Ganga Chalisa in Hindi: गंगा चालीसा हमारे हिन्दू धर्म में गंगा नदी को माँ का दर्जा दिया गया हैं । ऋग्वेद वेद में गंगा नदी का वर्णित किया हुआ हैं। गंगा नदी में स्नान करने से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं। श्री गंगा चालीसा में गंगा नदी के बारे में बताया गया है। जो भी व्यक्ति श्री गंगा चालीसा का नियमित रूप से पाठ करता है उसके सारे पाप नष्ट हो जाते है और गंगा माँ की विशेष कृपा बनी रहती हैं। उसकी बुद्दि भी निर्मल हो जाती हैं और जीवन समाप्त होने के बाद मोक्ष को प्राप्त होता हैं। श्री गंगा चालीसा आदि के बारे में बताने जा रहे हैं।
Ganga Chalisa in Hindi: श्री गंगा चालीसा का अचूक पाठ, रोज़ाना पढ़ने से रातों-रात दूर होगी दरिद्रता
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हमारे सनातन धर्म में नदियों को पूजनीय माना जाता हैं, इस कारण से माता गंगा को केवल एक नदी नहीं माना जाता हैं, बल्कि साक्षात मोक्षदायिनी और पापों का नाश करने वाली देवी के समान पूजा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, कहा जाता हैं जिस भी घर में नित्य रूप से श्री गंगा चालीसा (Shri Ganga Chalisa) का पाठ होता है, वहां कभी भी किसी भी व्यक्ति की अकाल मृत्यु, भयंकर रोग और आर्थिक तंगी (दरिद्रता) का वास नहीं होता हैं।
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आज के तनाव भरे समय में जब हम मानसिक शांति और सफलता की तलाश में भटकते हैं, तब गंगा चालीसा की चौपाइयां हमारे जीवन में एक चमत्कार की तरह काम करती हैं। यह पाठ व्यक्ति के ‘चंद्रमा’ (Moon) को बलवान करता है और घर की सभी नकारात्मक ऊर्जाओं को बाहर निकाल फेंकता है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में पढ़ें संपूर्ण गंगा चालीसा, इसके नियम और अचूक ज्योतिषीय लाभ।
🌺 क्विक लिस्ट: गंगा चालीसा पाठ के चमत्कारिक लाभ (Ganga Chalisa Benefits)
गंगा चालीसा (Ganga Chalisa) की जानकारी पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। जानिए रोज़ाना गंगा चालीसा पढ़ने से आपके जीवन में क्या बदलाव आते हैं:
| पाठ का विवरण (Details) | श्री गंगा चालीसा पढ़ने के लाभ (Benefits) |
| भयंकर रोगों से मुक्ति | गंगा चालीसा के प्रभाव से असाध्य और पुरानी बीमारियां धीरे-धीरे खत्म होने लगती हैं। |
| पापों का नाश | इसके पाठ से जाने-अनजाने में हुए जन्म-जन्मांतर के पाप (कायिक, वाचिक और मानसिक) कट जाते हैं। |
| अपार धन और बरकत | घर में जल तत्व संतुलित होता है, जिससे रुका हुआ पैसा वापस आता है और कर्ज से मुक्ति मिलती है। |
| पाठ का सर्वोत्तम समय | रोज़ सुबह स्नान के बाद या शाम के समय (गोधूलि बेला में) पाठ करना सबसे शुभ है। |
📿 श्री गंगा चालीसा पाठ (Shri Ganga Chalisa Lyrics)
पूर्ण श्रद्धा, पवित्र मन और साफ वस्त्र धारण करके माता गंगा का ध्यान करें और इस चालीसा (Ganga Chalisa) का पाठ करें:
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॥ दोहा ॥
जय जय जननि हरन अघ खानी। आनन्द करनी गंगा भवानी॥
जय भगीरथी सुरसरि माता। कलिमल मूल दलनि विख्याता॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जय जग पावनि ट्रामी। ओम्कारिणि तारिणि बहु नामी॥
पुन्यमयी पुनीत पुनीता। पाप विनाशिनी भवभय भीता॥
जय भगीरथी सुरसरि माता। कलिमल मूल दलनि विख्याता॥
तुझको सुर मुनि किन्नर गावैं। तेरे चरण कमल सिर नावैं॥
तू है शिव की जटा निवासिनि। पापों की है तू ही विनाशिनी॥
तू है विष्णु चरण से निकली। पाप ताप हरने को विकली॥
जो जन तेरा नाम ध्यावे। सो जन निश्चय भव तर जावे॥
तू है त्रिपथगामिनी माता। तू ही है जग की भाग्य विधाता॥
