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Vastu Ke Anusar Shubh Ya Ashubh Makan: भूलकर भी न खरीदें ऐसा घर, वरना रातों-रात हो जाएंगे कंगाल!

Vastu Ke Anusar Shubh Ya Ashubh Makan: हर इंसान अपने जीवन एक सपना जरुर देखता हैं, की उसका अपना खुद का एक घर हो और वे इन्सान अपने जीवन की सारी जमा की गई धन-पूंजी को लगाकर अपने सपनो का एक घर खरीदता है फिर या बनाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ईंट-पत्थर से बना हुआ यह ढांचा आपके और आपके परिवार के जीवन में सुख-शांति लाने वाला होगा या फिर कोई भयंकर परेशान एवं बर्बादी, यह सब पूरी तरह से उस घर के ‘वास्तु’ (Vastu) पर निर्भर करता है।

Vastu Ke Anusar Shubh Ya Ashubh Makan: भूलकर भी न खरीदें ऐसा घर, वरना रातों-रात हो जाएंगे कंगाल!

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Vastu Ke Anusar Shubh Ya Ashubh Makan
Vastu Ke Anusar Shubh Ya Ashubh Makan

वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि कोई भी मकान शुभ ऊर्जा से भरा हुआ रहता है, तो उस घर में रहने वाले लोग दिन-दूनी रात-चौगुनी तरक्की करते हैं। वहीं, यदि मकान अशुभ है, तो भयंकर बीमारियां, कोर्ट-कचहरी और दरिद्रता परिवार का पीछा नहीं छोड़ती। Freeupay.in के इस विशेष लेख में विस्तार से जानिए वास्तु के अनुसार शुभ और अशुभ मकान की सटीक पहचान कैसे करें (Vastu Ke Anusar Shubh Ya Ashubh Makan), ताकि आपकी मेहनत की कमाई कभी बेकार न जाए।

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🌺 क्विक लिस्ट: वास्तु के अनुसार शुभ और अशुभ मकान की तुरंत पहचान

वास्तु के अनुसार शुभ या अशुभ मकान (Vastu Ke Anusar Shubh Ya Ashubh Makan) जानकारी पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। घर का बयाना (Token money) देने से पहले इन बातों को अवश्य जांच लें:

मकान का प्रकार / स्थिति (Type of House)वास्तु परिणाम (Vastu Result – शुभ/अशुभ)
पूर्व (East) या उत्तर (North) मुखी मकानअत्यंत शुभ: यह सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और धन वृद्धि का प्रतीक है।
टी-पॉइंट (T-Point) या तिराहे पर बना घरभयंकर अशुभ: इसे ‘शूल’ कहा जाता है। यहाँ रहने वालों को हमेशा भयंकर तनाव और धन हानि होती है।
वर्गाकार (Square) या आयताकार (Rectangular)सर्वश्रेष्ठ (शुभ): जिस प्लॉट या घर के चारों कोने 90 डिग्री के हों, वह सबसे ज्यादा बरकत देता है।
कटा हुआ नैऋत्य कोण (South-West Cut)अत्यंत अशुभ: यदि घर का दक्षिण-पश्चिम कोना कटा है, तो घर के मुखिया को गंभीर रोग और कर्ज का सामना करना पड़ता है।
ईशान कोण (North-East) में खुला स्थानशुभ: घर के उत्तर-पूर्व में खुला स्थान होने से घर में साक्षात देवताओं का वास होता है।

📿 वास्तु अनुसार मकान शुभ एवं अशुभ जानें (Vastu Ke Anusar Shubh Ya Ashubh Makan)

वास्तु शास्त्र के अनुसार आपके मकान या भूखंड का कोना आगे की ओर निकला या बढ़ा हुआ हो तो इस प्रकार का भूखण्ड शुभ या अशुभ होता है। इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

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निम्न कोण का बड़ा या छोटा होने का शुभ-अशुभ फल

वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी भी भू-खण्ड या मकान के किसी कोण (दिशा) के बढ़ने पर उस मकान की ऊर्जा पर कैसा प्रभाव डालती है। इसके बारे में यहाँ बताने जा रहे हैं, मकान का किस दिशा का कोण बढ़ाने से व्यक्ति के जीवन में अलग-अलग क्षेत्रों में लाभ या हानि होगी इसके बारे में बताया जा रहा है। नीचे सभी 8 कोणों की पूरी जानकारी दी जा रही है।

1. उत्तर (North) दिशा बढ़े:

  • यह दिशा का कारक तत्व जल हैं, इस दिशा को कुबेर (धन के देवता) का स्थान कहा जाता हैं, मकान की इस दिशा के बढ़ने से व्यक्ति के जीवन में धन वृद्धि के अवसर, आय में वृद्धि और व्यापार व नौकरी में उन्नति के नए मौके प्राप्त होते रहते हैं।

    2. उत्तर-पूर्व (ईशान / North-East) दिशा बढ़े:

    • यह दिशा का कारक तत्व जल हैं, इस दिशा को स्वामी भगवान शिव और ग्रह बृहस्पति हैं, मकान की इस दिशा के बढ़ने से व्यक्ति को ईश्वर कृपा, मानसिक शांति, विद्या, अध्यात्म, प्रतिष्ठा परिवार में सुख-शांति हानि (असंतुलित हो तो) और किसी प्रकार का निर्णय लेने में भ्रम भावुकता आदि होती हैं। मकान के इस हिस्सा का बढ़ना सबसे शुभ कोण माना जाता है, इसका बढ़ना प्रायः शुभ ही होता है।

    3. पूर्व (East) दिशा बढ़े:

    • यह दिशा का कारक तत्व अग्नि हैं, इस दिशा का स्वामी इंद्र देव हैं और इसका प्रतिनिधि ग्रह सूर्य है। मकान की इस दिशा के बढ़ने से व्यक्ति को मान सम्मान की प्राप्ति, यश, स्वास्थ्य, अच्छा सरकारी लाभ की प्राप्ति आदि लाभ प्राप्त होते हैं परन्तु अहंकार का बढ़ना और पिता के साथ मतभेद जैसी हानि भी होगी।

    4. दक्षिण-पूर्व (आग्नेय / South-East) दिशा बढ़े:

    • यह दिशा का कारक तत्व अग्नि हैं, यह दिशा धन के प्रवाह (कैश फ्लो) को नियंत्रित करती हैं और मकान की इस दिशा के बढ़ने से व्यापार में तेजी फूड, होटल, केमिकल जैसे कामों से जुड़ें हुए व्यक्तियों को लाभ प्राप्त होते हैं परन्तु के साथ खर्च का बढ़ना, अत्यधिक क्रोध, तनाव दांपत्य जीवन में कलह रहना जैसी हानि भी होगी।

    5. दक्षिण (South) दिशा बढ़े:

    • यह दिशा का कारक तत्व अग्नि हैं, इस दिशा का स्वामी यम हैं और इसका प्रतिनिधि ग्रह मंगल है। मकान की इस दिशा के बढ़ने से व्यक्ति को मेहनत करने की शक्ति और प्रशासनिक क्षमता में लाभ मिलता हैं परन्तु जीवन में संघर्ष का बढ़ना, दुर्घटना, मुकदमे का योग और स्वास्थ्य गिरावट जैसी हानि भी होगी।

    6. दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य / South-West) बढ़े

    • यह दिशा का कारक तत्व पृथ्वी हैं, यह दिशा धन के प्रवाह (कैश फ्लो) को नियंत्रित करती हैं और मकान की इस दिशा के बढ़ने से घर में मालिकाना भाव होना, नेतृत्व शक्ति एवं संपत्ति में वृद्धि में लाभ मिलता हैं एवं जरूरत से ज्यादा हिस्सा बढ़ा हो तो व्यक्ति जिद्दी, तानाशाही स्वभाव और रिश्तों में कठोरता जैसी समस्या आती हैं।

    7. पश्चिम (West) दिशा बढ़े:

    • यह दिशा का कारक तत्व आकाश हैं, इस दिशा का स्वामी वरुण देव हैं और इसका प्रतिनिधि ग्रह शनि है। मकान की इस दिशा के बढ़ने से व्यक्ति को मेहनत का फल एवं व्यवसाय में लाभ प्राप्त होता हैं परन्तु प्रगति धीमी और व्यक्ति का आलस्य बढ़ सकता है।

    8. उत्तर-पश्चिम (वायव्य / North-West) दिशा बढ़े:

    • यह दिशा का कारक तत्व वायु हैं, यह दिशा गति, संचार (communication) और सामाजिक संबंधों को नियंत्रित करती हैं और मकान की इस दिशा के बढ़ने से नेटवर्किंग और मार्केटिंग से जुड़ी यात्राओं में सफलता मिलती हैं परन्तु व्यक्ति के जीवन में अस्थिरता, बार-बार स्थान परिवर्तन और रिश्तों में टिकाव की कमी में हानि की प्राप्त होती हैं।

