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Guru Pradosh Puja Vidhi 2026: A Step-by-Step Puja Vidhi & Vrat Guide गुरु प्रदोष व्रत 2026: जानें संपूर्ण पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और सामग्री लिस्ट

Guru Pradosh Puja Vidhi 2026: हमारे हिंदू धर्म के अनुसार प्रदोष व्रत यानि त्रयोदशी व्रत करने से भगवान शिव अपनी कृपा साधक को प्रदान होती है और इस कलयुग में प्रदोष व्रत यानि त्रयोदशी व्रत बहुत मंगलकारी व लाभकारी बताया गया है। हर वार का प्रदोष व्रत के अलग ही फायदे और लाभ बताये गये हैं। इसलिए यंहा हम Guru Pradosh Vrat Puja विधि के बारे में बताने जा रहे हैं।

Guru Pradosh Puja Vidhi 2026: गुरु प्रदोष पर इस अचूक विधि से करें शिव पूजा, मिलेगा 100 गायों के दान का पुण्य और रातों-रात बदल जाएगी किस्मत

हमारी वेबसाइट FreeUpay.in (फ्री उपाय.इन) में रोजाना आने वाले व्रत त्यौहार की जानकारी के अलावा मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, साधना, व्रत कथा, ज्योतिष उपाय, लाल किताब उपाय, स्तोत्र आदि महत्वपूर्ण जानकारी उबलब्ध करवाई जाएगी सभी जानकारी का अपडेट पाने के लिए दिए गये हमारे WhatsApp Group Link (व्हात्सप्प ग्रुप लिंक) क्लिक करके Join (ज्वाइन) कर सकते हैं।

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Guru Pradosh Puja Vidhi
Guru Pradosh Puja Vidhi

यह तो आप सब जानते हो की त्रयोदशी व्रत माह में दो बार आते है एक तो शुक्ल पक्ष में और दूसरा कृष्ण पक्ष में हर पक्ष 15 दिन का होता है और हर पक्ष में एक त्रयोदशी आती है एक मास में दो पक्षों में बंटा हुआ होता है। ऐसी मान्यता मानी जाती है कि प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करना बहुत ही लाभदायक होता हैं। हम आपको यंहा गुरु प्रदोष व्रत की सम्पूर्ण पूजा कैसे की जाती हैं उसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे है।

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साल 2026 में पड़ने वाले गुरु प्रदोष व्रत शत्रुओं पर विजय पाने, व्यापार में अपार सफलता और वैवाहिक जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए अत्यंत शुभ हैं। प्रदोष व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब पूजा शाम के समय यानी ‘प्रदोष काल’ में सही विधि-विधान से की जाए। Freeupay.in के इस विशेष लेख में जानिए साल 2026 में गुरु प्रदोष की संपूर्ण पूजा विधि (Guru Pradosh Vrat Puja) और आवश्यक सामग्री।

🕰️ गुरु प्रदोष 2026: शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त (ध्यान दें!)

गुरु प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा हमेशा ‘प्रदोष काल’ (सूर्यास्त के समय) में की जाती है। त्रयोदशी तिथि शाम को ही समाप्त हो रही है, इसलिए समय का खास ध्यान रखें:

व्रत की तारीख:14 मई 2026 (गुरुवार)
प्रदोष काल मुहूर्त (पूजा का समय):शाम 06:22 बजे से रात 08:07 बजे तक
विशेष:इसी समय (शाम को) पूजा करने पर ही व्रत का फल मिलता है।

📋 गुरु प्रदोष पूजा सामग्री लिस्ट (Guru Pradosh Puja Samagri)

पूजा की तैयारी के लिए बाजार जाने से पहले इस सामग्री लिस्ट (Checklist) को सेव कर लें। भगवान शिव की पूजा के लिए यह अत्यंत आवश्यक है:

सामग्री (Puja Item)महत्व (Significance)
पंचामृतगाय का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (अभिषेक के लिए)।
बेलपत्र (Belpatra)11 या 21 बेलपत्र (कटे-फटे न हों, और उन पर चंदन से ‘राम’ लिखा हो)।
भस्म और सफेद चंदनशिवलिंग पर त्रिपुंड लगाने के लिए।
पुष्प और फलधतूरा, भांग, सफेद फूल, मदार (आक) के फूल और मौसमी फल।
अन्य सामग्रीअक्षत (बिना टूटे चावल), धूप, दीप (गाय के घी का), कपूर, कलावा और शिव चालीसा की पुस्तक।