तेरे जल का है यह प्रताप। कट जाते हैं जन्मों के पाप॥
तू है स्वर्ग की सीढ़ी प्यारी। महिमा तेरी है अति न्यारी॥
जो कोई तेरा गोता लावे। वह तो सीधा सुरपुर जावे॥
कष्ट हरे तू सब जीवों के। दूर करे दुख सब दीनों के॥
तेरी धारा अति ही निर्मल। जो नहावे हो जावे शीतल॥
तू है सबकी तारनहारी। तेरी महिमा है अति भारी॥
सगर सुतों को तूने तारा। उनका किया है भव निस्तारा॥
भगीरथ की तू है तपस्या। तू ही सुलझावे हर समस्या॥
तेरे जल में जो भस्म सिरावे। पितरों को वह स्वर्ग दिलावे॥
रोग शोक सब दूर भगावे। जो जन तेरा दर्शन पावे॥
जो कोई गंगा जल पी जावे। परम मोक्ष को वह जन पावे॥
कलियुग में तू है एक आस। तेरे बिना है जग उदास॥
गंगा नाम जपे जो प्रानी। उसकी हो जावे सिद्ध बानी॥
पाप हरे तू एक ही छिन में। शांति भरे तू सबके मन में॥
तू है धर्म की एक निशानी। तू ही है मोक्ष की महरानी॥
जो चालीसा तेरा गावे। ऋद्धि सिद्धि वह निश्चय पावे॥
॥ दोहा ॥
भव सागर से तारने, तू ही है इक नाव।
तेरी कृपा से ही मिले, मोक्ष का उत्तम ठाव॥
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📿 श्री गंगा चालीसा पाठ (Shri Ganga Chalisa Lyrics)
पूर्ण श्रद्धा, पवित्र मन और साफ वस्त्र धारण करके माता गंगा का ध्यान करें और इस चालीसा (Ganga Chalisa) का पाठ करें:
।।स्तुति।।
मात शैल्सुतास पत्नी ससुधाश्रंगार धरावली ।
स्वर्गारोहण जैजयंती भक्तीं भागीरथी प्रार्थये।।
।।दोहा।।
जय जय जय जग पावनी, जयति देवसरि गंग।
जय शिव जटा निवासिनी, अनुपम तुंग तरंग।।
।।चौपाई।।
जय जय जननी हराना अघखानी। आनंद करनी गंगा महारानी।।
जय भगीरथी सुरसरि माता। कलिमल मूल डालिनी विख्याता।।
जय जय जहानु सुता अघ हनानी। भीष्म की माता जगा जननी।।
धवल कमल दल मम तनु सजे। लखी शत शरद चंद्र छवि लजाई।।
वहां मकर विमल शुची सोहें। अमिया कलश कर लखी मन मोहें।।
जदिता रत्ना कंचन आभूषण। हिय मणि हर, हरानितम दूषण।।
जग पावनी त्रय ताप नासवनी। तरल तरंग तुंग मन भावनी।।
जो गणपति अति पूज्य प्रधान। इहूं ते प्रथम गंगा अस्नाना।।
ब्रह्मा कमंडल वासिनी देवी। श्री प्रभु पद पंकज सुख सेवि।।
साथी सहस्त्र सागर सुत तरयो। गंगा सागर तीरथ धरयो।।
अगम तरंग उठ्यो मन भवन। लखी तीरथ हरिद्वार सुहावन।।
तीरथ राज प्रयाग अक्षैवेता। धरयो मातु पुनि काशी करवत।।
धनी धनी सुरसरि स्वर्ग की सीधी। तरनी अमिता पितु पड़ पिरही।।
भागीरथी ताप कियो उपारा। दियो ब्रह्म तव सुरसरि धारा।।
जब जग जननी चल्यो हहराई। शम्भु जाता महं रह्यो समाई।।
वर्षा पर्यंत गंगा महारानी। रहीं शम्भू के जाता भुलानी।।
पुनि भागीरथी शम्भुहीं ध्यायो। तब इक बूंद जटा से पायो
ताते मातु भें त्रय धारा। मृत्यु लोक, नाभा, अरु पातारा।।
गईं पाताल प्रभावती नामा। मन्दाकिनी गई गगन ललामा।।
मृत्यु लोक जाह्नवी सुहावनी। कलिमल हरनी अगम जग पावनि।।
धनि मइया तब महिमा भारी। धर्मं धुरी कलि कलुष कुठारी।।
मातु प्रभवति धनि मंदाकिनी। धनि सुर सरित सकल भयनासिनी।।
पन करत निर्मल गंगा जल। पावत मन इच्छित अनंत फल।।
पुरव जन्म पुण्य जब जागत। तबहीं ध्यान गंगा महं लागत।।
जई पगु सुरसरी हेतु उठावही। तई जगि अश्वमेघ फल पावहि।।
महा पतित जिन कहू न तारे। तिन तारे इक नाम तिहारे।।
शत योजन हूं से जो ध्यावहिं। निशचाई विष्णु लोक पद पावहीं।।
नाम भजत अगणित अघ नाशै। विमल ज्ञान बल बुद्धि प्रकाशे।।
जिमी धन मूल धर्मं अरु दाना। धर्मं मूल गंगाजल पाना।।
तब गुन गुणन करत दुख भाजत। गृह गृह सम्पति सुमति विराजत।।
गंगहि नेम सहित नित ध्यावत। दुर्जनहूं सज्जन पद पावत।।
उद्दिहिन विद्या बल पावै। रोगी रोग मुक्त हवे जावै।।
गंगा गंगा जो नर कहहीं। भूखा नंगा कभुहुह न रहहि।।
निकसत ही मुख गंगा माई। श्रवण दाबी यम चलहिं पराई।।
