Sanatan Dharma Sukh Samridhi Panchdev Puja: हमारे हिंदू यानि की सनातन धर्म ग्रंथों में 33 कोटि देवी-देवताओं का वर्णन पढ़ने को मिलता है, पंरतु क्या आप जानते हैं कि हमारे हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार ‘दैनिक पूजा’ (Daily Worship) में मुख्य रूप से केवल 5 देवी और देवताओं को ही अनिवार्य माना गया है?
Sanatan Dharma Panchdev: सनातन धर्म के ये 5 देवता देते हैं सुख-समृद्धि, जीवन में कभी नहीं होती धन की कमी
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धर्म ग्रंथों में महर्षि वेदव्यास और आदि शंकराचार्य जी के द्वारा प्रत्येक गृहस्थ जीवन बिताने वाले लोगों के लिए ‘पंचायतन पूजा’ (Panchayatana Puja) करने का विधान बताया गया है। जो भी व्यक्ति रोज़ाना नियमित रूप से अपने घर के पूजा स्थल (मंदिर) में इन ‘पंचदेव’ (5 Deities) की पूजा आराधना करता है, उसके घर में कभी दरिद्रता, रोग या कलह प्रवेश नहीं कर सकते हैं। Freeupay.in के इस विशेष लेख में विस्तार से जानिए कि ये 5 देवी और देवता कौन हैं और इनकी पूजा करने से क्या-क्या लाभ मिलते हैं।
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🌸 क्विक लिस्ट: सनातन धर्म के ‘पंचदेव’ (Sukh Samridhi Ke 5 Devta)
सनातन धर्मसुख समृद्धि पंचदेव पूजा जानकारी पाने के लिए नीचे दी गई टेबल देखें:
| देवता का नाम (Deity) | किस फल की प्राप्ति होती है? (Benefits) | पूजा का मुख्य दिन (Day) |
| 1. श्री गणेश जी (Ganesha) | कार्यों में सफलता, विघ्नों का नाश और बुद्धि | बुधवार (Wednesday) |
| 2. सूर्य देव (Surya Dev) | निरोगी काया, सरकारी नौकरी, मान-सम्मान और तेज | रविवार (Sunday) |
| 3. भगवान विष्णु (Vishnu) | धन-संपत्ति (लक्ष्मी), पारिवारिक सुख और ऐश्वर्य | गुरुवार (Thursday) |
| 4. भगवान शिव (Lord Shiva) | मानसिक शांति, अकाल मृत्यु से रक्षा और मोक्ष | सोमवार (Monday) |
| 5. मां दुर्गा / शक्ति (Durga) | अपार साहस, शत्रुओं पर विजय और सुरक्षा | शुक्रवार / मंगलवार |
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🙏 जानिए सनातन धर्म के अनुसार सुख-समृद्धि देने वाले पांच देवता!
एक परम प्रभु चिदानन्दघन परम तत्त्व हैं सर्वाधार।
सर्वातीत, सर्वगत वे ही अखिल विश्वमय रुप अपार।
हरि, हर, भानु, शक्ति, गणपति हैं इनके पांच स्वरूप उदार।
मान उपास्य उन्हें भजते जन भक्त स्वरुचि श्रद्धा अनुसार। (पद-रत्नाकर)
निराकार ब्रह्म के साकार रूप हैं पंचदेव!
परब्रह्म परमात्मा निराकार व अशरीरी है, अत: साधारण मनुष्यों के लिए उसके स्वरूप का ज्ञान असंभव है । इसलिए निराकार ब्रह्म ने अपने साकार रूप में पांच देवों को उपासना के लिए निश्चित किया जिन्हें पंचदेव कहते हैं । ये पंचदेव हैं—विष्णु, शिव, गणेश, सूर्यऔर शक्ति।
आदित्यं गणनाथं च देवीं रुद्रं च केशवम्।
पंचदैवतभित्युक्तं सर्वकर्मसु पूजयेत्।।
एवं यो भजते विष्णुं रुद्रं दुर्गां गणाधिपम्।
भास्करं च धिया नित्यं स कदाचिन्न सीदति।। (उपासनातत्त्व)
अर्थात्— सूर्य, गणेश, देवी, रुद्र और विष्णु— ये पांच देव सब कामों में पूजने योग्य हैं, जो आदर के साथ इनकी आराधना करते हैं वे कभी हीन नहीं होते, उनके यश-पुण्य और नाम सदैव रहते हैं।
वेद-पुराणों में पंचदेवों की उपासना को महाफलदायी और उसी तरह आवश्यक बतलाया गया है जैसे नित्य स्नान को। इनकी सेवा से ‘परब्रह्म परमात्मा’ की उपासना हो जाती है।
🙏 अन्य देवताओं की अपेक्षा इन पांच देवों की प्रधानता ही क्यों?
