Shani Jayanti Puja Vidhi 2026: यह तो आप सब जानते हो की हमारे हिन्दू धर्म के ग्रंथों के अनुसार शनिदेव को ग्रहों में न्यायाधीश का पद प्राप्त है। इन्हें न्याय के देवता कहा जाता हैं। जातक के अच्छे और बुरे कर्मों का फ़ल शनिदेव ही देते हैं। जिस भी व्यक्ति पर शनिदेव की टेड़ी नजर पड़ जाए, वह थोड़े ही समय में राजा से रंक बन जाता है और जिस पर शनिदेव प्रसन्न हो जाएं वह मालामाल भी हो जाता है। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को सूर्यास्त के समय शिंगणापुर नगर में शनिदेव की उत्पत्ति हुई थी।
Shani Jayanti Puja Vidhi 2026: शनि जयंती पर इस अचूक विधि से करें पूजा, जीवन से हमेशा के लिए दूर होगी दरिद्रता
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हर साल को ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि के दिन में शनिदेव का जन्मोत्सव यानी ‘शनि जयंती’ (Shani Jayanti) मनाई जाती है। यह दिन विशेष रूप से उन सब लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं बताई गई है, जिनकी कुंडली में किसी प्रकार का कोई शनि दोष या फिर वर्तमान में चल रही शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव चल रहा हो।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, साल 2026 में शनि जयंती के दिन सही विधि-विधान से पूजा करने और दान-पुण्य करने से शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के सभी कष्ट, रोग और आर्थिक तंगी हमेशा के लिए समाप्त हो जाते हैं। Freeupay.in के इस विशेष लेख में विस्तार से जानिए शनि जयंती की संपूर्ण पूजा विधि, सामग्री लिस्ट और कुछ अचूक उपाय।
🕰️ शनि जयंती 2026 का सटीक ‘पूजा विधि’ (Shani Jayanti Puja Vidhi)
हिन्दू पंचांग और वैदिक गणनाओं के अनुसार, 16 मई को शनि जयंती पूजा विधि की जाएगी:
| विवरण (Event details) | तारीख और सटीक समय (Date & Exact Time) |
| शनि जयंती | 16 मई 2026 (शनिवार) |
| अमावस्या तिथि आरंभ | 15 मई, सुबह 08:32 बजे से |
| अमावस्या तिथि समाप्त | 16 मई, दोपहर 0130 बजे तक |
🪔 क्विक लिस्ट: शनि जयंती पूजा सामग्री (Samagri List)
शनि जयंती पूजा सामग्री लिस्ट (Checklist) सेव कर लें। इसके बिना शनिदेव की पूजा अधूरी मानी जाती है:
| पूजा सामग्री (Puja Item) | महत्व (Significance) |
| सरसों का तेल (Mustard Oil) | शनिदेव का अभिषेक करने और दीपक जलाने के लिए। |
| फोटो एवं प्रतिमा | शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर |
| काले तिल और उड़द दाल | शनिदेव को अत्यंत प्रिय हैं, इन्हें अर्पित करने से दोष कटते हैं। |
| लोहे की कील या छल्ला | लोहे का दान शनि पूजा में सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। |
| नीले फूल और शमी के पत्ते | अपराजिता के नीले फूल और शमी पत्र शनिदेव को विशेष रूप से चढ़ाए जाते हैं। (नीले या काले पुष्प की माला और पुष्प) |
| दीपक | शुद्ध घी व तेल का दीपक |
| काला कपड़ा | शनिदेव को वस्त्र के रूप में अर्पित करने के लिए। |
| अन्य सामग्री | पंचगव्य, पंचामृत, इत्र, अबीर, गुलाल, सिंदूर, कुमकुम, काजल, श्री फल, काले चने, गुड़, धूप-दीप, कपूर और शनि आरती, चालीसा की पुस्तक। |
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🕰️ शनि जयंती पूजा मुहूर्त 2026 (Choghadiya Muhurat 16 मई 2026)
16 मई को नीचे बताये गये समय पर शनि जयंती पूजा विधि कर सकते है:
| मुहूर्त का प्रकार (Muhurat Type) | समय (Time) | स्थिति (Status) |
| सुबह का मुहूर्त (Shubh Choghadiya) | सुबह 07:20 से 09:01 बजे तक | ✅ उत्तम |
| सुबह का मुहूर्त (Char Choghadiya) | दोपहर 12:23 बजे से 14:05 बजे तक | ✅ सामान्य |
| दोपहर का मुहूर्त (Labh Choghadiya) | दोपहर 14:05 बजे से 15:46 बजे तक | ✅ शुभ एवं उन्नति |
| दोपहर का मुहूर्त (Amrut Choghadiya) | दोपहर 15:46 बजे से 17:27 बजे तक | ✅ सर्वोत्तम |
| सांय का मुहूर्त (Labh Choghadiya) | सांय 19:08 बजे से 20:27 बजे तक | ✅ उत्तम |
| अभिजीत मुहूर्त (Abhijit Muhurat) | दोपहर 11:56 बजे से 12:50 बजे तक | 🌟 सर्वश्रेष्ठ |
| राहुकाल (Rahu Kaal) | सुबह 09:01 बजे से 10:42 बजे तक | ❌ वर्जित (पूजा न करें) |
🕉️ शनि जयंती पूजा की Step-by-Step विधि (How to do Puja)
शनिदेव की पूजा हमेशा सूर्यास्त के बाद (प्रदोष काल में) या सुबह जल्दी करनी चाहिए। शनि जयंती के दिन शनि मंदिर में जाकर इस अचूक विधि से पूजा संपन्न करें:
चरण 1: स्नान और संकल्प
