WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Sutak Patak Kya Hai: सूतक और पातक में क्या अंतर है? जानें कितने दिन का होता है और इसके कड़े नियम

Sutak Patak Kya Hai: घर में जब कोई बच्चा जन्म लेता है तो उस घर में रहने वाले जातक व उसके सम्पूर्ण कुल को सूतक लग जाता है और यदि कोई मृत्यु हो जाये तो पातक लगेगा। सूतक या पातक में मंदिर में प्रवेश नहीं करते किन्तु इसके पीछे क्या कारन है यह भी समझ लेना ज़रूरी है।

Sutak Patak Kya Hai: सूतक और पातक में क्या अंतर है? जानें इसके दिन और 5 कड़े नियम

हमारी वेबसाइट FreeUpay.in (फ्री उपाय.इन) में रोजाना आने वाले व्रत त्यौहार की जानकारी के अलावा मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, साधना, व्रत कथा, ज्योतिष उपाय, लाल किताब उपाय, स्तोत्र आदि महत्वपूर्ण जानकारी उबलब्ध करवाई जाएगी सभी जानकारी का अपडेट पाने के लिए दिए गये हमारे WhatsApp Group Link (व्हात्सप्प ग्रुप लिंक) क्लिक करके Join (ज्वाइन) कर सकते हैं।

हर समस्या का फ्री उपाय (Free Upay) जानने के लिए हमारे WhatsApp Channel (व्हात्सप्प चैनल) से जुड़ें: यहां क्लिक करें (Click Here)

Sutak Patak Kya Hai
Sutak Patak Kya Hai

यह तो आप सब पहले से जानते हो, की हमारे हिंदू धर्म और शास्त्रों के अनुसार शुद्धता (Purity) और पवित्रता का बहुत महत्व बताया गया है। जब भी हमारे परिवार या फिर कुल में किसी भी बच्चे का जन्म या किसी भी सदस्य की मृत्यु होती है, तो उस संबधित परिवारों के घर में कुछ दिनों के लिए किसी भी प्रकार के धार्मिक और सामाजिक कार्यों की मनाही हो जाती है। इसी अशुद्धि काल को ही शास्त्रों में ‘सूतक’ (Sutak) और ‘पातक’ (Patak) के नाम से जाना गया है।

ऑनलाइन सलाह (Online): कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन (Call Button) पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।

महत्वपूर्ण जानकारी: एक सिद्ध किया हुआ असली रूद्राक्ष आपकी दशा और दिशा दोनों बदल सकता हैं? अभी यहां से खरीदें

ऑफलाइन सलाह (Offline): कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए हमसे मिलने के लिए यहाँ तुरंत सम्पर्क करें: क्लिक हियर (Click Here)

आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में कई लोगों को सूतक और पातक के सही नियमों और दिनों की जानकारी नहीं होती, जिसके कारण वे अनजाने में देवी-देवताओं के प्रकोप का भागीदार बन जाते हैं। Freeupay.in के इस विशेष लेख में विस्तार से जानिए सूतक और पातक क्या है, (Sutak Patak) दोनों में क्या अंतर है और इस दौरान किन नियमों का पालन करना सबसे ज़रूरी है।

⚖️ क्विक लिस्ट: सूतक और पातक में मुख्य अंतर (Sutak Patak Kya Hai)

Sutak Patak की जानकारी पाने के लिए इस टेबल को पढ़ें। यह आपके सारे भ्रम दूर कर देगी:

विवरण (Details)सूतक (Sutak / जननाशौच)पातक (Patak / मरणाशौच)
कब लगता है?परिवार या कुल में किसी बच्चे के जन्म (Birth) पर लगता है।परिवार या कुल में किसी व्यक्ति की मृत्यु (Death) पर लगता है।
कारण क्या है?प्रसव (Delivery) के दौरान होने वाली शारीरिक अशुद्धि के कारण।मृत्यु के बाद शव (Dead Body) से फैलने वाले संक्रमण और अशुद्धि के कारण।
कितने दिन का होता है?सामान्यतः यह 10 दिन से लेकर सवा महीने (37-40 दिन) तक माना जाता है।सामान्यतः यह 12 से 13 दिन (तेरहवीं तक) माना जाता है।
मानसिक स्थितियह खुशी और उल्लास का समय होता है, बस धार्मिक कार्य वर्जित होते हैं।यह दुख, शोक और भारी नकारात्मक ऊर्जा का समय होता है।