अन्य देवों की अपेक्षा पंचदेवों की प्रधानता के दो कारण हैं —
१. पंचदेव पंचभूतों के अधिष्ठाता (स्वामी) हैं
पंचदेव आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी—इन पंचभूतों के अधिपति हैं।
— सूर्य वायु तत्त्व के अधिपति हैं इसलिए उनकी अर्घ्य और नमस्कार द्वारा आराधना की जाती है।
— गणेश के जल तत्त्व के अधिपति होने के कारण उनकी सर्वप्रथम पूजा करने का विधान हैं, क्योंकि सृष्टि के आदि में सर्वत्र ‘जल’ तत्त्व ही था।
— शक्ति (देवी, जगदम्बा) अग्नि तत्त्व की अधिपति हैं इसलिए भगवती देवी की अग्निकुण्ड में हवन के द्वारा पूजा करने का विधान हैं।
— शिव पृथ्वी तत्त्व के अधिपति हैं इसलिए उनकी शिवलिंग के रुप में पार्थिव-पूजा करने का विधान हैं।
— विष्णु आकाश तत्त्व के अधिपति हैं इसलिए उनकी शब्दों द्वारा स्तुति करने का विधान हैं।
२. अन्य देवों की अपेक्षा इन पंचदेवों के नाम के अर्थ ही ऐसे हैं कि जो इनके ब्रह्म होने के सूचक हैं—
विष्णु अर्थात् सबमें व्याप्त,
शिव यानी कल्याणकारी,
गणेश अर्थात् विश्व के सभी गणों के स्वामी,
सूर्य अर्थात् सर्वगत (सभी जगह जाने वाले),
शक्ति अर्थात् सामर्थ्य।
संसार में देवपूजा को स्थायी रखने के उद्देश्य से वेदव्यासजी ने विभिन्न देवताओं के लिए अलग-अलग पुराणों की रचना की। अपने-अपने पुराणों में इन देवताओं को सृष्टि को पैदा करने वाला, पालन करने वाला और संहार करने वाला अर्थात् ब्रह्म माना गया है।
जैसे विष्णुपुराण में विष्णु को, शिवपुराण में शिव को, गणेशपुराण में गणेश को, सूर्यपुराण में सूर्य को और शक्तिपुराण में शक्ति को ब्रह्म माना गया है। अत: मनुष्य अपनी रुचि के अनुसार किसी भी देव को पूजे, उपासना एक ब्रह्म की ही होती है क्योंकि पंचदेव ब्रह्म के ही प्रतिरुप (साकार रूप) हैं। उनकी उपासना या आराधना में ब्रह्म का ही ध्यान होता है और वही इष्टदेव में प्रविष्ट रहकर मनवांछित फल देते हैं। वही एक परमात्मा अपनी विभूतियों में आप ही बैठा हुआ अपने को सबसे बड़ा कह रहा है वास्तव में न तो कोई देव बड़ा है और न कोई छोटा।
एक उपास्य देव ही करते लीला विविध अनन्त प्रकार।
पूजे जाते वे विभिन्न रूपों में निज-निज रुचि अनुसार ।। (पद रत्नाकर)
पंचदेव और उनके उपासक!
विष्णु के उपासक ‘वैष्णव’ कहलाते हैं,
शिव के उपासक ‘शैव’ के नाम से जाने जाते हैं,
गणपति के उपासक ‘गाणपत्य’ कहलाते हैं,
सूर्य के उपासक ‘सौर’ होते हैं,
और शक्ति के उपासक ‘शाक्त’ कहलाते हैं।
इनमें शैव, वैष्णव और शाक्त विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।
पंचदेवों के ही विभिन्न नाम और रूप हैं अन्य देवता!!!!!
शालग्राम, लक्ष्मीनारायण, सत्यनारायण, गोविन्ददेव, सिद्धिविनायक, हनुमान, भवानी, भैरव, शीतला, संतोषीमाता, वैष्णोदेवी, कामाख्या, अन्नपूर्णा आदि अन्य देवता इन्हीं पंचदेवों के रूपान्तर (विभिन्न रूप) और नामान्तर हैं।
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पंचायतन में किस देवता को किस कोण (दिशा) में स्थापित करें?
