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Kemdrum Yog Kaise Banta Hai: राजा को भी भिखारी बना देता है कुंडली का ये भयंकर दोष, जानें इसके कारण और अचूक उपाय

Kemdrum Yog Kaise Banta Hai: केमद्रुमे भवति पुत्रकलत्रहीनो देशान्तरे दु:खसमाभितप्त ज्ञातिप्रमोदनिरतो मुखर: कुचैलो नीच सदा भवति भीतियुतश्चिरायु: जातक की जन्म कुंडली में बनाने वाला यह एक अशुभ योग है। इस योग के चलते जातक मानसिक रोगों का शिकार हो जाता है । इस योग के कारण जातक के जीवन में अधूरापन सदैव बना रहता हैं । इसलिए जब भी कोई मुसीबत या असफलता मिलती हैं तो दूसरों की अपेक्षा इस योग के पीड़ित को कई गुना महसूस होती हैं। जातक का मन अस्थिर एवं अशांत रहता है। केमद्रुम योग जीवन में दरिद्रता की पराकाष्ठा लेकर आता है। आइए केमद्रुम योग के बारे में कुछ विस्तार से जानते हैं।

Kemdrum Yog Kaise Banta Hai: राजा को भी भिखारी बना देता है कुंडली का ये दोष, जानें इसके कारण और अचूक उपाय

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Kemdrum Yog Kaise Banta Hai
Kemdrum Yog Kaise Banta Hai

ज्योतिष के अनुसार मान्यता है, कि जिस व्यक्ति की कुंडली केमद्रुम दोष होता हैं, उस कुंडली में शुभ ‘राजयोग’ होते हुए भी व्यक्ति को राजा से भिखारी बनाने की क्षमता रखता है। इस केमद्रुम दोष (Kemdrum Yog) से प्रभावित व्यक्ति को अपने जीवन में बहुत ज्यादा संघर्ष, दरिद्रता, अकेलापन और कर्ज आदि संबधित समस्या का सामना करना पड़ता है। Freeupay.in के इस विशेष लेख में विस्तार से जानिए कि केमद्रुम योग कैसे बनता है, यह कब भंग होता है।

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🌙 क्विक लिस्ट: केमद्रुम योग बनना और भंग होना (Kemdrum Yog Kaise Banta Hai)

केमद्रुम योग कैसे बनता हैं? (Kemdrum Yog Kaise Banta Hai) कुंडली का सटीक मिलान करने के लिए इस टेबल को ध्यान से पढ़ें:

ज्योतिषीय स्थितिकुंडली में क्या देखें? (Astrological Rule)
केमद्रुम योग कैसे बनता है?जब कुंडली में चंद्रमा (Moon) जिस भाव में बैठा हो, उसके आगे (दूसरे भाव) और पीछे (बारहवें भाव) कोई भी ग्रह न हो। (सूर्य, राहु और केतु को छोड़कर)।
केमद्रुम योग भंग (Cancel) कैसे होता है?1. जब चंद्रमा के साथ कोई शुभ ग्रह बैठा हो।
2. चंद्रमा पर देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) की पूर्ण दृष्टि पड़ रही हो।
3. चंद्रमा से केंद्र (1, 4, 7, 10वें भाव) में कोई शुभ ग्रह मौजूद हो।
इस दोष का मुख्य प्रभावभयंकर मानसिक तनाव, डिप्रेशन, जमा किया हुआ धन नष्ट होना और व्यापार में भयंकर घाटा।

🌙 कैसे बनता है यह ‘केमद्रुम दोष’: (Kemdrum Yog Kaise Banta Hai)

किसी भी लग्न की कुण्डली में चन्द्रमा जिस राशी में होता है, उसके दूसरे और बारहवें भाव में सूर्य के अलावा अन्य कोई ग्रह न हो तो जन्म कुण्डली में “केमद्रुम योग” (Kemdrum Yog) बनता है। अभिप्राय यह है, कि चन्द्रमा के दोनों ओर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, या शनि में से किसी न किसी ग्रह का होना आवश्यक हैं। इस योग में राहू एवं केतु को मान्यता नहीं दी हैं, क्योंकि ये मात्र छाया ग्रह हैं। परन्तु चन्द्रमा के दोनों में से किसी ओर उपरोक्त ग्रहों में से कोई ग्रह न हो तो प्रबल दुर्भाग्य का प्रतीक “केमद्रुम योग” बनता हैं।