शनि जयंती के दिन व्यक्ति को सूर्योदय से पहले सुबह जल्दी उठकर शौचादि से निवृत होकर नहाने के पानी में थोड़े से काले तिल डालकर स्नानादि करके स्वच्छ नीले या काले रंग के वस्त्र को धारण करके शनिदेव की पूजा करने या उपवास रखने का संकल्प लें।
चरण 2: पूजा विधि
अपने सामने चोकी रखकर उस पर काला कपड़ा बिछाकर श्री शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर या फिर एक सुपारी रखकर पश्चिम मुखी होकर काले आसन पर बैठ जाये। इसके बाद पंचगव्य, पंचामृत, इत्र आदि से स्नान आदि करवायें।
चरण 3: तेल का दीपक
उसके बाद फिर दोनों तरह शुद्ध घी व सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाकर धूप जलाएं। इसके बाद अबीर, गुलाल, सिंदूर, कुमकुम व काजल लगाकर नीले या काले फूल अर्पित करें। तत्पश्चात इमरती व तेल में तली वस्तुओं का नैवेद्य अपर्ण करें। इसके बाद श्री फल सहित अन्य फल भी अर्पित करें।
चरण 4: मंत्र जाप एवं आरती
आपको भगवान शनि देव की पंचोपचार पूजन के बाद दिए गये नीचे दिए गए शनि देव मंत्र का जाप करें।
“ॐ शनैश्चराय नमः”।
शनि मंत्र की कम से कम एक माला का जाप करें। माला जपने के पश्चात श्री शनि चालीसा का पाठ करें व उसके बाद श्री शनि देव की आरती भी उतारे।
चरण 5: सरसों के तेल का अभिषेक
सूर्यास्त होने के बाद किसी प्राचीन शनि मंदिर या फिर पीपल के पेड़ के पास जाएं। शनिदेव की मूर्ति पर लोहे या स्टील के पात्र से सरसों के तेल का अभिषेक करें। ध्यान रहे: तांबे के लोटे से शनिदेव पर तेल या जल नहीं चढ़ाना चाहिए।
चरण 6: सामग्री अर्पण
अभिषेक के बाद शनिदेव को काले तिल, काली उड़द की दाल, गुड़ और लोहे की कील अर्पित करें। उन्हें काले रंग का वस्त्र पहनाएं। इसके बाद अपराजिता के नीले फूल और शमी के पत्ते चढ़ाते हुए “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का लगातार जाप करें।
चरण 7: दीपक प्रज्वलित करना
शनिदेव के सामने सरसों के तेल का एक चौमुखी दीपक जलाएं। दीपक में थोड़े से काले तिल अवश्य डालें। इसके बाद वहीं बैठकर ‘शनि चालीसा’ (Shani Chalisa) और ‘शनि स्तोत्र’ का पाठ करें।
चरण 8: छाया दान और आरती (सबसे महत्वपूर्ण)
शनि जयंती के दिन ‘छाया दान’ का विशेष महत्व है। एक कटोरी में सरसों का तेल लें, उसमें अपना चेहरा देखें और उस तेल को मंदिर में या किसी ज़रूरतमंद को दान कर दें। अंत में शनिदेव की आरती करें और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें।
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🌟 ज्योतिषीय रहस्य: 2026 में शनि दोष शांति के विशेष उपाय
कोटपूतली-बहरोड़ के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि शनिदेव केवल उन्हीं को कष्ट देते हैं जिनके कर्म खराब होते हैं। जब शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या भयंकर रूप ले लेती है, तो व्यक्ति का व्यापार ठप हो जाता है और कर्ज का बोझ बढ़ जाता है।
साल 2026 में शनि के सभी अशुभ प्रभावों को पूर्ण रूप से भस्म करने, कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय पाने और व्यापार में अचानक धन लाभ के लिए साक्षात शनिदेव का स्वरूप ‘7 मुखी रुद्राक्ष’ (7 Mukhi Rudraksha) गले में धारण करना सबसे शक्तिशाली ज्योतिषीय ‘कवच’ है। यह रुद्राक्ष शनि जयंती के दिन धारण करने से इसका प्रभाव हजार गुना बढ़ जाता है।
⚠️ शनि पूजा में भूलकर भी न करें ये 3 गलतियां (Strict Rules)
- आंखों में आंखें न डालें: शास्त्रों के अनुसार, शनिदेव की पूजा करते समय कभी भी उनकी आंखों में सीधा नहीं देखना चाहिए। हमेशा उनकी मूर्ति के पैरों (चरणों) की तरफ देखकर ही पूजा करनी चाहिए।
- पीठ दिखाकर न लौटें: पूजा समाप्त होने के बाद कभी भी शनिदेव को पीठ दिखाकर वापस न लौटें। हमेशा कुछ कदम पीछे हटें और फिर मुड़कर मंदिर से बाहर आएं।
- लाल रंग का परहेज: शनिदेव की पूजा में भूलकर भी लाल रंग के वस्त्र, लाल फूल या लाल कुमकुम का प्रयोग न करें। लाल रंग मंगल का है और शनि-मंगल का टकराव भयंकर क्लेश पैदा करता है।
निष्कर्ष: शनि जयंती का पवित्र दिन शनिदेव को प्रसन्न करने और अपने जीवन के सभी कष्टों को दूर करने का सबसे सुनहरा अवसर है। Freeupay.in पर बताई गई इस विधि और नियमों का पालन करें। शनिदेव की कृपा से आपका जीवन सुख, शांति और समृद्धि से भर जाएगा।
अभी शेयर करें: शनि जयंती की यह महत्वपूर्ण और अचूक पूजा विधि किसी अन्य भक्त के भी बहुत काम आ सकती है। इस जानकारी को अपने परिवार और सभी WhatsApp ग्रुप्स में तुरंत शेयर करें!
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