👶 सूतक क्या है और इसके नियम (What is Sutak)

सूतक का सम्बन्ध “जन्म” के निम्मित से हुई अशुद्धि से है। जन्म के अवसर पर जो नाल काटा जाता है और जन्म होने की प्रक्रिया में अन्य प्रकार की जो हिंसा होती है, उसमे लगने वाले दोष/पाप के प्रायश्चित स्वरुप “सूतक” माना जाता है। Sutak Patak

सलाह: कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।

महत्वपूर्ण जानकारी: आपकी समस्या के अनुसार सिद्ध किये गये असली रूद्राक्ष यहां से खरीदें

  • कितने दिन का होता है: जन्म के बाद नवजात की 3 और 4 पीढ़ी तक 10 दिन का सूतक, 5 पीढ़ी तक 6 दिन का सूतक होता है। नवजात की माँ को 45 दिन का सूतक रहता है। प्रसूति स्थान 1 माह तक अशुद्ध होता है, इसी लिए कई लोग जब भी अस्पताल से घर आते हैं तो स्नान करते हैं। एक रसोई में भोजन करने वालों के पीढ़ी नहीं गिनी जाती बल्कि वहाँ पूरा 10 दिन (हवन/नामकरण होने तक) का सूतक माना है। अपनी पुत्री यदि पीहर में जनै तो हमे ३ दिन का, ससुराल में जन्म दे तो उन्हें १० दिन का सूतक रहता है। और हमे कोई सूतक नहीं रहता है।
  • नौकर-चाकर के लिए: यदि अपने घर में जन्म दे तो 1 दिन का, बाहर दे तो हमे कोई सूतक नहीं।
  • घर के पालतू पशु के लिए: वहीं घर के पालतू गाय, भैंस, घोड़ी, बकरी इत्यादि को घर में बच्चा होने पर हमे १ दिन का सूतक रहता है। परन्तु घर से दूर-बाहर जन्म होने पर कोई सूतक नहीं रहता। बच्चा देने वाली गाय, भैंस और बकरी का दूध, क्रमशः 15 दिन, 10 दिन और 8 दिन तक अशुद्ध रहता है।
  • सूतक के नियम: इस दौरान परिवार के सदस्यों को मंदिर नहीं जाना चाहिए, भगवान की मूर्तियों का स्पर्श नहीं करना चाहिए और किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य (जैसे शादी, मुंडन) में हिस्सा नहीं लेना चाहिए।

संपर्क करें- पंडित ललित त्रिवेदी (+91-9667189678)

किसी भी प्रकार के ज्योतिष एवं वास्तु संबंधी परामर्श के लिए वास्तु ज्योतिष पंडित ललित त्रिवेदी से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, जैसे कि धन, स्वास्थ्य, व्यापार, करियर, नौकरी आदि जैसी समस्याएं। वास्तु विजिट भी करवा सकते हैं, तथा वास्तु परामर्श भी प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी प्रकार के विवाह मुहूर्त, गृह प्रवेश या अन्य सभी प्रकार के मुहूर्त एवं शुभ समय निकलवाने के लिए तुरंत संपर्क करें।

🥀 पातक क्या है और इसके नियम (What is Patak)

पातक का सम्बन्ध “मरण के” निम्मित से हुई अशुद्धि से है। मरण के अवसर पर दाह-संस्कार में इत्यादि में जो हिंसा होती है, उसमे लगने वाले दोष/पाप के प्रायश्चित स्वरुप “पातक” या ‘मरणाशौच’ माना जाता है। Sutak Patak