(ध्यान रखें: शिवलिंग पर भूलकर भी सिंदूर, हल्दी, कुमकुम या तुलसी के पत्ते न चढ़ाएं।)

🕉️ गुरु प्रदोष पूजा की Step-by-Step विधि (Pradosh Kaal Puja)

प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा हमेशा ‘प्रदोष काल’ में ही की जाती है शाम 06:22 बजे से रात 08:07 बजे के बीच (सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद का समय)। पूजा का 100% शुभ फल पाने के लिए इस विधि का पालन करें:

1. सुबह का संकल्प (Morning Sankalp)

आप Guru Pradosh Puja Vidhi को गुरु प्रदोष व्रत के दिन जातक को प्रात:काल उठकर नित्य कर्म से निवृत हो स्नान कर शुद्ध कपडे पहनकर भगवान श्री शिव जी का पूजन करना चाहिये। घर के मंदिर में दीप जलाकर हाथ में जल लें और संकल्प लें: “हे महादेव! मैं आज गुरु प्रदोष का व्रत रख रहा/रही हूँ। मेरी मनोकामना पूर्ण करें।” पूरे दिन मन ही मन “ऊँ नम: शिवाय ” का जप करें।

2. स्नान (Bath)

गुरु प्रदोष काल (शाम 6 बजे) से पहले दोबारा स्नान करके साफ कपड़े पहनें (सफेद, लाल या पीला रंग शुभ है, काला नहीं)।

3. प्रदोष काल की तैयारी (Evening Preparation)

पूरे दिन निराहार रहें। व्रती को चाहिये की शाम को दुबारा स्नान कर स्वच्छ श्वेत वस्त्र धारण कर लें। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में मंडप सजाएं और शिवलिंग स्थापित करें या फिर अपने नजदीक किसी शिवालय (शिव मंदिर) चले जाये। कुश के आसन पर बैठ कर शिव जी की पूजा विधि-विधान से करें।

4. महा-अभिषेक (Maha Abhishek)

यह पूजा का मुख्य भाग है।

  • कलश अथवा लोटे में शुद्ध जल भर लें। “ऊँ नम: शिवाय” कहते हुए शिव जी को जल अर्पित करें।
  • इसके बाद कच्चा दूध, दही, घी, शहद और शक्कर को एक एक करके बारी-बारी से अभिषेक करें।
  • अभिषेक करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का लगातार जाप करते रहे।

यदि संभव हो तो पांच रंगों से रंगोली बनाकर मंडप तैयार करें। अभिषेक करने के बाद इसके बाद दोनों हाथ जो‌ड़कर शिव जी का ध्यान करें। ध्यान का स्वरूप- करोड़ों चंद्रमा के समान कांतिवान, त्रिनेत्रधारी, मस्तक पर चंद्रमा का आभूषण धारण करने वाले पिंगलवर्ण के जटाजूटधारी, नीले कण्ठ तथा अनेक रुद्राक्ष मालाओं से सुशोभित, वरदहस्त, त्रिशूलधारी, नागों के कुण्डल पहने, व्याघ्र चर्म धारण किये हुए, रत्नजड़ित सिंहासन पर विराजमान शिव जी हमारे सारे कष्टों को दूर कर सुख समृद्धि प्रदान करें।

5. श्रृंगार और अर्पण

  • शिवलिंग पर त्रिपुंड (चंदन) लगाएं।
  • बेलपत्र (चिकना हिस्सा नीचे करके), धतूरा और सफेद फूल आदि को चढ़ाएं।
  • माता पार्वती को सुहाग की सामग्री और लाल चुनरी अर्पित करें।

