Vat Savitri Vrat Puja Vidhi: हम यहाँ आपको वट सावित्री व्रत की संपूर्ण पूजा विधि के बारे में विस्तार के साथ बताने जा रहे हैं। यह तो आप सब जानते हैं, की वट सावित्री व्रत को केवल सुहागिन महिला अपने पति के लिए रखती हैं।
Vat Savitri Vrat Puja Vidhi: वट सावित्री व्रत की संपूर्ण पूजा विधि और सामग्री लिस्ट, यहाँ जानें सही तरीका
हमारी वेबसाइट FreeUpay.in (फ्री उपाय.इन) में रोजाना आने वाले व्रत त्यौहार की जानकारी के अलावा मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, साधना, व्रत कथा, ज्योतिष उपाय, लाल किताब उपाय, स्तोत्र आदि महत्वपूर्ण जानकारी उबलब्ध करवाई जाएगी सभी जानकारी का अपडेट पाने के लिए दिए गये हमारे WhatsApp Group Link (व्हात्सप्प ग्रुप लिंक) क्लिक करके Join (ज्वाइन) कर सकते हैं।
हर समस्या का फ्री उपाय (Free Upay) जानने के लिए हमारे WhatsApp Channel (व्हात्सप्प चैनल) से जुड़ें: यहां क्लिक करें (Click Here)

वट सावित्री व्रत सौभाग्य को देने वाला और संतान की प्राप्ति में सहायता देने वाला व्रत माना गया है। भारतीय संस्कृति में यह व्रत आदर्श नारीत्व का प्रतीक बन चुका है। इस व्रत की तिथि को लेकर भिन्न मत हैं। स्कंद पुराण तथा भविष्योत्तर पुराण के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को यह व्रत करने का विधान है, वहीं निर्णयामृत आदि के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या को व्रत करने की बात कही गई है। वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की त्रयोदशी तिथि से शुरू होकर लगातार तीन दिन तक बनाया जाता हैं। यानी की ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि के दिन समाप्त होता हैं।
ऑनलाइन सलाह (Online): कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन (Call Button) पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।
महत्वपूर्ण जानकारी: एक सिद्ध किया हुआ असली रूद्राक्ष आपकी दशा और दिशा दोनों बदल सकता हैं? अभी यहां से खरीदें
ऑफलाइन सलाह (Offline): कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए हमसे मिलने के लिए यहाँ तुरंत सम्पर्क करें: क्लिक हियर (Click Here)।
इस व्रत में माता सावित्री, भगवान सत्यवान और त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) के प्रतीक ‘वट वृक्ष’ (बरगद के पेड़) की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, यदि वट सावित्री की पूजा सही विधि-विधान और संपूर्ण सामग्री के साथ न की जाए, तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। Freeupay.in के इस विशेष लेख में विस्तार से जानिए वट सावित्री व्रत की संपूर्ण पूजा विधि (Vat Savitri Vrat Puja Vidhi Step-by-Step) और आवश्यक सामग्री की पूरी लिस्ट।
🛍️ क्विक लिस्ट: वट सावित्री व्रत की संपूर्ण पूजा सामग्री (Samagri List)
वट सावित्री व्रत पूजा सामग्री लिस्ट (Checklist) को सेव कर लें। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है:
| पूजा सामग्री (Puja Item) | उपयोग और महत्व (Significance) |
| सत्यवान-सावित्री की मूर्ति | मिट्टी या तांबे की बनी हुई मूर्ति या तस्वीर। |
| कच्चा सूत (सफेद या लाल धागा) | वट वृक्ष की परिक्रमा करते समय पेड़ पर लपेटने के लिए। |
| भीगे हुए काले चने | यह यमराज और सत्यवान के प्राणों का प्रतीक माना जाता है। |
| बांस का पंखा (Bans ka Pankha) | वट वृक्ष और माता सावित्री को हवा करने के लिए। |
| बरगद की कोपलें (पत्ते) | पूजा के दौरान इसे जल के साथ निगलने का विधान है। |
| अन्य सामग्री | रोली, सिंदूर, अक्षत (चावल), सुहाग का सामान (चूड़ी, बिंदी आदि), फल, फूल, कलश, धूप-दीप और मिठाई। |
🕉️ वट सावित्री व्रत पूजा की Step-by-Step विधि (How to do Puja)