  • कितने दिन का होता है: मरण के बाद हुई अशुद्धि 3 पीढ़ी तक 12 या 13 दिन, 4 पीढ़ी तक 10 दिन और 5 पीढ़ी तक 6 दिन पातक मन। जिस दिन दाह-संस्कार किया जाता है, उस दिन से पातक के दिनों की गणना होती है, न कि मृत्यु के दिन से। यदि घर का कोई सदस्य बाहर/विदेश में है, तो जिस दिन उसे सूचना मिलती है, उस दिन से शेष दिनों तक उसके पातक लगता है। अगर 12 दिन बाद सूचना मिले तो स्नान-मात्र करने से शुद्धि हो जाती है।
  • गर्भपात होने पर: किसी स्त्री के यदि गर्भपात हुआ हो तो, जितने माह का गर्भ पतित हुआ, उतने ही दिन का पातक मानना चाहिए।
  • साधु संत के लिए: घर का कोई सदस्य मुनि-आर्यिका-तपस्वी बन गया हो तो, उसे घर में होने वाले जन्म-मरण का सूतक-पातक नहीं लगता है। किन्तु स्वयं उसका ही मरण हो जाने पर उसके घर वालों को 1 दिन का पातक लगता है।
  • शवयात्रा में जाने वाले के लिए: किसी अन्य की शवयात्रा में जाने वाले को 1 दिन का, मुर्दा छूने वाले को 3 दिन और मुर्दे को कन्धा देने वाले को 8 दिन की अशुद्धि जाननी चाहिए।
  • आत्महत्या करने पर: घर में कोई आत्मघात करले तो 6 महीने का पातक मानना चाहिए। यदि कोई स्त्री अपने पति के मोह से जल मरे, बालक पढाई में फेल होकर या कोई अपने ऊपर दोष देकर मरता है तो इनका पातक 6 महीने का होता है। जिसके घर में इस प्रकार अपघात होता है, वहाँ छह महीने तक कोई बुद्धिमान मनुष्य भोजन अथवा जल भी ग्रहण नहीं करता है। वह मंदिर नहीं जाता और ना ही उस घर का द्रव्य मंदिर में चढ़ाया जाता है। अनाचारी स्त्री-पुरुष के हर समय ही पातक रहता है।
  • पातक के कड़े नियम: पातक के दौरान घर में कोई भी छौंक (तड़का) नहीं लगाया जाता। सादा भोजन बनता है। पूजा-पाठ पूरी तरह वर्जित होता है। इस दौरान किसी के घर जाना या किसी का आतिथ्य स्वीकार करना भी मना होता है।

🌟 ज्योतिषीय रहस्य: अशुद्धि काल में नकारात्मकता से कैसे बचें?

राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ स्थित प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित ललित त्रिवेदी जी बताते हैं कि सूतक हो या पातक, इस दौरान शारीरिक अशुद्धि तो होती ही है, लेकिन सबसे ज्यादा प्रभाव हमारे ‘आभामंडल’ (Aura) पर पड़ता है। पातक (मृत्यु) के समय घर में बहुत ज्यादा ‘नकारात्मक ऊर्जा’ और अज्ञात भय का वास हो जाता है।

शास्त्रों में बताया गया है कि सूतक-पातक (Sutak Patak) के दौरान भगवान की मूर्ति को छूना मना है, लेकिन ‘मानसिक जाप’ (मन ही मन इष्ट देव का स्मरण) कभी खंडित नहीं होता। इसके अलावा, पातक (मृत्यु के शोक) के दौरान घर की नकारात्मक ऊर्जा और अज्ञात भय से बचने के लिए, परिवार के सदस्यों को साक्षात महाकाल का स्वरूप ‘5 मुखी रुद्राक्ष’ (5 Mukhi Rudraksha) गले में धारण करना चाहिए। रुद्राक्ष एक ऐसा अमोघ ‘कवच’ है जो अशुद्धि काल में भी पवित्र रहता है और हर प्रकार की बुरी शक्तियों से रक्षा करता है।

जानें: रुद्राक्ष कौन-कौनसी समस्या को दूर कर सकता हैं?

सलाह: कुंडली विश्लेषण या फिर जीवन में जुड़ी किसी समस्या संबधित समाधान के लिए तुरंत नीचे दिए गये कॉल बटन पर क्लिक करके आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी से तुरंत सम्पर्क करें।

⚠️ सूतक-पातक के 3 कड़े नियम (भूलकर भी न करें ये काम)