पंचायतन विधि— पंचदेवोपासना में पांच देव पूज्य हैं। पूजा की चौकी या सिंहासन पर अपने इष्टदेव को मध्य में स्थापित करके अन्य चार देव चार दिशाओं में स्थापित किए जाते हैं । इसे ‘पंचायतन’कहते हैं। शास्त्रों के अनुसार इन पाँच देवों की मूर्तियों को अपने इष्टदेव के अनुसार सिंहासन में स्थापित करने का भी एक निश्चित क्रम है। इसे ‘पंचायतन विधि’ कहते हैं । जैसे —
विष्णु पंचायतन— जब विष्णु इष्ट हों तो मध्य में विष्णु, ईशान कोण में शिव, आग्नेय कोण में गणेश, नैऋत्य कोण में सूर्य और वायव्य कोण में शक्ति की स्थापना होगी।
सूर्य पंचायतन— यदि सूर्य को इष्ट के रूप में मध्य में स्थापित किया जाए तो ईशान कोण में शिव, अग्नि कोण में गणेश, नैऋत्य कोण में विष्णु और वायव्य कोण में शक्ति की स्थापना होगी ।
देवी पंचायतन— जब देवी भवानी इष्ट रूप में मध्य में हों तो ईशान कोण में विष्णु, आग्नेय कोण में शिव, नैऋत्य कोण में गणेश और वायव्य कोण में सूर्य रहेंगे ।
शिव पंचायतन— जब शंकर इष्ट रूप में मध्य में हों तो ईशान कोण में विष्णु, आग्नेय कोण में सूर्य, नैऋत्य कोण में गणेश और वायव्य कोण में शक्ति का स्थान होगा ।
गणेश पंचायतन— जब इष्ट रूप में मध्य में गणेश की स्थापना है तो ईशान कोण में विष्णु, आग्नेय कोण में शिव, नैऋत्य कोण में सूर्य तथा वायव्य कोण में शक्ति की पूजा होगी ।
शास्त्रों के अनुसार यदि पंचायतन में देवों को अपने स्थान पर न रखकर अन्यत्र स्थापित कर दिया जाता है तो वह साधक के दु:ख, शोक और भय का कारण बन जाता है ।
देवता चाहे एक हो, अनेक हों, तीन हों या तैंतीस करोड़ हो, उपासना ‘पंचदेवों’ की ही प्रसिद्ध है । इन सबमें गणेश का पूजन अनिवार्य है । यदि अज्ञानवश गणेश का पूजन न किया जाए तो विघ्नराज गणेशजी उसकी पूजा का पूरा फल हर लेते हैं।
🙏 विस्तार से जानें पंचदेवों की महिमा और पूजा के नियम (Worship of Panchayatan)
सनातन धर्म में इन 5 देवताओं को पंचतत्वों (जल, वायु, अग्नि, आकाश, पृथ्वी) का स्वरूप भी माना गया है। आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं:
1. श्री गणेश जी (विघ्नहर्ता)
सनातन धर्म में कोई भी शुभ कार्य या पूजा भगवान गणेश की वंदना के बिना शुरू नहीं होती।
- क्यों करें पूजा: गणेश जी को ‘बुद्धि’ और ‘शुभता’ का देवता माना जाता है। इनकी रोज़ाना पूजा करने से व्यापार और करियर में आने वाली सभी रुकावटें (विघ्न) दूर हो जाती हैं।
- पूजा नियम: रोज़ाना इन्हें दूर्वा (घास) और सिंदूर अर्पित करें।
2. सूर्य देव (प्रत्यक्ष देवता)
सूर्य देव कलियुग के एकमात्र ऐसे देवता हैं, जिनके साक्षात दर्शन हमें रोज़ाना होते हैं।
- क्यों करें पूजा: जो व्यक्ति सफलता, लीडरशिप और अच्छा स्वास्थ्य (Health) चाहता है, उसे सूर्य देव की उपासना अवश्य करनी चाहिए। यह आत्मविश्वास बढ़ाते हैं।
- पूजा नियम: रोज़ाना सुबह स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और लाल फूल डालकर सूर्य देव को ‘अर्घ्य’ दें।
3. भगवान विष्णु (पालनहार)
सृष्टि के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु और उनके अवतार (श्री राम, श्री कृष्ण) की पूजा गृहस्थों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
- क्यों करें पूजा: जहाँ विष्णु जी की पूजा होती है, वहाँ माता लक्ष्मी (धन) स्वतः ही चली आती हैं। इनकी पूजा से घर में अपार धन, सुख और ऐश्वर्य आता है।
- पूजा नियम: रोज़ाना भगवान विष्णु को ‘तुलसी दल’ और पीले फूल अर्पित करें।
4. भगवान शिव (कल्याणकारी)
महादेव बहुत ही भोले हैं और केवल एक लोटा जल से प्रसन्न हो जाते हैं।
- क्यों करें पूजा: मानसिक शांति, अज्ञात भय से मुक्ति और भयंकर बीमारियों से रक्षा के लिए भगवान शिव की पूजा अचूक है।
- पूजा नियम: रोज़ाना शिवलिंग पर जल या कच्चा दूध अर्पित करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें।
5. मां दुर्गा / शक्ति (शक्तिरूपा)
मां भवानी शक्ति, ऊर्जा और साहस की साक्षात देवी हैं।
- क्यों करें पूजा: जब जीवन में शत्रु हावी हो रहे हों या किसी सुरक्षा की आवश्यकता हो, तो मां दुर्गा की उपासना सबसे बड़ा रक्षा कवच बनती है।
- पूजा नियम: रोज़ाना माता को लाल पुष्प (गुड़हल या गुलाब) अर्पित करें और धूप-दीप दिखाएं।
🌟 वास्तु और ज्योतिषीय रहस्य: पंचदेव पूजा से कैसे कटते हैं ग्रह दोष?