    संपर्क करें- पंडित ललित त्रिवेदी: Contact us for Vastu Consultation (+91-9667189678)

    किसी भी प्रकार के ज्योतिष एवं वास्तु संबंधी परामर्श के लिए वास्तु ज्योतिष पंडित ललित त्रिवेदी से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, जैसे कि धन, स्वास्थ्य, व्यापार, करियर, नौकरी आदि जैसी समस्याएं। वास्तु विजिट भी करवा सकते हैं, तथा वास्तु परामर्श भी प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी प्रकार के कुंडली मिलान, विवाह मुहूर्त, गृह प्रवेश या अन्य सभी प्रकार के मुहूर्त एवं शुभ समय निकलवाने के लिए तुरंत संपर्क करें।

    मकानों का स्वरूप (Nature of the house)

    मकान का निर्माण कराने से पहले उसकी रूपरेखा पर विचार अवश्य कर लेना चाहिए। छत की ढलान ऐसी हो जिससे वर्षा का पानी इकट्ठा न हो। अगर ऐसा न हो तो सीलन पैदा हो जाएगी जिससे मकान के अंदर की दीवार एवं छत खराब हो सकती है। मकान चौड़ाई की अपेक्षा गहरा होना चाहिए। मकान की गहराई स्थिर जीवन की सूचक होती है। जिस मकान के मुख्य द्वार में एक तरफ बड़ी खिड़की हो तो वह समृद्धि व प्रतिष्ठा की सूचक होती है। 

    भूखण्डों के आकार की भांति ही मकानों के भी आकार का विचार किया गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार वर्गाकार, आयताकर व गोलाकार मकान उत्तम माए गए हैं। ज्योतिष शास्त्रियों के मतानुसार वर्गाकार मकान पृथ्वी एवं स्वर्ग के सूचक होते हैं। गोलाकार या वृत्ताकार मकान भी अति शुभ होते हैं। 

    1. ‘U’ (एल) आकार के मकान:

    • यदि कोई मकान यू (U) आकार का हो तो वह शुभ नहीं होता है। जिस मकान का मुख्य द्वार यू (U) आकार का होता है उसमें रहने वाले व्यक्ति को दुर्भाग्य का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में द्वार के दोनों ओर पौधे लगाने से शुभ फल मिलता है। 

    2. ‘क्रॉस’ आकार का मकान

    • जिस मकानों का आकार क्रॉस के आकार का होता है वे अशुभ होते हैं। ऐसे मकानों में रहने वाले लोगों की धन-संपदा का नाश हो जाता है तथा वे पराश्रित हो जाते हैं।

    3. ‘L’ (एल) आकार का मकान- 

    • वास्तुशास्त्र के मतानुसार एल (L) के आकार का मकान अशुभ होता है क्योंकि इनका एक भाग खाली होता है। खाली भाग या अनिर्मित भाग अशुभ माना जाता है। ऐसे मकान को शुभ बनाने के लिए खाली भाग में एक बल्ब जलाएं। ऐसा करने से मकान में संतुलन बना रहता है।

    📿 शुभ मकान की 3 सबसे बड़ी पहचान (Auspicious House Vastu)

    यदि आप नया घर देख रहे हैं, तो उसमें ये 3 लक्षण होना अत्यंत शुभ माना जाता है:

    1. जल की सही दिशा: जिस मकान में बोरिंग (Boring), अंडरग्राउंड वाटर टैंक या कुआं घर के ईशान कोण (North-East) में होता है, वह मकान कुबेर के खजाने के समान होता है। वहाँ धन की कभी कमी नहीं होती।
    2. ढलान (Slope) की स्थिति: वास्तु के अनुसार शुभ मकान वह है, जिसकी छत और फर्श का ढलान हमेशा उत्तर (North) या पूर्व (East) दिशा की ओर हो। ऐसे घर में रहने वालों का करियर बहुत तेज़ी से आगे बढ़ता है।
    3. हवा और प्रकाश का मार्ग: घर का मुख्य द्वार ऐसा होना चाहिए कि सूर्योदय की पहली किरण घर के अंदर प्रवेश करे। पर्याप्त वेंटिलेशन और प्राकृतिक प्रकाश वाले घर में बीमारियां नहीं टिकतीं।

    जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?