  1. तुलसी को स्पर्श न करें: सूतक या पातक के दौरान घर में लगे तुलसी के पौधे को भूलकर भी नहीं छूना चाहिए और न ही उसमें जल चढ़ाना चाहिए। Sutak Patak
  2. मूर्ति स्पर्श और देव दर्शन वर्जित: इस दौरान घर के मंदिर का पर्दा गिरा देना चाहिए। आप मन में भगवान का ध्यान कर सकते हैं, लेकिन मूर्तियों को छूना या धूप-दीप जलाना सख्त वर्जित है। सूतक-पातक (Sutak Patak) की अवधि में “देव-शास्त्र-गुरु” का पूजन, प्रक्षाल, आहार आदि धार्मिक क्रियाएं वर्जित होती हैं। इन दिनों में मंदिर के उपकरणों को स्पर्श करने का भी निषेध है। यहाँ तक की गुल्लक में रुपया डालने का भी निषेध बताया है। परन्तु ये कहीं नहीं कहा कि सूतक-पातक में मंदिर जाना वर्जित है या मना है। मंदिर में जाना, देव-दर्शन, प्रदिक्षणा, जो पहले से याद हैं वो विनती/स्तुति बोलना, भाव-पूजा करना, हाथ की अँगुलियों पर जाप करना। यह सूतक-पातक आर्ष-ग्रंथों से मान्य है। Sutak Patak
  3. सूतक-पातक की समाप्ति: जब निर्धारित दिन पूरे हो जाएं, तो पूरे घर को गंगाजल और गौमूत्र छिड़क कर पवित्र किया जाता है। इसके बाद ही घर में दोबारा पूजा-पाठ शुरू होता है। Sutak Patak
  4. यह ना करें: कहीं कहीं लोग सूतक-पातक (Sutak Patak) के दिनों में मंदिर ना जाकर इसकी समाप्ति के बाद मंदिर से गंधोदक लाकर शुद्धि के लिए घर-दुकान में छिड़कते हैं, ऐसा करके नियम से घोरंघोर पाप का बंध करते हैं। इन्हे समझना इसलिए ज़रूरी है, ताकि अब आगे घर-परिवार में हुए जन्म-मरण के अवसरों पर अनजाने से भी कहीं दोष का उपार्जन न हो। Sutak Patak

Sutak Patak Kya Hai❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: क्या ग्रहण (Eclipse) के समय लगने वाले नियम भी सूतक कहलाते हैं?

Ans: जी हाँ, सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण से कुछ घंटे पहले लगने वाले समय को भी ‘सूतक काल’ (Sutak Patak) कहा जाता है। इस दौरान भी प्रकृति में अशुद्धि होती है, इसलिए पूजा-पाठ और भोजन करना वर्जित होता है।

Q2: यदि घर का कोई सदस्य विदेश में है, तो क्या उस पर सूतक-पातक लागू होगा?

Ans: शास्त्रों के अनुसार, जो सदस्य घर से दूर (विदेश या दूसरे शहर) रहते हैं, उन्हें जिस दिन बच्चे के जन्म या मृत्यु की सूचना मिलती है, उस दिन से बचे हुए दिनों का सूतक या पातक उन पर भी लागू होता है।

Q3: क्या सूतक-पातक में मानसिक जाप किया जा सकता है?

Ans: बिल्कुल! सूतक-पातक में केवल बाह्य (बाहरी) कर्मकाण्ड वर्जित हैं। मन ही मन भगवान के नाम का जाप (मानसिक जाप) आप कभी भी और कहीं भी कर सकते हैं।

निष्कर्ष: सूतक और पातक सनातन धर्म के ऐसे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक नियम हैं जो हमें संक्रमण (Infection) और नकारात्मक ऊर्जाओं से बचाते हैं। Freeupay.in पर दी गई इस जानकारी का पालन करके आप धर्म और शास्त्रों का सही तरीके से पालन कर सकते हैं।

अभी शेयर करें: सूतक-पातक के नियमों को लेकर आज भी बहुत से लोगों में भ्रम रहता है। इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने परिवार, रिश्तेदारों और सभी WhatsApp ग्रुप्स में तुरंत शेयर करें!

वैदिक उपाय और 30 साल फलादेश के साथ जन्म कुंडली बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े

10 वर्ष के उपाय के साथ अपनी लाल किताब की जन्मपत्री बनवाए केवल 500/- रूपये में: पूरी जानकारी यहां पढ़े

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Leave a Comment

Call Us Now
WhatsApp
We use cookies in order to give you the best possible experience on our website. By continuing to use this site, you agree to our use of cookies.
Accept