वास्तु और ज्योतिष शास्त्र (Jyotish Shastra) के अनुसार, घर के मंदिर में इन पंचदेवों की स्थापना एक विशेष क्रम में करने से घर का भारी से भारी वास्तु दोष (Vastu Dosh) खत्म हो जाता है।
इन पांचों देवताओं की पूजा सीधे तौर पर नवग्रहों को नियंत्रित करती है। सूर्य की पूजा से सूर्य ग्रह, शिव की पूजा से चंद्रमा और राहु, गणेश जी से बुध, विष्णु जी से गुरु और शक्ति की पूजा से मंगल व शुक्र बलवान होते हैं।
अपनी दैनिक पूजा के पूर्ण फल और ईश्वरीय कृपा को प्राप्त करने के लिए गले में शुद्ध ‘रुद्राक्ष’ (Rudraksha) धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है। गणेश जी के लिए 8 मुखी, शिव के लिए पंचमुखी और विष्णु जी के लिए 10 मुखी रुद्राक्ष धारण करके पूजा करने से घर में असीमित ‘सकारात्मक ऊर्जा’ (Positive Energy) का संचार होता है।
⚠️ घर के मंदिर से जुड़े 3 अहम नियम (Mandir Vastu Rules)
- एक से ज्यादा मूर्तियां: घर के मंदिर में कभी भी एक देवता की 2 से अधिक मूर्तियां या तस्वीरें नहीं रखनी चाहिए।
- दिशा का ध्यान: मंदिर हमेशा घर के ‘ईशान कोण’ (North-East) में होना चाहिए और पूजा करते समय आपका मुख हमेशा पूर्व (East) दिशा की ओर होना चाहिए।
- सूखे फूल: भगवान को अर्पित किए गए फूल जैसे ही सूख जाएं, उन्हें तुरंत मंदिर से हटा देना चाहिए, अन्यथा घर में दरिद्रता आती है।
Sanatan Dharma Sukh Samridhi Panchdev Puja❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: क्या पंचदेवों की पूजा रोज़ाना करना जरूरी है?
Ans: जी हाँ, सनातन धर्म में गृहस्थों के लिए ‘पंचायतन पूजा’ (इन 5 देवताओं का स्मरण) रोज़ाना करना अनिवार्य बताया गया है। इससे घर में कभी नेगेटिव एनर्जी नहीं आती।
Q2: घर के मंदिर में इनमें से किसे मध्य (बीच) में रखें?
Ans: आप जिस देवता को अपना ‘इष्ट देव’ मानते हैं, उन्हें मध्य (बीच) में रखें और बाकी चार देवताओं को उनके चारों ओर स्थापित करें।
Q3: पूजा में सबसे पहले किसे स्मरण करें?
Ans: पूजा किसी भी देवता की हो, शुरुआत हमेशा प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के ध्यान और मंत्र से ही करनी चाहिए।
निष्कर्ष: सनातन धर्म का यह ‘पंचदेव विधान’ जीवन को हर दिशा (स्वास्थ्य, धन, बुद्धि, शांति और शक्ति) से परिपूर्ण बनाता है। आज से ही अपनी दैनिक पूजा में इन 5 देवताओं को शामिल करें। Freeupay.in की इस प्रामाणिक जानकारी को अपनाकर अपने जीवन को सुखमय बनाएं।
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