6. कथा और आरती

एक दीपक घी का जलाएं (शिवजी के लिए) जलाकर गुरु प्रदोष व्रत कथा को पढ़ें (जिसका लिंक नीचे दिया गया है)। अंत में कपूर जलाकर हवन सामग्री मिलाकर 11 या 21 या 108 बार “ऊँ ह्रीं क्लीं नम: शिवाय स्वाहा” मंत्र से आहुति दें। उसके बाद शिव जी की आरती करें। उपस्थित जनों को आरती दें। सभी को प्रसाद वितरित करें। उसके बाद भोजन करें। भोजन में केवल मीठी सामग्रियों का उपयोग करें।

7. क्षमा प्रार्थना और पारण

आरती के बाद अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें। रात में पूजा संपन्न होने के बाद मीठा भोजन (खीर या फलाहार) ग्रहण करके अपना गुरु प्रदोष व्रत खोलें।

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🌟 गुरु प्रदोष व्रत उद्यापन की संपूर्ण विधि, सामग्री और नियम | Guru Pradosh Udyapan Vidhi: A Complete Step-by-Step Guide (with Samagri List)

➤ स्कंद पुराण के अनुसार व्रती को कम-से-कम 11 अथवा 26 गुरु त्रयोदशी व्रत के बाद उद्यापन करना चाहिये। उद्यापन के एक दिन पहले( यानी द्वादशी तिथि को) श्री गणेश भगवान का विधिवत षोडशोपचार विधि से पूजन करें तथा पूरी रात शिव-पार्वती और श्री गणेश जी के भजनों के साथ जागरण करें। उद्यापन के दिन प्रात:काल उठकर नित्य क्रमों से निवृत हो जायें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा गृह को शुद्ध कर लें। पूजा स्थल पर रंगीन वस्त्रों और रंगोली से मंडप बनायें। मण्डप में एक चौकी अथवा पटरे पर शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। अब शिव-पार्वती की विधि-विधान से पूजा करें। भोग लगायें। गुरु त्रयोदशी प्रदोष व्रत कथा सुने अथवा सुनायें।

➤ अब हवन के लिये सवा किलो (1.25 किलोग्राम) आम की लकड़ी को हवन कुंड में सजायें। हवन के लिये गाय के दूध में खीर बनायें। हवन कुंड का पूजन करें। दोनों हाथ जोड़कर हवन कुण्ड को प्रणाम करें। अब अग्नि प्रज्वलित करें। तदंतर शिव-पार्वती के उद्देश्य से खीर से ‘ऊँ उमा सहित शिवाय नम:’ मंत्र का उच्चारण करते हुए 108 बार आहुति दें। हवन पूर्ण होने के पश्चात् शिव जी की आरती करें। ब्राह्मणों को सामर्थ्यानुसार दान दें एवं भोजन करायें।

➤ आप अपने इच्छानुसार एक या दो या पाँच ब्राह्मणों को भोजन एवं दान करा सकते हैं। यदि भोजन कराना सम्भव ना हो तो किसी मंदिर में यथाशक्ति दान करें। इसके बाद बंधु बांधवों सहित प्रसाद ग्रहण करें एवं भोजन करें।

➤ इस प्रकार उद्यापन करने से व्रती पुत्र-पौत्रादि से युक्त होता है तथा आरोग्य लाभ होता है। इसके अतिरिक्त वह अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है एवं सम्पूर्ण पापों से मुक्त होकर शिवधाम को पाता है। खोये हुए धन की प्राप्ति करता है और जीवन में सफलता प्राप्त करता है।

संपर्क करें- पंडित ललित त्रिवेदी (+91-9667189678)

किसी भी प्रकार के ज्योतिष एवं वास्तु संबंधी परामर्श के लिए वास्तु ज्योतिष पंडित ललित त्रिवेदी से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, जैसे कि धन, स्वास्थ्य, व्यापार, करियर, नौकरी आदि जैसी समस्याएं। वास्तु विजिट भी करवा सकते हैं, तथा वास्तु परामर्श भी प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी प्रकार के विवाह मुहूर्त, गृह प्रवेश या अन्य सभी प्रकार के मुहूर्त एवं शुभ समय निकलवाने के लिए तुरंत संपर्क करें।

गुरु प्रदोष व्रत पूजा 2026 (Benefits of Guru Pradosh Vrat)