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😱 केमद्रुम दोष का जीवन पर प्रभाव (Effects of Kemdrum Dosh)

जिस जातक (व्यक्ति) की कुंडली में केमद्रुम योग (Kemdrum Yog) का निर्माण होता है, उसका जीवन संघर्षों से भर जाता है:

  1. दरिद्रता और कर्ज: व्यक्ति चाहे कितनी भी मेहनत कर ले, उसके पास पैसा नहीं टिकता। अक्सर ऐसे लोग भारी कर्ज के जाल में फंस जाते हैं।
  2. मानसिक अशांति और डिप्रेशन: इस योग (Kemdrum Yog) के कारन जातक के मन में भटकाव और असंतुष्टि की स्थिति बनी रहती है। चंद्रमा मन का कारक है। आगे-पीछे कोई ग्रह न होने से चंद्रमा ‘अकेला’ पड़ जाता है, जिससे जातक को हमेशा अकेलापन, अज्ञात भय और आत्महत्या जैसे नकारात्मक विचार आते हैं।
  3. करियर और नौकरी में अस्थिरता: व्यक्ति एक जगह टिक कर काम नहीं कर पाता। बार-बार नौकरी छूटती है या व्यापार में बड़ा नुकसान होता है।
  4. भटकने के लिए मजबूर: इस योग (Kemdrum Yog) के विद्यमान होने पर जातक स्त्री, संतान, धन, घर, वाहन, कार्य-व्यवसाय, माता-पिता एवं अन्य रिश्तेदारों अर्थात सभी प्रकार के सुखों से हीन होकर इधर-उधर व्यर्थ भटकने के लिए मजबूर होता हैं।
  5. जीवन दु:ख: इस योग (Kemdrum Yog) के कारण जातक निर्धन बनता है एवं उसे अपना पूरा जीवन दुख में भोगना पड़ता है।
  6. जातक पारिजात अनुसार: जन्म के समय यदि किसी जातक की कुण्डली में केमद्रुम योग हो तथा इसके साथ ही उसकी कुंडली में और भी सैकड़ों अन्य राजयोग हो तो वह भी निष्फल हो जाते हैं।
  7. आर्थिक स्थिति बदतर होना: इस योग का मुख्य प्रभाव यह है कि इसके कारण जातक की आर्थिक स्थिति बदतर हो जाती है।
  8. राजयोग पर प्रभाव: केमद्रुम योग (Kemdrum Yog) अन्य सैकड़ों राजयोगों के सुन्दर प्रभावों को भी उसी प्रकार समाप्त कर देता है, जिस प्रकार जंगल का राजा शेर हाथियों का प्रभाव समाप्त कर देता हैं।

संपर्क करें- पंडित ललित त्रिवेदी (+91-9667189678)

किसी भी प्रकार के ज्योतिष एवं वास्तु संबंधी परामर्श के लिए वास्तु ज्योतिष पंडित ललित त्रिवेदी से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, जैसे कि धन, स्वास्थ्य, व्यापार, करियर, नौकरी आदि जैसी समस्याएं। वास्तु विजिट भी करवा सकते हैं, तथा वास्तु परामर्श भी प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी प्रकार के कुंडली मिलान, विवाह मुहूर्त, गृह प्रवेश या अन्य सभी प्रकार के मुहूर्त एवं शुभ समय निकलवाने के लिए तुरंत संपर्क करें।

केमद्रुम भंग योग (Kemdrum Yog Bhang)

  • यदि चंद्रमा केंद्र में स्वराशिस्थ या उच्च राशिस्थ होकर शुभ स्थिति में हो।
  • यदि कुण्डली में चन्द्र कि उच्चराशी वृष या स्वराशी कर्क केंद्र में हो।
  • यदि चंद्र अधिष्ठित राशि का स्वामी लग्न में स्थित हो।
  • यदि लग्नेश बुध या गुरु से दृष्ट होकर शुभ स्थिति में हो।
  • यदि चंद्र अधिष्ठित राशि का स्वामी गुरु से दृष्ट हो।
  • यदि चंद्र और गुरु के मध्य भाव परिवर्तन का संबंध बन रहा हो।
  • यदि चन्द्र के साथ अन्य कोई भी ग्रह एक ही भाव में विराजित हो।
  • यदि कई ग्रहों की दृष्टी यदि चन्द्र पर हो तो भी इस दोष का दु:ष्प्रभाव कम हो जाता है।
  • यदि चंद्र अधिष्ठित राशि का स्वामी चंद्र पर दृष्टि डाल रहा हो।
  • यदि चंद्र अधिष्ठित राशि का स्वामी चंद्र से भाव परिवर्तन का संबंध बना रहा हो।
  • यदि चंद्र अधिष्ठित राशि का स्वामी लग्नेश, पंचमेश, सप्तमेश या नवमेश के साथ युति या दृष्टि संबंध बना रहा हो।
  • यदि लग्नेश, पंचमेश, सप्तमेश और नवमेश में से कम से कम किन्हीं दो भावेशों का आपस में युति या दृष्टि संबंध बन रहा हो।
  • यदि चंद्र पर बुध या गुरु की पूर्ण दृष्टि हो अथवा लग्न में बुध या गुरु की स्थिति या दृष्टि हो।

