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Vishwakarma Chalisa Lyrics in Hindi 2026: विश्वकर्मा जयंती को पढ़ें यह श्री विश्वकर्मा चालीसा (PDF), व्यापार में होगी दिन-दूनी रात-चौगुनी तरक्की

Vishwakarma Chalisa 2026: 31 जनवरी को विश्वकर्मा जयंती पर करें इस चालीसा का पाठ, बंद किस्मत का ताला भी खुल जाएगा

Vishwakarma Chalisa 2026: क्या आप दिन और रात अपने व्यापार वृद्धि के लिए बहुत मेहनत करते हैं फिर भी आपके बिजनेस में बरकत और तरक्की नहीं हो रही है? या फिर आपकी मशीन या लैपटॉप आदि में कोई ना कोई खराबी आती रहती है? तो आने वाली 31 जनवरी 2026 (शनिवार) को विश्वकर्मा जयंती का त्यौहार आ रहा है, जो आपकी इन सब समस्याओं को जड़ से मिटाने का सबसे उत्तम दिन है।

हमारी वेबसाइट FreeUpay.in (फ्री उपाय.इन) में रोजाना आने वाले व्रत त्यौहार की जानकारी के अलावा मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, साधना, व्रत कथा, ज्योतिष उपाय, लाल किताब उपाय, स्तोत्र आदि महत्वपूर्ण जानकारी उबलब्ध करवाई जाएगी सभी जानकारी का अपडेट पाने के लिए दिए गये हमारे WhatsApp Group Link (व्हात्सप्प ग्रुप लिंक) क्लिक करके Join (ज्वाइन) कर सकते हैं।

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Vishwakarma Chalisa
Vishwakarma Chalisa 2026

जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?

सलाह: कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा जी को देवताओं के शिल्पी और निर्माण के देवता कहा जाता हैं। जो व्यक्ति विश्वकर्मा जयंती के दिन अपने व्यापार में काम आने वाली मशीनों और औजारों की पूजा करके ‘श्री विश्वकर्मा चालीसा’ (Chalisa) का पाठ करते है, तो उसके हाथ में ऐसा हुनर आता है कि वह कभी खाली नहीं बैठता। Freeupay.in के इस लेख में पढ़ें संपूर्ण विश्वकर्मा जयंती चालीसा हिंदी में।

📜 श्री विश्वकर्मा चालीसा (Shri Vishwakarma Chalisa Lyrics)

31 जनवरी (शनिवार) को विश्वकर्मा जयंती के दिन पूजा करते समय हाथ में फूल और अक्षत लेकर इस विश्वकर्मा चालीसा का पाठ करें:

|| दोहा ||

श्री विश्वकर्म प्रभु वन्दऊँ, चरणकमल धरिध्य़ान ।

श्री, शुभ, बल अरु शिल्पगुण, दीजै दया निधान ।।

|| चौपाई ||

जय श्री विश्वकर्म भगवाना । जय विश्वेश्वर कृपा निधाना ।।

शिल्पाचार्य परम उपकारी । भुवना-पुत्र नाम छविकारी ।।

अष्टमबसु प्रभास-सुत नागर । शिल्पज्ञान जग कियउ उजागर ।।

अद्रभुत सकल सुष्टि के कर्त्ता । सत्य ज्ञान श्रुति जग हित धर्त्ता ।।

अतुल तेज तुम्हतो जग माहीं । कोइ विश्व मँह जानत नाही ।।

विश्व सृष्टि-कर्त्ता विश्वेशा । अद्रभुत वरण विराज सुवेशा ।।

एकानन पंचानन राजे । द्विभुज चतुर्भुज दशभुज साजे ।।

चक्रसुदर्शन धारण कीन्हे । वारि कमण्डल वर कर लीन्हे ।।

शिल्पशास्त्र अरु शंख अनूपा । सोहत सूत्र माप अनुरूपा ।।

धमुष वाण अरू त्रिशूल सोहे । नौवें हाथ कमल मन मोहे ।।

दसवाँ हस्त बरद जग हेतू । अति भव सिंधु माँहि वर सेतू ।।

सूरज तेज हरण तुम कियऊ । अस्त्र शस्त्र जिससे निरमयऊ ।।

चक्र शक्ति अरू त्रिशूल एका । दण्ड पालकी शस्त्र अनेका ।।

विष्णुहिं चक्र शुल शंकरहीं । अजहिं शक्ति दण्ड यमराजहीं ।।

इंद्रहिं वज्र व वरूणहिं पाशा । तुम सबकी पूरण की आशा ।।

भाँति – भाँति के अस्त्र रचाये । सतपथ को प्रभु सदा बचाये ।।

अमृत घट के तुम निर्माता । साधु संत भक्तन सुर त्राता ।।

लौह काष्ट ताम्र पाषाना । स्वर्ण शिल्प के परम सजाना ।।

विद्युत अग्नि पवन भू वारी । इनसे अद् भुत काज सवारी ।।

खान पान हित भाजन नाना । भवन विभिषत विविध विधाना ।।

विविध व्सत हित यत्रं अपारा । विरचेहु तुम समस्त संसारा ।।

द्रव्य सुगंधित सुमन अनेका । विविध महा औषधि सविवेका ।।

शंभु विरंचि विष्णु सुरपाला । वरुण कुबेर अग्नि यमकाला ।।

तुम्हरे ढिग सब मिलकर गयऊ । करि प्रमाण पुनि अस्तुति ठयऊ ।।

भे आतुर प्रभु लखि सुर–शोका । कियउ काज सब भये अशोका ।।

अद् भुत रचे यान मनहारी । जल-थल-गगन माँहि-समचारी ।।

शिव अरु विश्वकर्म प्रभु माँही । विज्ञान कह अतंर नाही ।।

बरनै कौन स्वरुप तुम्हारा । सकल सृष्टि है तव विस्तारा ।।

रचेत विश्व हित त्रिविध शरीरा । तुम बिन हरै कौन भव हारी ।।

मंगल-मूल भगत भय हारी । शोक रहित त्रैलोक विहारी ।।

चारो युग परपात तुम्हारा । अहै प्रसिद्ध विश्व उजियारा ।।

ऋद्धि सिद्धि के तुम वर दाता । वर विज्ञान वेद के ज्ञाता ।।

मनु मय त्वष्टा शिल्पी तक्षा । सबकी नित करतें हैं रक्षा ।।

पंच पुत्र नित जग हित धर्मा । हवै निष्काम करै निज कर्मा ।।

प्रभु तुम सम कृपाल नहिं कोई । विपदा हरै जगत मँह जोइ ।।

जै जै जै भौवन विश्वकर्मा । करहु कृपा गुरुदेव सुधर्मा ।।

इक सौ आठ जाप कर जोई । छीजै विपति महा सुख होई ।।

पढाहि जो विश्वकर्म-चालीसा । होय सिद्ध साक्षी गौरीशा ।।

विश्व विश्वकर्मा प्रभु मेरे । हो प्रसन्न हम बालक तेरे ।।

मैं हूँ सदा उमापति चेरा । सदा करो प्रभु मन मँह डेरा ।।

|| दोहा ||

करहु कृपा शंकर सरिस, विश्वकर्मा शिवरुप ।

श्री शुभदा रचना सहित, ह्रदय बसहु सुरभुप ।।

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📜 श्री विश्वकर्मा जी की चालीसा (Shri Vishwakarma Ki Chalisa Lyrics)