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    ⚠️ भूलकर भी न खरीदें ऐसा अशुभ मकान (Inauspicious House Vastu)

    कुछ मकान देखने में बहुत सुंदर होते हैं, लेकिन वास्तु के नज़रिए से वे भयंकर नकारात्मक होते हैं। ऐसे मकानों से तुरंत दूर हो जाएं:

    1. छायावेध दोष (Shadow Defect): यदि किसी मकान पर किसी बड़े मंदिर के शिखर, भारी पेड़ या खंडहर की छाया पड़ती हो, तो उसे ‘छायावेध’ दोष कहते हैं। ऐसे घर में परिवार की कभी तरक्की नहीं होती और वंश वृद्धि रुक जाती है।
    2. दक्षिण मुखी प्रवेश द्वार (South Facing Entry): वैसे तो सभी दक्षिण मुखी घर खराब नहीं होते, लेकिन यदि मुख्य द्वार ठीक ‘दक्षिण-पश्चिम’ (नैऋत्य कोण) में हो, तो उस घर में अकाल मृत्यु, दुर्घटनाएं और भयंकर आर्थिक संकट आता है।
    3. शौचालय (Toilet) का गलत स्थान: यदि किसी बने-बनाए घर में शौचालय ‘ईशान कोण’ (उत्तर-पूर्व) या घर के बिल्कुल मध्य (ब्रह्मस्थान) में बना हो, तो वह घर भयंकर अशुभ है। ऐसे घर में कैंसर जैसी बीमारियां और मानसिक अवसाद (Depression) पनपता है।

    🌟 वास्तु दोष निवारण का अचूक और बिना तोड़-फोड़ वाला ज्योतिषीय रहस्य

    शक्ति विहार, कोटपूतली (राजस्थान) के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी स्पष्ट करते हैं कि आज के समय में फ्लैट्स (Flats) और अपार्टमेंट्स का चलन बहुत बढ़ गया है, जहाँ वास्तु के अनुसार 100% सही मकान मिलना लगभग असंभव है। कई बार हम अनजाने में गलत वास्तु वाला मकान खरीद लेते हैं और फिर तोड़-फोड़ करना संभव नहीं होता।

    यदि आपके मकान में कोई भयंकर वास्तु दोष (जैसे गलत दिशा में टॉयलेट या मुख्य द्वार) है, तो बिना तोड़-फोड़ के संपूर्ण घर की ऊर्जा को शुद्ध करने के लिए घर के मुख्य द्वार पर साक्षात दसों दिशाओं के रक्षक ’10 मुखी रुद्राक्ष’ (10 Mukhi Rudraksha) या एक सिद्ध ‘संपूर्ण वास्तु दोष निवारण यंत्र’ स्थापित करना सबसे अमोघ उपाय है। यह घर के किसी भी भयंकर वास्तु दोष की नकारात्मक ऊर्जा को 100% नष्ट कर देता है और घर में सुख-शांति का संचार करता है।

    Vastu Ke Anusar Shubh Ya Ashubh Makan❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

    Q1: क्या दक्षिण मुखी मकान हमेशा अशुभ होता है?

    Ans: बिल्कुल नहीं! यदि दक्षिण मुखी मकान का मुख्य द्वार दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) या मध्य दक्षिण में हो, तो यह अत्यंत शुभ और धन देने वाला होता है। केवल दक्षिण-पश्चिम का द्वार अशुभ होता है।

    Q2: टी-पॉइंट (T-Point) वाले मकान का वास्तु दोष कैसे दूर करें?

    Ans: टी-पॉइंट वाले मकान के ठीक सामने से आने वाली नकारात्मक ऊर्जा को रोकने के लिए मुख्य द्वार के ऊपर ‘पाकुआ दर्पण’ (PaKua Mirror) या अष्टकोणीय शीशा लगाना चाहिए।

    Q3: घर का ब्रह्मस्थान (Center of House) कैसा होना चाहिए?

    Ans: घर का मध्य भाग यानी ब्रह्मस्थान हमेशा साफ, खाली और हवादार होना चाहिए। यहाँ भूलकर भी कोई खंभा (Pillar), भारी फर्नीचर या सीढ़ियां नहीं होनी चाहिए।

    निष्कर्ष: मकान केवल ईंटों की दीवारें नहीं, बल्कि हमारी ऊर्जा और भाग्य का केंद्र होता है। कोई भी नया घर या प्लॉट खरीदने से पहले वास्तु के इन नियमों (Vastu Ke Anusar Shubh Ya Ashubh Makan) का बारीकी से परीक्षण करें। Freeupay.in पर बताए गए इन वास्तु टिप्स का पालन करके आप अपने परिवार के लिए एक सुखी, समृद्ध और रोगमुक्त आशियाना चुन सकते हैं।

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