इस व्रत का 100% शुभ फल पाने के लिए वट वृक्ष के नीचे जाकर इस सटीक विधि (Vat Savitri Vrat Puja Vidhi) से पूजा संपन्न करें:
सलाह: कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।
महत्वपूर्ण जानकारी: आपकी समस्या के अनुसार सिद्ध किये गये असली रूद्राक्ष यहां से खरीदें
चरण 1: संकल्प और श्रृंगार
सबसे पहले व्रती को सुबह जल्दी सूर्योदय से पूर्व उठकर नित्य कर्म से निवृत होकर स्नान आदि करें। इसके बाद लाल, पीले या फिर हरे रंग के शुभ वस्त्र को पहनकर ‘सोलह श्रृंगार’ (Solah Shringar) करें। अपने घर के पूजा स्थल (मंदिर) में जाकर दीप जलाकर निर्जला या फलाहारी व्रत रखने का संकल्प लें।
चरण 2: वट वृक्ष के पास आसन ग्रहण करना
इसके बाद ऊपर बताई गई सामग्री सहित पूजा की थाली को तैयार करके अपने पास किसी पुराने वट वृक्ष (बरगद के पेड़) के पास चले जाएं। पेड़ के नीचे साफ सफाई करके आसन को बिछाकर बैठ जाये और फिर वट के समीप जाकर जल का आचमन लेकर कहे-ज्येष्ठ मात्र कृष्ण पक्ष त्रयोदशी अमुक वार में मेरे पुत्र और पति की आरोग्यता के लिए एव जन्म-जन्मान्तर में भी मैं विधवा न होऊं इसलिए सावित्री का व्रत करती हूं। यदि आपका घर से बाहर जाना संभव न हो, तो अपने घर में ही बरगद की एक टहनी लाकर उसे गमले में लगाकर पूजा अर्चना की जा सकती है।
चरण 3: जल और सुहाग सामग्री अर्पित करना
कहा जाता हैं, की वट के मूल में ब्रह्म, मध्य में जर्नादन, अग्रभाग में शिव और समग्र में सावित्री है। हे वट! अमृत के समान जल से मैं तुमको सींचती हूं। ऐसा कहकर वट वृक्ष की जड़ में शुद्ध जल से भरे तांबे के लोटे को अर्पित करें। इसके बाद पेड़ (वट) पर रोली, कुमकुम, हल्दी और चंदन का तिलक लगाएं। और माता सावित्री का ध्यान करते हुए गंध, पुष्प तथा अक्षत से पूजन करके उन्हें सुहाग का सामान (चूड़ियां, सिंदूर, लाल चुनरी) आदि अर्पित करें। अपनी मांग में भी सिंदूर को भरें। और सावित्री को नमस्कार कर प्रदक्षिणा करे।
चरण 4: कच्चे सूत से परिक्रमा (सबसे महत्वपूर्ण)
इसके बाद अपने हाथ में एक कच्चा सूत (धागा) लें और वट वृक्ष की 5, 7, 11, 21, 51 या 108 बार परिक्रमा करते हुए सूत को पेड़ के तने पर लपेटते हुए जाएं। यह लपेटे हुआ धागा पति-पत्नी के अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है।
चरण 5: काले चने और बांस के पंखे का प्रयोग
वट वृक्ष की परिक्रमा करने के बाद भगवान को भीगे हुए काले चने, मौसमी फल (जैसे आम, लीची) और गुड़-चने का प्रसाद चढ़ाएं। इसके बाद बांस के पंखे से वट वृक्ष और माता सावित्री को हवा करें।
चरण 6: व्रत कथा श्रवण और उद्यापन
वट वृक्ष के नीचे बैठकर सत्यवान और सावित्री की संपूर्ण व्रत कथा पढ़ें या किसी अन्य महिला से सुनें। कथा के बिना व्रत का कोई फल नहीं मिलता। पूजा के अंत में वट वृक्ष की आरती करें और अपनी सास (Mother-in-law) को सुहाग का सामान व काले चने देकर उनके चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लें।
संपर्क करें- पंडित ललित त्रिवेदी (+91-9667189678)
किसी भी प्रकार के ज्योतिष एवं वास्तु संबंधी परामर्श के लिए वास्तु ज्योतिष पंडित ललित त्रिवेदी से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, जैसे कि धन, स्वास्थ्य, व्यापार, करियर, नौकरी आदि जैसी समस्याएं। वास्तु विजिट भी करवा सकते हैं, तथा वास्तु परामर्श भी प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी प्रकार के विवाह मुहूर्त, गृह प्रवेश या अन्य सभी प्रकार के मुहूर्त एवं शुभ समय निकलवाने के लिए तुरंत संपर्क करें।
🌟 वट सावित्री व्रत पूजा के लाभ (Benefits of Vat Savitri Vrat Puja)
वट सावित्री व्रत करने से पतिव्रत स्त्री की पति की लम्बी आयु होती हैं साथ ही साथ उसके पुत्र की प्राप्ति और पुत्र की लम्बी आयु होती हैं।
जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?