  • गुरु प्रदोष: इस गुरुवारा प्रदोष कहते हैं। इससे आपक बृहस्पति ग्रह शुभ प्रभाव तो देता ही है।
  • पितरों का आशीर्वाद: इसे करने से पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।
  • शत्रु विनाश: अक्सर यह प्रदोष शत्रु एवं खतरों के विनाश के लिए किया जाता है।
  • सफलता प्राप्ति: यह हर तरफ की सफलता के लिए भी रखा जाता है।

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🌟 ज्योतिषीय रहस्य: 2026 में शिव कृपा के लिए विशेष उपाय

कोटपूतली-बहरोड़ के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी स्पष्ट करते हैं कि गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है। जब गुरु प्रदोष का संयोग बनता है, तो यह कुंडली के ‘गुरु चांडाल दोष’ और विवाह में आ रही अड़चनों को भस्म करने का सबसे सटीक समय होता है।

साल 2026 में अपने करियर को सुरक्षित करने, समाज में अपार मान-सम्मान पाने और भगवान शिव का साक्षात आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए ‘कालाग्नि रुद्र’ का स्वरूप ‘5 मुखी रुद्राक्ष’ (5 Mukhi Rudraksha) धारण करना एक अमोघ अस्त्र है। यह रुद्राक्ष व्यक्ति के मन को शांत करता है और बंद किस्मत के ताले खोल देता है।

⚠️ गुरु प्रदोष व्रत में भूलकर भी न करें ये 3 गलतियां

  1. दिन में सोना वर्जित: प्रदोष व्रत के दिन व्रती को दिन में बिल्कुल नहीं सोना चाहिए। दिन भर भगवान शिव के मंत्रों का मानसिक जाप करना चाहिए।
  2. तुलसी का प्रयोग न करें: भगवान शिव की पूजा में या उनके भोग में कभी भी तुलसी के पत्तों का प्रयोग नहीं किया जाता। शिव जी को केवल बेलपत्र ही प्रिय है।
  3. शिवलिंग की पूरी परिक्रमा: कभी भी शिवलिंग की पूरी परिक्रमा न करें। हमेशा ‘अर्ध-परिक्रमा’ (आधी परिक्रमा) ही की जाती है, क्योंकि जलहरी (जहाँ से जल गिरता है) को लांघना शास्त्रों में वर्जित माना गया है।

इसे भी पढ़ेंगुरु प्रदोष व्रत कथा: जानें पौराणिक कथा और महत्व

Guru Pradosh Puja Vidhi 2026 ❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: क्या नौकरीपेशा लोग बिना व्रत रखे शाम को पूजा कर सकते हैं?

Ans: जी हाँ! यदि आप दिनभर निर्जला या फलाहारी व्रत नहीं रख सकते, तो भी कल शाम प्रदोष काल (06:30 से 08:54 PM) में शिव जी का अभिषेक करके आप उनकी अपार कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

Q2: बेलपत्र न मिले तो क्या करें?

Ans: यदि आपको ताजे बेलपत्र नहीं मिल पा रहे हैं, तो आप मंदिर में शिवलिंग पर पहले से चढ़े हुए बेलपत्र को धोकर पुनः भगवान शिव को अर्पित कर सकते हैं।

Q3: क्या महिलाएं शिवलिंग को स्पर्श कर सकती हैं?

Ans: कुंवारी कन्याएं और सुहागिन महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर जल और पंचामृत अर्पित कर सकती हैं। इसमें कोई दोष नहीं है।

निष्कर्ष: गुरु प्रदोष का व्रत और प्रदोष काल में की गई शिव पूजा व्यक्ति के जीवन के सभी कष्टों को मिटाकर उसे अपार ऐश्वर्य प्रदान करती है। Freeupay.in पर बताई गई इस विधि से साल 2026 के सभी गुरु प्रदोष पर पूजा संपन्न करें, महादेव आपकी हर मनोकामना पूर्ण करेंगे।

अभी शेयर करें: शिव पूजा की यह प्रामाणिक और सटीक विधि किसी अन्य शिवभक्त के भी काम आ सकती है। इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने परिवार और WhatsApp ग्रुप्स में तुरंत शेयर करें!

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