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Shri Nag Devta Ki Aarti Lyrics in Hindi | श्री नाग देवता की आरती (PDF): पढ़ें संपूर्ण आरती, हिंदी अर्थ और लाभ

Shri Nag Devta Ki Aarti: नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा अर्चना में नाग देवता की आरती की जाती हैं। नागपंचमी के दिन नाग देवता की आरती में चांदी, पीतल या तांबे की थाली से आरती करना शुभ बताया गया है । श्री नाग देवता की आरती की थाली में गाय के घी का आटे से बना दीपक या पीतल से बना दीपक से आरती करनी चाहिए।

Shri Nag Devta Ki Aarti: राहु-केतु और कालसर्प दोष को जड़ से खत्म करती है यह चमत्कारी आरती

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Shri Nag Devta Ki Aarti
Shri Nag Devta Ki Aarti

Shri Nag Devta Ki Aarti करने से पहले तीन बार दाहिने तरफ और 5 बार बाँये तरफ आरती घुमानी चाहिए। Shri Nag Devta Ki Aarti करते समय घंटी और शंख का वादन करने से घर और घर के आसपास का वातावरण शुद्ध होता है और सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा भी नष्ट हो जाती हैं। यंहा पर Shri Nag Devta Ki Aarti बताने जा रहे हैं।

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सनातन धर्म में नागों को पूजनीय माना गया है। नाग देवता पाताल लोक के स्वामी और अपार धन के रक्षक हैं। भगवान शिव के कंठ में वासुकी नाग और भगवान विष्णु की शय्या शेषनाग की है। जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में राहु और केतु के कारण ‘कालसर्प दोष’ बनता है, तो उसका जीवन संघर्षों और भयंकर आर्थिक तंगी से भर जाता है।

शास्त्रों के अनुसार, केवल शिव पूजा ही नहीं, बल्कि श्री नाग देवता की आरती (Nag Devta Aarti) का नित्य गान करने से बड़े से बड़ा कालसर्प दोष और सर्प भय तुरंत शांत हो जाता है। सावन के महीने में और विशेष रूप से नाग पंचमी के दिन इस आरती का पाठ करना अत्यंत चमत्कारी फल देता है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें श्री नाग देवता की संपूर्ण आरती, इसके अचूक लाभ और पूजा के नियम।

🌺 क्विक लिस्ट: श्री नाग देवता की आरती गाने के 5 महालाभ (Shri Nag Devta Ki Aarti Benefits)

श्री नाग देवता की आरती (Shri Nag Devta Ki Aarti) पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए पूजा के अंत में नाग देवता की आरती करने से क्या लाभ मिलते हैं:

जीवन का कष्ट (Problem)आरती के अचूक लाभ (Benefits of Aarti)
कालसर्प दोष और राहु-केतु की पीड़ाआरती के प्रभाव से कालसर्प दोष की नकारात्मक ऊर्जा 100% शून्य हो जाती है।
सर्पदंश (सांप के काटने) का भयपरिवार के किसी भी सदस्य को कभी सांप के काटने या विष का भय नहीं रहता।
अज्ञात भय और डरावने सपनेरात में सांपों के डरावने सपने आना बंद हो जाते हैं और मानसिक शांति मिलती है।
धन की रुकावट और कंगालीनाग देवता पाताल के रक्षक हैं; इनकी आरती से गड़ा हुआ या रुका हुआ अपार धन प्राप्त होता है।
आरती का विशेष नियमआरती हमेशा कपूर (Camphor) और शुद्ध गाय के घी का दीपक जलाकर ही करनी चाहिए।

📿 श्री नाग देवता की संपूर्ण आरती (Shri Nag Devta Ki Aarti Lyrics in Hindi)

नाग पंचमी, सावन के सोमवार या किसी भी पंचमी तिथि को नाग देवता की पूजा के बाद दोनों हाथ जोड़कर पूर्ण श्रद्धा के साथ इस श्री नाग देवता की आरती (Shri Nag Devta Ki Aarti) का गान करें:

॥ श्री नाग देवता की आरती ॥

आरती कीजे श्री नाग देवता की, भूमि का भार वहनकर्ता की ।

उग्र रूप है तुम्हारा देवा भक्त, सभी करते है सेवा ।।

मनोकामना पूरण करते, तन-मन से जो सेवा करते ।

आरती कीजे श्री नाग देवता की , भूमि का भार वहनकर्ता की ।।

भक्तो के संकट हारी की आरती कीजे श्री नागदेवता की ।

आरती कीजे श्री नाग देवता की, भूमि का भार वहनकर्ता की ।।

महादेव के गले की शोभा ग्राम देवता मै है पूजा ।

श्ररेत वर्ण है तुम्हारी धव्जा ।।

दास ओंकार पर रहती कृपा सह सत्रफनधारी की ।

आरती कीजे श्री नाग देवता की, भूमि का भार वहनकर्ता की ।।

आरती कीजे श्री नाग देवता की, भूमि का भार वहनकर्ता की ।।

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॥ श्री नाग देवता की आरती ॥

आरती कीजै श्री नाग देवता की।

महिमा अपार है जिनकी शिव के गले की शोभा की।।

आरती कीजै श्री नाग देवता की…

शेषनाग, वासुकी, तक्षक और कालिय।

शंखपाल, धृतराष्ट्र, पद्मनाभ और कम्बल।।

नौ नागों के नाम जपे जो, हर विपदा उसकी टल जाती।

आरती कीजै श्री नाग देवता की…

शिवजी के आभूषण तुम ही, विष्णु की शय्या तुम ही।

पाताल लोक के स्वामी तुम ही, धन के रक्षक भी तुम ही।।

जो कोई तुमको ध्यावे मन से, उसकी झोली भर जाती।

आरती कीजै श्री नाग देवता की…

कालसर्प का दोष मिटाओ, राहु-केतु की पीड़ा भगाओ।

भय और संकट दूर करो सब, सुख-समृद्धि घर में लाओ।।

दूध और लावा जो भी चढ़ावे, उसकी हर मुराद पूरी होती।

आरती कीजै श्री नाग देवता की…

महिमा अपार है जिनकी शिव के गले की शोभा की।

आरती कीजै श्री नाग देवता की।।

(आरती समाप्त होने के बाद शंख बजाएं और “ॐ नवकुलाय विद्यमहे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात्” का तीन बार उच्चारण करें।)

संपर्क करें- पंडित ललित त्रिवेदी (+91-9667189678)

किसी भी प्रकार के ज्योतिष एवं वास्तु संबंधी परामर्श के लिए वास्तु ज्योतिष पंडित ललित त्रिवेदी से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, जैसे कि धन, स्वास्थ्य, व्यापार, करियर, नौकरी आदि जैसी समस्याएं। वास्तु विजिट भी करवा सकते हैं, तथा वास्तु परामर्श भी प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी प्रकार के कुंडली मिलान, विवाह मुहूर्त, गृह प्रवेश या अन्य सभी प्रकार के मुहूर्त एवं शुभ समय निकलवाने के लिए तुरंत संपर्क करें।

जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?

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🌟 कालसर्प दोष और अज्ञात भय निवारण का अचूक ज्योतिषीय रहस्य

शक्ति विहार, कोटपूतली (राजस्थान) के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी स्पष्ट करते हैं कि जब जन्म कुंडली में भयंकर कालसर्प योग बनता है, तो व्यक्ति का आभामंडल (Aura) पूरी तरह से दूषित हो जाता है। ऐसे में केवल आरती गाने से ऊर्जा का संचार शरीर में पूरी तरह नहीं हो पाता।

राहु-केतु के दुष्प्रभावों को 100% नष्ट करने, कालसर्प दोष से त्वरित मुक्ति पाने और नाग देवता की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए राहु नियंत्रक ‘8 मुखी रुद्राक्ष’ (8 Mukhi Rudraksha) या केतु नियंत्रक ‘9 मुखी रुद्राक्ष’ गले में धारण करना सबसे शक्तिशाली ज्योतिषीय ‘कवच’ है। सावन के पवित्र महीने या नाग पंचमी के दिन शिवलिंग से स्पर्श कराकर इस रुद्राक्ष को धारण करने के बाद यदि नाग देवता की आरती की जाए, तो इसका फल 1000 गुना बढ़ जाता है और व्यक्ति की तरक्की में आ रही हर रुकावट रातों-रात खत्म हो जाती है।

⚠️ नाग देवता की आरती करते समय रखें इन 3 कड़े नियमों का ध्यान

  1. आरती की दिशा और स्थान: आरती करते समय आपका मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए। घर के मंदिर में चांदी के नाग-नागिन या शिवलिंग के समक्ष ही आरती करें।
  2. लोहे के बर्तनों का निषेध: नाग पूजा और आरती के दौरान लोहे के बर्तनों या दीपक का प्रयोग सख्त वर्जित है। हमेशा पीतल, चांदी या मिट्टी के दीपक का ही उपयोग करें।
  3. तामसिक भोजन से दूरी: जिस दिन आप नाग देवता की आरती या पूजा कर रहे हों, उस दिन घर में लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन पूरी तरह से वर्जित रखें। सात्विकता अत्यंत आवश्यक है।

Shri Nag Devta Ki Aarti❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: नाग देवता की आरती किस समय करनी चाहिए?

Ans: नाग देवता की आरती सुबह पूजा के समय या शाम को ‘प्रदोष काल’ (सूर्यास्त के समय) करना सबसे अधिक फलदायी माना जाता है।

Q2: आरती के बाद नाग देवता को क्या भोग लगाएं?

Ans: आरती के बाद नाग देवता को गाय का कच्चा दूध, धान का लावा (लाई), बताशे और खीर का भोग लगाना सबसे शुभ होता है।

Q3: क्या महिलाएं भी नाग देवता की आरती कर सकती हैं?

Ans: जी हाँ, महिलाएं घर की सुख-शांति, पति की तरक्की और बच्चों को अज्ञात भय से बचाने के लिए पूर्ण श्रद्धा से नाग देवता की आरती कर सकती हैं।

निष्कर्ष: नाग देवता की पूजा केवल भय दूर करने के लिए नहीं, बल्कि शिव कृपा और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। Freeupay.in पर बताई गई इस अत्यंत चमत्कारी ‘श्री नाग देवता की आरती’ का नित्य गान करें। देवों के देव महादेव और नाग देवता के आशीर्वाद से आपके जीवन का हर कालसर्प दोष नष्ट होगा और घर में खुशहाली आएगी।

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