महं अघिन अधमन कहं तारे। भए नरका के बंद किवारें।।
जो नर जपी गंग शत नामा।। सकल सिद्धि पूरण ह्वै कामा।।
सब सुख भोग परम पद पावहीं। आवागमन रहित ह्वै जावहीं।।
धनि मइया सुरसरि सुख दैनि। धनि धनि तीरथ राज त्रिवेणी।।
ककरा ग्राम ऋषि दुर्वासा। सुन्दरदास गंगा कर दासा।।
जो यह पढ़े गंगा चालीसा। मिली भक्ति अविरल वागीसा।।
।।दोहा।।
नित नए सुख सम्पति लहैं। धरें गंगा का ध्यान।।
अंत समाई सुर पुर बसल। सदर बैठी विमान।।
संवत भुत नभ्दिशी। राम जन्म दिन चैत्र।।
पूरण चालीसा किया। हरी भक्तन हित नेत्र।।
(पाठ पूर्ण होने के बाद माता गंगा की आरती करें और तांबे के पात्र में रखे जल को पूरे घर में छिड़क दें।)
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🌟 आर्थिक तंगी और डिप्रेशन दूर करने का ज्योतिषीय रहस्य
राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ स्थित प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि जन्म कुंडली में जब चंद्रमा राहु या शनि से पीड़ित होता है, तो व्यक्ति को भयंकर मानसिक तनाव (Depression), अज्ञात भय और धन की भारी कमी का सामना करना पड़ता है। माता गंगा साक्षात जल तत्व और चंद्रमा की प्रतीक हैं।
चंद्रमा के मारक दोषों को 100% शून्य करने, मानसिक शांति पाने और दसों दिशाओं से व्यापार में धन आकर्षित करने के लिए साक्षात भगवान विष्णु का स्वरूप ’10 मुखी रुद्राक्ष’ (10 Mukhi Rudraksha) धारण करना सबसे अमोघ ज्योतिषीय ‘कवच’ है। इसे गले में धारण करके रोज़ाना गंगा चालीसा पढ़ने से व्यक्ति का बाल भी कोई बांका नहीं कर सकता।
⚠️ गंगा चालीसा पाठ के 3 कड़े नियम
- स्वच्छता और आसन: गंगा चालीसा का पाठ हमेशा कुशा या ऊनी आसन पर बैठकर ही करें। बिना स्नान किए या बिस्तर पर लेटकर इसका पाठ कभी न करें।
- जल का पात्र: पाठ करते समय अपने सामने एक तांबे के लोटे में थोड़ा सा गंगाजल और सादा जल मिलाकर अवश्य रखें। पाठ के बाद इस अभिमंत्रित जल को प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
- मांस-मदिरा का पूर्ण त्याग: जिस घर में गंगा चालीसा का नियमित पाठ होता है, वहां मांस, मदिरा (शराब) या अंडे का प्रवेश पूर्णतः वर्जित होना चाहिए।
Ganga Chalisa in Hindi❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: क्या महिलाएं मासिक धर्म (Periods) में गंगा चालीसा पढ़ सकती हैं?
Ans: शास्त्रों के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान किसी भी पवित्र पुस्तक या चालीसा का पाठ (स्पर्श करके) नहीं करना चाहिए। आप चाहें तो फोन पर या मन ही मन इसका श्रवण (सुन) कर सकती हैं।
Q2: गंगा चालीसा का पाठ दिन में कितनी बार करना चाहिए?
Ans: अपनी मनोकामना की शीघ्र पूर्ति के लिए गंगा चालीसा का पाठ रोज़ाना कम से कम 1 बार या 3 बार करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
Q3: गंगाजल को घर की किस दिशा में रखना चाहिए?
Ans: वास्तु शास्त्र के अनुसार, गंगाजल को हमेशा घर के ‘ईशान कोण’ (North-East) यानी पूजा घर में रखना सबसे पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा देने वाला होता है।
निष्कर्ष: श्री गंगा चालीसा वह दिव्य चाबी है जो आपके जीवन की हर बंद किस्मत का ताला खोल सकती है। Freeupay.in पर दिए गए नियमों के साथ आज ही से इसका पाठ शुरू करें। माता गंगा की कृपा से आपके घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं रहेगी।
अभी शेयर करें: माता गंगा की यह स्तुति किसी के भी जीवन में मंगल ला सकती है। इस पवित्र और बहुमूल्य लेख को अपने परिवार, दोस्तों और सभी WhatsApp ग्रुप्स में तुरंत शेयर करें!
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