|| दोहा ||

विनय करौं कर जोड़कर, मन वचन कर्म सम्हारि।

मोर मनोरथ पूर्ण कर, विश्वकर्मा भव हारि॥

|| चौपाई ||

जय विश्वकर्मा अमित गति, जय जय जय जगत पति।

सकल सृष्टि के कर्ता धर्ता, सब जग पालन भर्ता॥

आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।

जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया॥

ऋषि अंगिरा तप कियो, शांति नहिं पाई।

ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥

रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीन्हा।

संकट मोचन बनकर, दूर दु:ख कीन्हा॥

जब रथकार दंपति, तुम्हरी टेर करी।

सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी॥

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।

त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज, सकल रूप साजे॥

ध्यान धरें जब नर, सकल सिद्धि आवै।

मन वांछित फल पावै, अटल शांति पावै॥

कष्ट मिटैं सब तन के, रिद्धि सिद्धि पावै।

श्री विश्वकर्मा प्रभु की, महिमा अति गावै॥

जो नर पाठ करै मन लाई।

ताके भवन में सुख सम्पत्ति आई॥

विश्वकर्मा की ज्योति, जो घर में जगावै।

सदा रहे सुख सम्पत्ति, कभी न दुख पावै॥

|| दोहा || श्री विश्वकर्मा की चालीसा, जो नित पढ़त सुजान। काम काज सब सिद्ध हों, मिले मान सम्मान॥

🌟 31 जनवरी को चालीसा पढ़ने के 3 बड़े फायदे

  1. स्किल (Hunar) में निखार: यह विश्वकर्मा चालीसा को पढ़ने से बुद्धि में तीव्रता आती है। जो भी कोई कारीगर या इंजीनियर इसे ध्यान से रोजाना पाठ करता है, उसका अपने काम में मन लगता है और कार्य संबधित गलतियां कम होती हैं।
  2. मशीनों की सुरक्षा: इस चालीसा का पाठ करने से व्यापार स्थल या फैक्ट्री में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) उत्पन होती है, जिससे आपके यहां होने वाली दुर्घटनाएं और मशीनों का खराब होना कम हो जाता है।
  3. धन वृद्धि: दी गई इस विश्वकर्मा चालीसा के आखिरी दोहे में लिखा गया है— “काम काज सब सिद्ध हों”, यानी इसे पढ़ने मात्र से व्यक्ति के रुके हुए काम पूरे होते हैं और पेमेंट टाइम पर मिलती है।

🙏 पाठ करने की सही विधि (Vidhi for 31 Jan)

  • समय: विश्वकर्मा जयंती (31 जनवरी) की सुबह 08:30 से 10:45 बजे के बीच या शुभ मुहूर्त में पूजा करके पढ़े।
  • स्थान: इस चालीसा का पाठ अपनी दुकान, गैराज या फैक्ट्री में स्थित पूजा स्थल में भगवान की मूर्ति के सामने बैठकर पढ़ें।
  • भोग: विश्वकर्मा चालीसा का पाठ पूरा होने पर भगवान को बूंदी के लड्डू या मिठाई का भोग लगाएं।
  • समापन: चालीसा पढ़ने के बाद आरती भी जरूर करें।

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❓ Vishwakarma Chalisa Lyrics in Hindi 2026: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: चालीसा पहले पढ़ें या आरती?

Ans: हमेशा पहले चालीसा पढ़नी चाहिए, उसके बाद अंत में आरती करनी चाहिए।

Q2: क्या घर की महिलाएं भी यह पाठ कर सकती हैं?

Ans: बिल्कुल! घर के इलेक्ट्रॉनिक सामान (फ्रिज, मिक्सी, गाड़ी) की सुरक्षा के लिए महिलाएं भी यह चालीसा पढ़ सकती हैं।

Q3: विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को है या 31 जनवरी को?

Ans: दोनों दिन सही हैं। 17 सितंबर को ‘कन्या संक्रांति’ होती है, जबकि माघ शुक्ल त्रयोदशी (31 जनवरी 2026) को भगवान विश्वकर्मा का प्राकट्य दिवस (Birthday) है।

निष्कर्ष: भगवान विश्वकर्मा ही कर्म और सफलता के दाता हैं। 31 जनवरी 2026 को Freeupay.in पर दी गई इस Vishwakarma Chalisa के साथ अपनी पूजा संपन्न करें। आपका कारोबार दिन-दूनी रात-चौगुनी तरक्की करेगा।

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