरू करें। माता गंगा की कृपा से आपके घर में कभी भी धन, सुख और शांति की कमी नहीं रहेगी।

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