सलाह: कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।
🌟 दांपत्य जीवन के लिए ज्योतिषीय रहस्य (विशेष उपाय)
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य और वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि वट वृक्ष साक्षात त्रिदेवों का स्वरूप है। जो सुहागिन महिला पूर्ण निष्ठा से इसकी पूजा करती है, उसके पति पर आने वाला बड़े से बड़ा संकट भी टल जाता है।
यदि पति-पत्नी के बीच अक्सर मनमुटाव रहता है, स्वास्थ्य खराब रहता है या दांपत्य जीवन में किसी बाहरी ‘नजर दोष’ का प्रभाव है, तो इस पवित्र दिन साक्षात भगवान शिव और माता पार्वती का स्वरूप ‘गौरी-शंकर रुद्राक्ष’ (Gauri Shankar Rudraksha) गले में धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है। यह अमोघ ज्योतिषीय उपाय पति-पत्नी के बीच शिव-पार्वती जैसा अटूट और अमर प्रेम स्थापित करता है।
⚠️ पूजा के दौरान न करें ये 3 गलतियां (Strict Rules)
- काले और सफेद वस्त्रों का निषेध: पूजा के दिन महिलाओं को भूलकर भी काले (Black), नीले या पूर्ण सफेद रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। हमेशा लाल, पीला, हरा या गुलाबी रंग ही चुनें।
- वट वृक्ष को नुकसान न पहुँचाएं: परिक्रमा करते समय या पूजा करते समय पेड़ की टहनियों या पत्तों को बेवजह तोड़ना या नुकसान पहुँचाना अशुभ माना जाता है।
- कथा के बीच में न उठें: जब सत्यवान-सावित्री की व्रत कथा चल रही हो, तो बीच में किसी से बात नहीं करनी चाहिए और न ही अपनी जगह से उठना चाहिए।
Vat Savitri Vrat Puja Vidhi 2026❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: वट सावित्री व्रत में बरगद की कोपल (कली) क्यों निगली जाती है?
Ans: मान्यता है कि पूजा के बाद बरगद की नई कोपल (छोटा पत्ता) और 5 काले चने पानी के साथ बिना चबाए निगलने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
Q2: क्या पीरियड्स (मासिक धर्म) में वट सावित्री की पूजा कर सकते हैं?
Ans: पीरियड्स के दौरान महिलाओं को स्वयं पूजा की सामग्री को स्पर्श नहीं करना चाहिए। आप व्रत रख सकती हैं और दूर बैठकर किसी अन्य महिला से पूजा करवा सकती हैं और कथा सुन सकती हैं।
Q3: वट सावित्री का व्रत कैसे खोला जाता है (Parana)?
Ans: पूजा समाप्त होने और सास का आशीर्वाद लेने के बाद, प्रसाद के रूप में चढ़ाए गए भीगे हुए काले चने और फल खाकर ही इस व्रत का पारण (व्रत खोलना) किया जाता है।
निष्कर्ष: वट सावित्री व्रत एक सुहागिन स्त्री के प्रेम, समर्पण और विश्वास का सबसे बड़ा प्रतीक है। Freeupay.in पर बताई गई इस शास्त्र-सम्मत पूजा विधि का पालन करें। माता सावित्री आपके दांपत्य जीवन को हमेशा खुशहाल और सुरक्षित रखेंगी।
अभी शेयर करें: वट सावित्री पूजा की यह संपूर्ण और सटीक विधि आपकी सहेलियों और रिश्तेदारों के बहुत काम आ सकती है। इसे अपने सभी WhatsApp ग्रुप्स में तुरंत शेयर करें!
वैदिक उपाय और 30 साल फलादेश के साथ जन्म कुंडली बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े
10 वर्ष के उपाय के साथ अपनी लाल किताब की जन्मपत्री बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े