 उपरोक्त स्थितियों में से कोई भी एक स्थिति बने तो भी “केमद्रुम योग” भंग हो जाता है। ज्योतिष के लगभग सभी महानुभाव इस बात से पूर्णतः सहमत हैं। परन्तु कुछ विशेषज्ञों का मानना है की जन्मकुण्डली में “केमद्रुम योग” तथा “केमद्रुम भंग योग” (Kemdrum Yog) इन दोनों के होते हुए भी जातक को सम्बंधित ग्रहों कि दशा-अन्तर्दशा में मिश्रित फलों का सामना करना ही पड़ता है।

🌟 केमद्रुम दोष खत्म करने के अचूक और सिद्ध ज्योतिषीय उपाय

यदि आपकी कुंडली में केमद्रुम दोष (Kemdrum Yog) बन रहा है और यह ‘भंग’ (Cancel) नहीं हो रहा है, तो घबराने की ज़रूरत नहीं है। इन अचूक उपायों से आप इस दोष को शांत कर सकते हैं:

जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?

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चंद्रमा के दोष का ‘महाकवच’ (ज्योतिषीय रहस्य)

राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ स्थित प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि केमद्रुम दोष के कारण व्यक्ति की मानसिक शक्ति पूरी तरह क्षीण (कमज़ोर) हो जाती है और वह गलत निर्णय लेकर अपना सब कुछ बर्बाद कर लेता है।

चंद्रमा को बलवान करने, डिप्रेशन से बाहर आने और आर्थिक तंगी को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए साक्षात अर्द्धनारीश्वर स्वरूप ‘2 मुखी रुद्राक्ष’ (2 Mukhi Rudraksha) धारण करना सबसे शक्तिशाली अस्त्र है। यह रुद्राक्ष धारण करते ही चंद्रमा के सभी दोष शून्य हो जाते हैं और बंद किस्मत के ताले खुल जाते हैं।

Kemdrum Yog Kaise Banta Hai❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: क्या केमद्रुम योग हमेशा बुरा फल ही देता है?

Ans: नहीं! यदि कुंडली में केमद्रुम योग ‘भंग’ (Cancel) हो रहा हो (यानी केंद्र में शुभ ग्रह हों), तो यह योग व्यक्ति को अपार सफलता, राजयोग और बहुत बड़ा पद भी दिला सकता है।

Q2: केमद्रुम दोष वाले व्यक्ति को कौन सा रत्न पहनना चाहिए?

Ans: ऐसे जातकों को चांदी की अंगूठी में सिद्ध किया हुआ ‘सच्चा मोती’ (Pearl) अपनी सबसे छोटी उंगली (कनिष्ठा) में सोमवार के दिन धारण करना चाहिए। (रत्न हमेशा ज्योतिषी की सलाह से ही पहनें)।

Q3: क्या घर के वास्तु का चंद्रमा से कोई संबंध है?

Ans: जी हाँ! घर का वायव्य कोण (North-West) चंद्रमा का स्थान है। इस दिशा को हमेशा साफ और दोषमुक्त रखने से मानसिक शांति मिलती है।

निष्कर्ष: केमद्रुम योग कोई श्राप नहीं है, बल्कि यह आपके पिछले जन्म के कर्मों का फल है। Freeupay.in पर बताए गए इन अचूक और प्रामाणिक उपायों को पूरे विश्वास के साथ करें। महादेव की कृपा से आपके जीवन की सारी दरिद्रता और मानसिक तनाव हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

अभी शेयर करें: कुंडली का यह दोष आज बहुत से लोगों के संघर्ष का कारण है। इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने परिवार, रिश्तेदारों और सभी WhatsApp ग्रुप्स में तुरंत शेयर करें!

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